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जब विकलांग कोरोना वैक्सीन लेने जाते हैं, तो उन्हें क्या कुछ झेलना पड़ता है?

पर्सन विद डिसेबिलिटी (PwD). आम बोलचाल की भाषा में इनके लिए दिव्यांग या विकलांग शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इनको काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. अगर हालिया समय की बात करें जहां वैक्सीन की कमी को लेकर लोग परेशान हैं तो ऐसे में आप सोचिए कि एक दृष्टि बाधित व्यक्ति, या ऐसा व्यक्ति जो चलने में सक्षम ना हो उसे कितनी ज़्यादा मुश्किल का सामना करना पड़ रहा होगा.

किसी भी आपदा के दौरान हाशिए पर रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं. इस वक्त जब कोरोना वायरस के संक्रमण दर में कामी आई है और सरकार वैक्सीन लगाने पर पूरा ज़ोर देने की बात कह रही है तब सरकार को हाशिए पर रहने वाले लोगों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इसी श्रेणी में आते हैं PwD. लल्लनटॉप के एक दर्शक निलेश केशरी ने हमें एक मेल के ज़रिए वैक्सीन प्रक्रिया में PwD लोगों को आ रही दिक्कतें बयान कीं. उन्होंने कई ऐसी व्यावहारिक दिक्कतों का ज़िक्र किया जिनका PwD को सामना करना पड़ रहा है. जैसे कि

  • टीकाकरण के लिए खुद को नामांकित कराना काफ़ी मुश्किल है ख़ास कर दृष्टि बाधित व्यक्ति या किसी ऐसे व्यक्ति के लिए जो पढ़ने में अक्षम हो.
  • टीकाकरण केंद्र तक पहुंचना एक दूसरी बड़ी चुनौती है.
  • एक ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति को ढूँढना जो उनके साथ जा सके और पूरी प्रक्रिया के दौरान मदद कर सके.
  • वैक्सीन केंद्र पर बुनियादी चीज़ों की उपलब्धता, जैसे कि व्हीलचेयर के लिए रैंप, दृष्टि बाधित लोगों के लिए स्पर्श पथ, शौचालय के ख़ास प्रावधान आदि.

आम तौर पर PwD को ऐसी सुविधाओं की ज़रूरत होती है. लेकिन इसके अलावा और भी कई तरह की विशेष ज़रूरतें हो सकती हैं. जैसा कि दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले कन्हैया अग्रवाल कहते हैं,

“मैं देखने में अक्षम हूं. कोविन ऐप पर रेजिस्टर करने से एक “कैपचा” आता है, मेरे मोबाइल या कम्प्यूटर का सॉफ़्टवेयर उसे पढ़ नहीं पाता. अब मुझे किसी और की मदद से बुकिंग करनी पड़ेगी.”

वहीं 32 वर्ष की नव्या जो चल फिर पाने में अक्षम हैं, कहती हैं कि ‘मुझे वैक्सीन सेंटर जाने के लिए, 2-3 लोगों की मदद की ज़रूरत होगी. अगर कोई मेरे घर आकर वैक्सीन लगा जाता तो मेरी प्रॉब्लम सॉल्व हो जाती.’

PwD के हितों के लिए काम करने वाली एक संस्था नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ़ डिसेबल्ड के महासचिव मुरलीधरन बताते हैं कि उनकी संस्था ने देश भर में एक अभियान चलाया था. इस अभियान में उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की थी कि PwD और बूढ़े लोगों के लिए डोर स्टेप वैक्सीन पॉलिसी अपनाई जाए. मुरलीधरन कहते हैं,

“हमने ऐसा इस वजह से कहा क्योंकि सरकार ने खुद वैक्सीन पॉलिसी के दूसरे फ़ेज़ में PwD को जरूरतमंद की श्रेणी में डाला, लेकिन केंद्र ने अपना पल्ला झाड़ते हुए पूरी ज़िम्मेदारी राज्यों पर डाल दी. अब तक सिर्फ़ केरल, ओड़िशा और तमिलनाडु के कुछ शहरों में डोर स्टेप वैक्सीन पॉलिसी अपनाई गई है.”

वो आगे दिल्ली सरकार का ज़िक्र करते हुए कहते हैं, “दिल्ली सरकार ने 11 ज़िलों में ख़ास PwD के लिए वैक्सीन कैम्प लगवाए थे. लेकिन इसका अनुभव ये रहा कि बहुत कम लोग आए वैक्सीन लगवाने के लिए.”

मुरलीधरन के मुताबिक़ डोर स्टेप वैक्सिनेशन में ज़रूर कुछ मुश्किलें हो सकती हैं लेकिन रास्ता सिर्फ़ और सिर्फ़ वही एक है. क्योंकि उनके मुताबिक़ PwD के अलग-अलग कैटेगरी के लोगों की ज़रूरतें अलग-अलग हैं, ऐसे में सबकी सहूलियत सुनिश्चित कर पाने में काफ़ी संसाधनों की ज़रूरत होगी. सरकार के पास सारे लोगों का डेटा है, अगर सरकारें चाहें तो वो ऐसा आराम से कर सकती हैं.

हमारे दर्शक नीलेश PwD की मदद के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं. उन्होंने हमें बताया कि इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चिट्ठी लिखी है. नीलेश के सुझावों के मुताबिक़:-

  • आरोग्य सेतु (Arogya Setu) और कोविन (Cowin) ऐप में PwD के लिए एक सेक्शन जोड़ा जाना चाहिए.
  • ऐप में ऐसा प्रावधान होना चाहिए जहां व्यक्ति बता सके कि उसे किस तरह की मदद की ज़रूरत है. जैसे कि अगर व्यक्ति को वैक्सीन केंद्र पर पहुंचने के लिए किसी की ज़रूरत हो या और कुछ.
  • हर जिले में PwD के लिए कम से कम समर्पित टीकाकरण केंद्र होना चाहिए, जहां बुनियादी सुविधाएं होनी चाहिए. इसके लिए स्कूलों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो हर ज़िले में आम तौर पर मौजूद हैं.
  • प्रत्येक विकलांग व्यक्ति के लिए पिक एंड ड्रॉप की सुविधा होनी चाहिए जो स्वतंत्र रूप से केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
  • ऐसे व्यक्ति होने चाहिए जो पूरी प्रक्रिया के दौरान विकलांग व्यक्ति के साथ रहें और अगर ज़रूरत हो तो उन्हें घर से लाने और वापस छोड़ने में पूरी मदद करें.
  • इन केंद्रों को केंद्र सरकार द्वारा प्रशासित किया जाना चाहिए ताकि पूरे देश में ऐसे केंद्रों में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके.

ये सुझाव तो थे हमारे दर्शक नीलेश के. इसके अलावा भी कई हो सकते हैं. अगर आपको लगता है और भी कई दिक़्क़तें हैं जिसका सामना PwD को करना पड़ रहा है. तो आप हमें ज़रूर बताएं.


वीडियो- अर्थात: कोरोना वैक्सीन को लेकर चीन की ये पॉलिसी कैसे दुनिया बदलेगी?

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