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स्पेशल ट्रेनें चलने के बाद भी मज़दूर आखिरी वक्त में घर जाने का फैसला क्यों बदल रहे हैं?

मज़दूरों को घर भेजने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. साथ ही लॉकडाउन में थोड़ी-बहुत राहत भी दे दी गई है. इससे हुआ ये कि बहुत सी ट्रेनों में कई सीटें खाली रह जा रही हैं. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, लुधियाना में 5 मई के बाद तीन स्पेशल ट्रेनें चलीं, लेकिन इनमें कई सीटें खाली रहीं. क्योंकि बहुत से मज़दूरों ने घर लौटने के फैसले को कैंसिल कर दिया.

5 मई को लुधियाना से प्रयागराज एक ट्रेन चली, इसमें केवल 756 मज़दूर ही बैठे. वहीं अगले दिन बरेली के लिए एक ट्रेन चली, केवल 900 मज़दूर बैठे. जबकी इन ट्रेनों में एकसाथ 1200 मज़दूरों को ले जाने की क्षमता थी. इसके अलावा 6 मई की दोपहर को झारखंड के डाल्टनगंज के लिए एक ट्रेन चली. इस ट्रेन के छूटने से पहले 1600 लोगों के फोन पर मैसेज करके जानकारी दी गई थी, लेकिन तब भी केवल 1161 लोग ही ट्रेन में सवार हुए.

पंजाब में स्पेशल ट्रेनों के लिए पोर्टल में 11.4 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया था. इनमें से 5.88 लाख तो केवल लुधियाना से थे. लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर प्रदीप अग्रवाल ने बताया,

‘यहां फैक्ट्रियों में अभी एक लाख मज़दूर काम कर रहे हैं (सामान्य तौर पर 10 लाख मज़दूर काम करते हैं). इनमें से बहुत से ऐसे हैं जो आखिरी मिनट पर घर जाने के फैसले को कैंसिल कर दे रहे हैं. लॉकडाउन में इंडस्ट्री को दी गई राहत को देखते हुए.’

Specia Trains For Migrant Workers
कोच्चि से भुवनेश्वर जाने के लिए स्पेशल ट्रेन में बैठे प्रवासी मज़दूर और परिवार (प्रतीकात्मक तस्वीर. क्रेडिट- PTI)

प्रदीप अग्रवाल ने ये भी बताया कि रजिस्ट्रेशन के लिए कोई फीस नहीं ली जा रही है, इसलिए कैंसिल करने पर उन्हें कोई चार्ज भी नहीं देना पड़ रहा. इस वजह से लोग आसानी से कैंसिलेशन कर रहे हैं.

जिन लोगों ने घर जाने के फैसले को बदला उनमें से एक व्यक्ति, जो बिहार के बेगुसराय के रहने वाले हैं, उन्होंने बताया,

‘मैंने रजिस्ट्रेशन कराया था. लेकिन फिर लगा कि सफर करने से मुझे कोरोना वायरस लग सकता है. मेरा भाई भी हरियाणा में काम करता है, वो भी घर नहीं जा रहा. जब नांदेड़ से लौटने वाले 3000 लोगों में से कई कोरोना पॉजिटिव निकल रहे हैं, तो हम तो लाखों की संख्या में हैं.’

इस मज़दूर ने बताया कि अगर वो ट्रेन से अपने घर जाता भी, तो पहले उसे 14 दिन क्वारंटीन किया जाता. फिर जब वो वापस आता तो लुधियाना में 21 दिन क्वारंटीन किया जाता. ऐसे में उसे ये सब समय की बर्बादी लग रही थी. साथ ही जिस फैक्ट्री में वो काम करता था, वो भी अब खुल गई है, वो फिर से काम करने लगा है उसे पैसे मिलने लगे हैं. इसलिए उसने घर जाने के फैसले को ड्रॉप कर दिया.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.


वीडियो देखें: लॉकडाउन में छात्रों-मजदूरों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला

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