Submit your post

Follow Us

पीएम मोदी, आप एर्डोगन की बातें सुन लें, पर उनके इन कारनामों से दूर ही रहें

2.07 K
शेयर्स

टर्की के प्रेसिडेंट एर्डोगन दो दिन के लिए इंडिया आए हुए हैं. पीएम नरेंद्र मोदी से आज इनकी बात हुई.

# एर्डोगन ने कहा है कि इंडिया और टर्की दोनों के लिए आतंकवाद एक शेयर्ड चिंता है. कोई वजह नहीं है जिससे आतंकवाद को सही साबित किया जा सके. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में टर्की हमेशा भारत के साथ रहेगा. आतंकवादी उसी खून में डुबा दिए जाएंगे जो उन्होंने बहाया है.

# प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिल्कुल ही दोनों देश आतंकवादी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए साथ काम करेंगे. हम दोनों इस बात को मानते हैं कि कोई भी इरादा, कोई भी वजह आतंकवाद को सही नहीं साबित कर सकते.

एर्डोगन 2

# ये तो ठीक है. पर इंडिया आते ही एर्डोगन ने बम गिरा दिया था. कहा था कि कश्मीर के मुद्दे पर इंडिया और पाकिस्तान को मल्टीलेटरल डायलॉग शुरू करना चाहिए यानी कई देशों के साथ मिलकर बात करनी चाहिए. एर्डोगन ये भूल गए कि इंडिया के लिए कश्मीर देश का हिस्सा है, इस पर कोई बात नहीं हो सकती. इंडिया ने शुरू से ही किसी भी और देश को इस मुद्दे में लाने से मना ही किया है.

पर एर्डोगन भारत आतंकवाद पर ही बात करने के लिए नहीं आए हैं. उनकी विजिट बिजनेस पर फोकस्ड है. उनके साथ 150 बिजनेसमेन घूम रहे हैं. इसके अलावा वो भारत के न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में एंट्री पर भी बात करेंगे. इंडिया की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी उनको डॉक्टोरेट की उपाधि देगी.

एर्डोगन 1

एर्डोगन कश्मीर पर स्टेटमेंट देने लायक काम नहीं करते हैं

एर्डोगन की बातें पूरी तरह से क्लियर नहीं हैं. ऐसा नहीं है कि कश्मीर का मुद्दा उनकी नॉलेज से बाहर की चीज है. क्या वो इसी तरह से चीन के बारे में बोल सकते हैं? इंडिया में मानवाधिकारों की बात करने से पहले एर्डोगन को अपने काम याद कर लेने चाहिए.

2016 में एर्डोगन के खिलाफ सेना ने विद्रोह कर दिया था. पर जनता ने एर्डोगन का ही साथ दिया. क्योंकि वहां की जनता किसी भी तरीके से सैनिक शासन नहीं चाहती थी. इसका हश्र बाकी देशों में देखा जा चुका है. विद्रोही सैनिक हारे और जनता ने उनको पकड़ लिया. बाद में एर्डोगन ने उनकी बहुत बुरी हालत की. सैनिकों को भूखा-प्यासा रखा गया. कथित तौर पर उनके साथ रेप भी हुआ. हर तरीके का टॉर्चर किया गया.

इसके बाद एर्डोगन ने धीरे-धीरे अपनी ताकत बढ़ानी शुरू की. 16 अप्रैल 2017 को टर्की में एक रेफरेंडम का नतीजा आया जिसके मुताबिक एर्डोगन की ताकत पहले से बढ़ गई है. अब वो धीरे-धीरे रूस के प्रेसिडेंट पुतिन की तरह हो रहे हैं. इसके बाद अप्रैल के अंत में एर्डोगन ने हजारों सरकारी नौकरियों वाले लोगों को नौकरी से निकाल दिया. इससे पहले पिछले एक साल में हजारों सैनिकों, जजों, मानवाधिकार एक्टिविस्ट, टीचर और प्रोफेसरों को जेल में डाला गया है.

टर्की के सैनिकों की दुर्दशा
टर्की के सैनिकों की दुर्दशा

तख्तापलट का षड़यंत्र रचने का भी आरोप है इनपर

टर्की की मीडिया पर सबसे ज्यादा कड़ाई हुई है. 120 पत्रकारों को जेल में डाल दिया गया है. उन पर आतंकवाद का चार्ज लगाया गया है. एर्डोगन ने धीरे-धीरे अपने खिलाफ हो रहे हर विरोध को कुचल दिया है.

अब इसके साथ एक और बात है. एर्डोगन के आलोचकों का कहना है कि उन्होंने सैनिक तख्तापलट की कार्रवाई खुद ही करवाई थी. अमेरिका में रहने वाले मौलवी फेतुल्ला गलेन ने एर्डोगन पर सबसे ज्यादा आरोप लगाए हैं. जवाब में एर्डोगन ने उनको देश का दुश्मन करार दे दिया है.

गलेन
गलेन

गलेन ने कहा कि टर्की में चार बार सैनिक विद्रोह हो चुका है. चारों बार ये सफल रहा है. पर इस बार क्यों नहीं ऐसा हुआ. क्योंकि इस विद्रोह में बेसिक गलतियां थीं. लगा ही नहीं कि वो विद्रोह कर रहे थे. एर्डोगन को किसी भी तरीके से घेरा नहीं गया. सैनिक विद्रोह अच्छी चीज नहीं है, लेकिन इस चीज का इस्तेमाल कर तानाशाही लाना उससे बुरी बात है. सच हो या झूठ हो, एर्डोगन को इसके बाद अपनी राजनीति मजबूत करने का मौका मिल गया है.

इकॉनमिक समस्या से जूझ रहे टर्की को एर्डोगन ने कई सपने दिखाए हैं

हिटलर और एर्डोगन की खूब तुलना की जाती है (तस्वीर इमेजफ्लिप से)
हिटलर और एर्डोगन की खूब तुलना की जाती है (तस्वीर इमेजफ्लिप से)

2013 में टर्की इकॉनमिक समस्या से जूझ रहा था. 30 लाख के आस-पास सीरिया के रिफ्यूजी भी टर्की में आ गए थे. एर्डोगन ने सैनिकों की तख्तापलट की कोशिश से इस समस्या को पीछे धकेल दिया है. देशभक्ति आ गई है लोगों में. पर एर्डोगन का प्लान बहुत बड़ा है. मुस्तफा कमाल अतातुर्क ने टर्की को सेक्युलर देश बनाया था. एर्डोगन के शासन काल में ये स्थिति बदल रही है. देश में तेजी से इस्लामाइजेशन हो रहा है.

एर्डोगन पर यूरोप प्रेशर नहीं बना पाता. इसकी वजह है टर्की का सेक्युलर होना. टर्की के सरकारी ऑफिस में औरतों का बुर्का पहनकर आना मना है. हालांकि इस्लामी कट्टरपंथियों की निगाह में ये खटकता बहुत है, पर वो कुछ कर नहीं पाते. तो यूरोप कोई चांस नहीं लेना चाहता. साथ ही, वो लोग टर्की को यूरोपियन यूनियन में लाना चाहते हैं, ताकि इन पर रूस और मिडिल ईस्ट का प्रभाव कम हो सकते. अभी दुनिया की स्थिति ऐसी है कि यूरोप टर्की को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता.

एर्डोगन नये विचार, नये विकास का वादा कर सत्ता में आए थे. पर इन पर शुरू से ये आरोप लगता है कि सीक्रेटली वो टर्की को इस्लामिक देश बनाने की इच्छा पाले हुए हैं. इनकी पार्टी भी हार्डलाइन इस्लाम को माननेवाली है. पर इन्होंने कभी भी खुल के नहीं कहा है. बल्कि सत्ता में आने के बाद ये ज्यादा मॉडरेट होने का दिखावा करते रहे. तो इस बात पर यूरोप खुश होता रहा कि टर्की मिडिल ईस्ट के देशों के लिए आदर्श बना रहेगा.

एर्डोगन की व्यक्तिगत जिंदगी ही राजनीति का पर्याय है

एर्डोगन की तस्वीरें, kourdistoportocali.com से
एर्डोगन की तस्वीरें, kourdistoportocali.com से

1954 में एर्डोगन का जन्म हुआ था. इनके पापा कोस्टगार्ड में थे. पहले ये लोग रिजे शहर में रहते थे. बाद में टर्की की राजधानी इस्तांबुल आ गए. पैसे की दिक्कत थी तो एर्डोगन नींबू पानी बेचा करते थे. इन्होंने इस्लामी और वेस्टर्न दोनों पढ़ाई की. यूनिवर्सिटी में ही इनकी मुलाकात एरबाकन से हुई, जो बाद में टर्की के पहले इस्लामी विचारधारा के पीएम बने.

1980 में टर्की में मिलिट्री ने विद्रोह किया था. बीबीसी के मुताबिक उस वक्त एर्डोगन के मिलिट्री से रिटायर बॉस ने कहा कि मूंछें छिलवा लो, एर्डोगन ने मना किया और रिजाइन कर दिया. इसके बाद धीरे-धीरे राजनीति में आने लगे. 1994 में इस्तांबुल के मेयर बन गए. उस वक्त इन्होंने खूब काम किया था. इस्तांबुल को साफ-सुथरा करवाया, खूब चकचक शहर बना दिया. शराब भी बैन करवाई. पर शराब बैन काम तो करता नहीं है. कागज में बैन रहा, शराब मिलती रही. एर्डोगन की प्रोफाइल इस बात से भी मजबूत हुई कि वो घूस नहीं लेते थे, किसी भी तरह का करप्शन नहीं करते थे. इस्लाम के बेसिक फॉलो करने की वजह से वो खुद को बहुत डिसिप्लिन में रखते थे.

1998 में टर्की में कम्युनल घटनाएं खूब हुई थीं. उस वक्त एर्डोगन को गिरफ्तार कर लिया गया था. 10 महीने की सजा हुई थी. पर चार महीने में ही वो छूट गए. बीबीसी के मुताबिक कम्युनल घटनाओं के वक्त एर्डोगन ने कहा था: मस्जिदें हमारी बैरक हैं. गुंबद हेल्मेट हैं. मीनारें संगीन हैं और इस्लाम को माननेवाले सैनिक हैं.

2002 से एर्डोगन की इस्लाम की तरफ झुकाव रखने वाली जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी ने टर्की में बवाल मचा रखा है. लगभग तब से ही एर्डोगन टर्की की राजनीति में छाए हुए हैं. एर्डोगन अपनी कड़ी फॉरेन पॉलिसी के लिए जाने जाते हैं. इन्होंने टर्की को यूरोप, अमेरिका और रूस सबसे उलझा के रखा है.

ये भी पढ़ें:

रोग नेशन: पाकिस्तान की वो कहानी, जो पूरी सुनाई नहीं जाती

वो जबराट नेता, जिसकी खोपड़ी भिन्नाट हो तो चार-छह आतंकी खुद ही निपटा दे

रोग नेशन: अमेरिका से धक्का-मुक्की कर रूस कराएगा तीसरा विश्व-युद्ध

 क्या सच में इजराइल पूरी दुनिया से इस्लाम को मिटाना चाहता है?

रोग नेशन: इस देश की बर्बादी देखने टूरिस्ट आते हैं

रोग नेशन: इस्लाम के खलीफा का देश, जहां अब नाश्ते में बम मिलता है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

इसरो चेयरमैन को गले लगाकर मोदी क्या फुसफुसाए? पता चल गया

क्या चंद्रयान - 3 मिशन भी आने वाला है?

नासा ने बताया कि इसरो के चंद्रयान से कनेक्शन कहां फंसा हुआ है?

चंद्रयान को बस ये एक काम करना है.

इसरो के चंद्रयान को लेकर नासा ने ये बड़ी खबर दे दी है

चंद्रयान से सम्पर्क कैसे होगा?

राजस्थान में गैंगस्टर को साथियों ने जैसे छुड़ाया, वैसा तो बस साउथ की फिल्मों में होता है

पुलिस को नहीं पता था कि किसे पकड़ा है. जब गैंग ने हमला किया, तब कुछ पुलिसवाले सो रहे थे. कुछ नहा रहे थे.

नयी सरकार में निवेशकों के 12.5 लाख करोड़ रुपए डूब गए

ये नुकसान किस खाते में जाएगा?

पड़ताल : क्या जवाहरलाल नेहरू ने इसरो की स्थापना नहीं की?

चंद्रयान की यात्रा के बाद ये दावे सामने आने लगे हैं.

पता चल गया, कहां है अपना विक्रम लैंडर?

चंद्रयान 2 के ऑर्बिटर ने भेजी फोटो, संपर्क करने की कोशिश जारी

चंद्रयान 2 : ISRO चीफ के. सिवन ने बताया कि लैंडर 'विक्रम' के साथ क्या हादसा हुआ?

विक्रम का ISRO से संपर्क टूटने के बाद पहली बार बोले हैं के. सिवन.

चंद्रयान-2 मून पर लैंड करने वाला है, पूरा कार्यक्रम यहां देखें LIVE

कमर कस लीजिए.

यूपी के उर्स में हिंदुओं ने खाकर 43 मुस्लिमों पर केस किया, कहा - भैंसे की बिरयानी खिला दी

केस किया भी तो दो दिन बाद.