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प्रियंका चोपड़ा पाक एक्टर्स के पक्ष में, पर उन्हें गद्दार बोला तो देशभक्ति छिन जाएगी!

जब कारगिल युद्ध चला तो सड़कों के किनारे से साइकिल पर गुजरने वाले सेना के छोटे ओहदेदार सैनिक को भी लोग सैल्यूट करते थे. देशप्रेम, जंग के बादल सीने में हर वक्त भीगे रहते थे. लेकिन जैसे ही युद्ध खत्म हुआ और चैनलों ने तिरंगा दिखाना बंद किया तो सड़क किनारे साइकिल से गुजरने वाले उसी सैनिक को सैल्यूट करना या स्माइल देना तो दूर, भीतरी सम्मान देना भी हमने बंद कर दिया. हमारे दिमागों में दूसरे किस्म के मनोरंजन और निजी चीजों ने जगह ले ली. फिर हमने सैनिकों को दिव्य मानना छोड़ दिया, औसत बना दिया. सालों-साल सैनिकों के बारे में एक सम्मान का शब्द सुनने को नहीं मिला. शांतिकाल में हमने जितना अपने सैनिकों को हाशिए पर रखा, किसी ने नहीं रखा. वन रैंक वन पेंशन के मसले पर शांति से प्रदर्शन कर रहे देश की इन धरोहरों को हमारी सरकारों ने अपमानित किया और उन पर पुलिस छोड़ दी.

लेकिन जैसे ही चैनल वाले फिर से युद्ध / सर्जिकल स्ट्राइक वाला एंटरटेनमेंट हमें चौबीसों घंटे, सातों दिन देने लगे, हम फिर से उसी झूठे-सेनाप्रेम में डूब गए. अब जब तक युद्ध की आहट है और जब तक हमलों वाला मनोरंजन मिलता रहेगा हम शहीद, शहादत, वीरता, सेना, गौरव जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मजे लेते रहेंगे. लेकिन जैसे ही ये युद्ध भी खत्म होगा, अपने-अपने परिवारों के साथ फूड आउटलेट्स, मॉल्स और मल्टीप्लेक्स की ओर निकल चलेंगे. पीछे वो परिवार रह जाएंगे जिन्होंने अपने बेटे, पति, पिता युद्ध में खो दिए. उन सैनिकों के बूढ़े मां-बाप और पत्नियां पूरी जिंदगी रो-रो कर घड़ियां काटेंगे. तब इन तथाकथित देशभक्तों में से कोई उनकी चौखट पर नहीं दिखेगा. और जब शहीदों की पत्नियां अपने पतियों को अलॉट हुए पेट्रोल पंप पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही होंगी तब यही झूठी सरकारें घृणित लकड़बग्घों वाला आचरण कर रही होंगी.

लेकिन आपका सेना का प्रेम कितना शाश्वत या कितना झूठा है इसकी पहचान अभी हो जाएगी. उड़ी और उससे पहले भी शहीद हुए सैनिकों की बेटियों के ख़तों और वीडियो मैसेज का इस्तेमाल उन लोगों का मुंह बंद करने के लिए किया जाता रहा है जो शांति का समर्थन करते हैं या राजनैतिक मसलों का हल बातचीत से निकालने की अपील करते हैं. ‘आतंकियों’ ने कुछ किया तो हमारे यहां उग्र राजनैतिक दलों और कथित राष्ट्रवादी लोगों ने पाकिस्तानी एक्टर्स के लिए माहौल हिंसक बना दिया. इसका विरोध करने वाला हर आदमी एंटी-नेशनल और गद्दार बताया जाने लगा.

एक्टरप्रियंका चोपड़ा ने भी अब पाकिस्तानी एक्टर्स को बैन करने को गलत बताया है. लेकिन कोई भी उनका कुछ भी बुरा-भला न कर सकेगा. उन्हें गद्दार कहने पर आए तो कहने वाले लोगों की देशभक्ति ही ख़तरे में पड़ जाएगी. क्यों?

क्योंकि प्रियंका चोपड़ा एक सैनिक की बेटी हैं. अब आप गाली देकर बताएं उन्हें. उनके माता-पिता दोनों इंडियन आर्मी में रहे हैं. आप एक आर्मी वाले की बेटी को गद्दार और एंटी-नेशनल कहेंगे तो उड़ी में शहीद हुए हर परिवार की बेटी को भी कल कुछ भी कह देंगे. आप किसी भी सूरत में किसी सैनिक के परिवार का अपमान नहीं कर सकते!

प्रियंका के पिता डॉ. अशोक चोपड़ा.
प्रियंका के पिता डॉ. अशोक चोपड़ा.

एक चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रियंका चोपड़ा ने कहा है, “आर्टिस्ट लोग और एक्टर्स हमेशा, देश में हो रहे हर बड़े पोलिटिकल एजेंडे के लिए जिम्मेदार ठहराए जाते हैं. सिर्फ हमीं क्यों? बिजनेस करने वाले क्यों नहीं? डॉक्टर्स क्यों नहीं? राजनेता क्यों नहीं? सिर्फ फिल्म उद्योग के आम लोग ही क्यों?” उनकी बात पूरी तरह सही है. उन्होंने ये भी कहा:

मैं बहुत ज्यादा देशभक्त हूं. जो भी मेरी सरकार तय करेगी वो देश को सेफ रखने के लिए महत्वपूर्ण है. मैं उसका पालन करूंगी. लेकिन जिन घटनाओं के कारण ये सब हो रहा है उनमें कोई एक्टर शामिल नहीं है. ऐसा कोई एक्टर नहीं जिसने किसी का नुकसान किया हो. किसी का बुरा किया हो.

ये बहुत महीन रेखा है. लेकिन टांगने के लिए जिस भी एक व्यक्ति को चुना जाता है वो आर्टिस्ट ही होता है. या फिल्मी दुनिया का आम इंसान होता है. बात चाहे कुछ भी हो. और ये मेरे हिसाब से अन्याय है.

मैं उड़ी की घटना से दुखी हूं. हमें अपने देश की सुरक्षा के लिए खड़े होने की जरूरत है. हम कई सदियों तक बहुत ज्यादा शांत मुल्क रहे हैं. हम कभी भी उन लोगों में से नहीं रहे जो बाहर जाते थे और युद्ध शुरू करते थे. हम गांधी के देश से हैं. हम अहिंसा की बात करने वाले हैं. तो हमें अपनी सुरक्षा करनी ही चाहिए.

देश में बहुत सारी पहचान वाले लोग हैं. इतनी ज्यादा अलग-अलग सोच, विचारधाराएं हैं. इतने धर्म हैं. इतने अलग-अलग तरीके से लोगों की परवरिश होती है. ऐसे में मुल्क का प्रशासन करना मुश्किल होता है. लेकिन फिर भी हम लोग बहुत अच्छे से मैनेज कर लेते हैं.

कलाकारों को राजनीति से बाहर रखने की बात बहुत से समझदार लोगों ने मौजूदा माहौल में की लेकिन उन्हें गालियां दी गईं. अब इंडियन आर्मी में रहे अशोक और मधु चोपड़ा की बेटी प्रियंका ने भी यही बात कही है:

एक कलाकार का धर्म उसके काम के सिवा कुछ भी नहीं होता है. आप किसी कलाकार (फवाद खान/पाक एक्टर्स) को उसके धर्म या राष्ट्रीयता के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते.

इंटरव्यू के दौरान प्रियंका से पूछा गया कि उड़ी में मारे गए सैनिकों के परिवार वालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि करण जौहर की फिल्म में किसने एक्टिंग की है और किसने नहीं की है? फिर लोग उन परिवारों के नाम का इस्तेमाल करके अपने विचार फैला रहे हैं. प्रियंका ने कहा:

हां, न ही उन परिवारों को इससे कोई फर्क पड़ता है कि देश में कौन आ रहा है और अपनी फिल्म की शूटिंग करके या कॉन्सर्ट करके चला जा रहा है. वो सिर्फ अपने परिवार के लोगों और सैनिकों की सुरक्षा की चिंता में हैं. वही हमारा फोकस होना चाहिए. हम लोग हमेशा अपने फोकस खो देते हैं और दूसरी बात करने लगते हैं. क्योंकि उस बात में शोर ज्यादा होता है. क्योंकि लोग उसके बारे में बात करते हैं और मीडिया उसे दिखाता है. प्रेस उसके बारे में लिखती है. जबकि ये केंद्रीय मुद्दा क़तई नहीं है. ये सिर्फ एंटरटेनमेंट हैं. लोग टिकट लेते हैं. तीन घंटे फिल्म देखते हैं और घर लौट आते हैं.

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