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प्रेगनेंट औरत 20 किलोमीटर पैदल चलकर डॉक्टर के पास पहुंची, लेकिन घर ज़िंदा न आ सकी

आंध्र प्रदेश के विज़ाग से एक खबर आई है. यहां 28 साल की एक प्रेगनेंट औरत ने इसलिए दम तोड़ दिया क्योंकि उसे 20 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.

लक्ष्मी नाम की ये महिला अपने गांव जामदांगी से गई थी. डॉक्टर को दिखाने. मदुगुला मंडल  के रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिश्नर के पास. ये जगह उसके गांव से 20 किलोमीटर दूर है. वहां तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं बनी हुई. इस वजह से वहां यातायात के साधन नहीं हैं, ऐसा खबरें बताती हैं. इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ औरत डॉक्टर को दिखा कर लौट रही थी. तभी रास्ते में उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई. बाकी के रास्ते महिला को फिर बल्लियों पर कपड़ा बांध उसमें टांग कर लाया गया. लेकिन तब तक खून बहुत बह चुका था. वो औरत और उसका बच्चा, दोनों ही बच नहीं सके.

ये पहला मामला नहीं है जहां इस तरह की परेशानी से गुज़रना पड़ा है लोगों को.

इसी साल जुलाई में खबर आई. आंध्र प्रदेश से ही. कोठवालसा नाम के गांव में रहने वाली जनपारेड्डी देवी के पास एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाई. क्योंकि बारिश की वजह से कच्चा रास्ता बर्बाद हो गया था. फिर जनपारेड्डी को भी बल्ल्लियों पर कपड़ा बांध कर उसमें टांग कर हॉस्पिटल ले जाया गया.

तस्वीर साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस
तस्वीर साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

मदुगुला मंडल में ही ये गांव भी आता था. वहां के कई छोटे-छोटे गांवों में कनेक्टिविटी नहीं है. ऐसा वहां के लोकल लोगों ने मीडिया को बताया. इसको लेकर पदेरू शहर की विधायक के. भाग्यलक्ष्मी ने कहा था कि इन पर काम किया जाएगा ताकि आगे इस तरह की दिक्कतें न हों. लेकिन फिर भी लक्ष्मी और जनपारेड्डी जैसे मामले सामने आते रहते हैं.

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के अनुसार इस आदिवासी इलाके के पदेरू शहर में जो डेटा है, उसके हिसाब से वहां की नई मांओं की मृत्यु दर काफी ज्यादा है. जहां पूरे देश में प्रति एक लाख जन्म देने वाली महिलाओं में से 130 की मौत होती है, वहीं पदेरू में ये संख्या 204 को पहुंच जाती है.  इसको लेकर अभी भी कोई ख़ास कदम उठाया गया हो, इसकी खबर नहीं है.


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