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इंटर-कास्ट शादी करने पर अपनी प्रेग्नेंट लड़की को ही ज़िंदा जला दिया

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2016 में एक मराठी फ़िल्म आई थी सैराट. फ़िल्म में प्यार था. जो हम सबको होता है. फ़िल्म में लड़के का नाम पर्श्या और लड़की का नाम है आर्ची. आर्ची समाज के हिसाब से ऊंची जात से है. घरवाले पर्श्या से आर्ची की शादी को तैयार नहीं थे. लड़की फिर भी शादी कर ही लेती है. हममें से ही कुछ लोग अपने प्यार के साथ पूरी ज़िंदगी रहने का फैसला कर ही लेते हैं.

चर्चित फ़िल्म 'सैराट' का एक सीन: जब दोनों ने साथ रहने का फ़ैसला किया
चर्चित फ़िल्म ‘सैराट’ का एक सीन: जब दोनों ने साथ रहने का फ़ैसला किया

अब आगे फ़िल्म की कहानी नहीं. बात हमारे आपके बीच की इसी दुनिया की सुनिए. जिसने फ़िल्म देखी है उसे लगेगा सैराट ही देख रहा है.

# हुआ क्या?

पुणे की रुक्मिणी और मंगेश भी साथ रहना चाहते थे. पूरी उम्र. एक दूसरे के सामने बूढ़े होना चाहते थे. प्यार किया और शादी कर ली. पिछले साल दोनों ने साथ-साथ अपनी पहली दिवाली मनाई. रुक्मिणी के घरवाले इस शादी के क़तई ख़िलाफ़ थे. लेकिन प्यार में एक अलग ही ताक़त होती है. रुक्मिणी ने मंगेश से पिछले साल शादी कर ही ली. मंगेश पेशे से मकान मिस्त्री हैं. और अपने दो भाइयों के साथ एक कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करते हैं.

मंगेश और रुक्मिणी: जब इन्होने शादी कर के साथ रहने का फैसला किया
मंगेश और रुक्मिणी: जब इन्होने शादी कर के साथ रहने का फैसला किया

इसी मई महीने की पहली तारीख को अहमदनगर ज़िले में रुक्मिणी और मंगेश ज़िंदा जला दिए गए. मंगेश का आधा और रुक्मिणी का तीन चौथाई शरीर जल गया. दोनों को अस्पताल लाया गया. रुक्मिणी नहीं बच सकीं. मंगेश अभी ज़िंदा हैं. जब दोनों जल रहे होंगे तो ज़रूर रुक्मिणी ने भगवान से प्रार्थना की होगी कि उसका मंगेश बच जाए. मंगेश का इलाज उसी अस्पताल में चल रहा है.

# रुक्मिणी के परिवार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ:

ऐसा इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर बताती है. लेकिन मैं मानता हूं कि जिनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है वो रुक्मिणी का परिवार नहीं था. हो ही नहीं सकता. रुक्मिणी का परिवार तो आधा जला हुआ शरीर लेकर अस्पताल में मौत से दो-दो हाथ कर रहा है.

फिर भी, अस्पताल में आख़िरी सांस लेने से पहले रुक्मिणी ने जो बताया उसके अनुसार रुक्मिणी के पिता और चाचा ने ये शर्मनाक काम किया है. दो चाचाओं को पुलिस गिरफ़्तार कर चुकी है. पिता फरार है.

केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफ़िसर ने क्या कहा?

मामले की जांच कर रहे सब-इंस्पेक्टर विजय कुमार बोथरे ने बताया

मंगेश ‘लोहार’ जाति से आता है और रुक्मिणी ‘पासी’ जाति से. जब दोनों ने शादी करने की ठानी तो रुक्मिणी के घरवालों ने ज़बरदस्त विरोध किया. वो किसी कीमत पर ये शादी नहीं होनी देना चाहते थे. जब शादी हुई तो मंगेश के घरवाले मौजूद थे, जबकि रुक्मिणी की तरफ़ से उनकी मां आई थीं. 

# घटना के दिन क्या हुआ?

30 अप्रैल को मंगेश के साथ रुक्मिणी अपने माता पिता के घर गई थीं. जब मंगेश रुक्मिणी को लेकर वापस आने लगे तो रुक्मिणी के पिता और चाचा ने रुक्मिणी को मंगेश के साथ भेजने से मना कर दिया. मंगेश और रुक्मिणी के घरवालों के बीच बहस हुई और फिर वही हुआ जो नहीं होना चाहिए था. एक कमरे में रुक्मिणी और मंगेश को बंद करके पेट्रोल डाला गया और ज़िंदा जला दिया गया.  पड़ोसियों ने चीख सुनी तो दोनों को अस्पताल पहुंचाया.

# रुक्मिणी के साथ एक और ज़िंदगी गई:

वैसे तो ये ख़बर लिखते पढ़ते ही सबकी उम्मीद का कोई न कोई हिस्सा मर जाता है. लेकिन रुक्मिणी के साथ एक जान और गई है. रुक्मिणी प्रेग्नेंट थीं. इस दुनिया को भुगतने से पहले ही उनका बच्चा मारा गया.

वैसे अभी चुनाव चल रहे हैं. हर कोई मन मुताबिक़ सरकार चाहता है.चौराहों पर बातों का सिर फुटौव्वल हो रहा है. लेकिन क्या हम वाक़ई एक ‘अच्छी सरकार’ के लायक हैं भी? सोचिए.

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