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प्रीती-महेश के बाद अब चंद्रा 'जी', राज्यसभा चुनाव में बीजेपी का निर्दलीय दांव

बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के राज्यसभा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय है. पर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और झारखंड में घमासान मच गया है. तीनों राज्यों में बीजेपी ने अपने कैंडिडेट उतारे थे. उनकी जीत पक्की होने के बाद भी बीजेपी के कुछ वोट बच रहे थे. हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने अपने समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार उतार दिए. तीनों ही उम्मीदवार व्यवसाय से ताल्लुक रखते हैं.

हरियाणा में ‘जी न्यूज़’ के मालिक सुभाष चंद्रा, यूपी में गुजराती व्यापारी हरी महापात्रा की पत्नी प्रीति महापात्रा और झारखंड में पार्टी के कोषाध्यक्ष और व्यवसायी महेश पोद्दार को. अब जीत के लिए जरूरी वोटों के खरीद-फरोख्त होने की संभावना है. तो बाकी पार्टियों के उम्मीदवार अब निर्विरोध नहीं जीत पाएंगे. वोटिंग होगी. अब कांग्रेस के कपिल सिब्बल को यूपी में दिक्कत हो सकती है. वहीं हरियाणा में कांग्रेस का कोई कैंडिडेट नहीं है. पर पूर्व कांग्रेसी सांसद और वकील आर के आनंद इंडियन नेशनल लोक दल के दम पर परचा भर रहे हैं.

हरियाणा में बहुत दिन से मौका तलाश रहे सुभाष चन्द्र ने आखिरकार परचा भर ही दिया. 2014 में लोकसभा और फिर विधानसभा की सीट के लिए उन्होंने जुगत भिड़ाई थी पर सफल नहीं हुए थे. बीजेपी के पास उनको जिताने के लिए पर्याप्त वोट नहीं हैं पर चंद्रा कहते हैं कि बाकि दलों में भी उनकी इज्जत है.

कौन है ये आदमी?

सुभाष चंद्रा जी टीवी ग्रुप के चेयरमैन हैं. बीजेपी के करीबी हैं. उनकी आत्मकथा ‘The Z factor: My journey as the wrong man at the right time’ का विमोचन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. सरकार के मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया में चंद्रा दिलचस्पी दिखाते रहे हैं. टीवी पर ये सफलता के सूत्र भी बताते हैं. निर्दलीय प्रत्याशी हैं और सबसे जुगाड़ लगा रहे हैं.

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बवाल किस बात का?

हरियाणा में मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल के अभय चौटाला ने आर के आनंद का समर्थन करने की बात कही है. जबकि बीजेपी का समर्थन चंद्रा को है. चंद्रा के इंडियन नेशनल लोक दल से भी अच्छे रिश्ते हैं. पहले झारखण्ड से सांसद रहे आनंद को कांग्रेस ने नहीं उतारा और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में इंडियन नेशनल लोक दल से समर्थन पाने पर कांग्रेस नाराज है.

सेवा भावना

सुभाष चंद्रा व्यवसायी हैं, मीडिया में हैं और अब राजनीति में आधिकारिक रूप से आ रहे हैं. वो तो कहेंगे कि इस तरह उन्हें सेवा का ज्यादा मौका मिलेगा. पर लोकतंत्र के लिए ये फैसला चुनौती भरा है. एक ही इंसान हर चीज मैनेज करेगा तो फिर आलोचना की गुंजाइश ही नहीं रहेगी.

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा के उम्मीदवार तसल्ली से बैठे थे. क्योंकि सबका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय था. तभी एक औरत गुजरात से आई और प्रदेश की पॉलिटिक्स में हड़कंप मच गया.

कौन है ये औरत?

नाम है प्रीति महापात्रा. उनके पति हरी महापात्रा गुजरात के अरबपति व्यापारी हैं और हर पार्टी में उनकी पहुंच हैं. कौन रोक सकता है अब भला! कोई नहीं बोलेगा.

प्रीति महापात्रा ने उत्तर प्रदेश से निर्दलीय राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर नॉमिनेशन किया है. कहा जा रहा है कि बीजेपी ने इनको उतारा है. अगर घोषणा करके अपने कैंडिडेट के रूप में उतारा जाता तो बवाल हो जाता कि आखिर गुजरात से यूपी में क्यों लाया गया.

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हड़कंप किस तरह का?

सारे सदस्यों के चुने जाने के बाद बीजेपी के कुछ वोट बचे रहेंगे. बाकी वोटों के लिए खरीद-फरोख्त होगी, ऐसी आशंका जताई जा रही है. सारे धुरंधर इस नेक काम के लिए यूपी में पधार चुके हैं. अब दूसरी पार्टियों के उम्मीदवार सकते में हैं. क्योंकि निर्विरोध चुने जाने की जगह अब वोटिंग होगी. पैसे का खेल होगा और अनायास ही लोग हार जाएंगे. सबसे बड़ी दिक्कत कपिल सिब्बल को होने वाली है. चांदनी चौक से लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं और अगर यहां राज्यसभा का भी हार जाते हैं तो बड़ी किरकिरी होगी.

समाजवादी पार्टी से निकाले गए विधायक रामपाल सिंह प्रीति के समर्थन में इधर-उधर घूम रहे हैं. सेवा की भावना है. विधायक जी कर रहे हैं श्रद्धा से.

सेवा भावना

हालांकि प्रीति कहती हैं कि उनका संगठन कृष्णलीला फाउंडेशन ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा में काम कर चुका है और अब वो यूपी में काम करना चाहती हैं. हरी महापात्रा की पहुंच इतनी है कि देश के किसी भी राज्य में स्वच्छ भारत अभियान चला सकते हैं कभी भी. देखते हैं यूपी कितना स्वच्छ होता है. फिलहाल तो दिलचस्प स्थिति बनी हुई है.

 

रांची में नकवी की जीत पक्की होने के बाद बीजेपी ने लम्बे समय तक पार्टी की राज्य कोषाध्यक्ष के रूप में सेवा करने वाले व्यवसायी महेश पोद्दार को उतार दिया.

कौन है ये आदमी ?

बीजेपी की पार्टी में संगठन स्तर पर काम करनेवालों में महेश पोद्दार का नाम ऊपर है. वो कई सालों से पार्टी के राज्य ईकाई के कोषाध्यक्ष हैं. उनका अपना बड़ा बिज़नेस है. पार्टी ने उनको मौका दिया है.

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दिक्कत किसको?

नकवी की जीत पक्की है और बचे वोटों से बीजेपी महेश पोद्दार के लिए दांव खेलेगी. इस से शिबू सोरेन के छोटे बेटे वसंत सोरेन की उम्मीदवारी पर ग्रहण लग गया है. आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चलेगा. विधायक बहलाए-फुसलाये जायेंगे.

सेवा भावना

पार्टी की बहुत दिन से सेवा कर रहे हैं. इस बार जनता की डायरेक्ट सेवा करने का मौका मिल सकता है. बेहतर यही रहेगा कि ईमानदारी से लड़ें. पर हमारा कहा कोई मानता कहां है?

 

 

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