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पावर बैंक ऐप, जिसने 15 दिन में पैसे डबल करने का झांसा दे 4 महीने में 250 करोड़ उड़ा लिए

उत्तराखंड की पुलिस ने एक नए ऑनलाइन स्कैम का भंडाफोड़ किया है. माना जा रहा है कि इसके जरिए 4 महीने के भीतर ही फ्रॉडियों ने 250 करोड़ रुपए से ज्यादा उड़ा लिए. इसमें एक ऐप के जरिए महज 15 दिनों में लोगों को पैसे दुगने करने का लालच दिया गया. करोड़ों रुपए जमा हो गए तो ऐप बंद हो गया. पुलिस का दावा है कि इस रकम को शेल यानी दिखावटी कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेज दिया गया है. पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को नोएडा से गिरफ्तार किया है. उसे एक कंपनी का डायरेक्टर बताया जा रहा है. आइए बताते हैं पूरा मामला.

‘पावर बैंक’ ऐप से हुआ बड़ा घोटाला

गूगल के प्ले स्टोर पर 12 मई 2021 तक एक ऐप काफी चर्चा में था. नाम था ‘पावर बैंक’. ऐप पर 15 दिन में पैसे दुगने करने का ऑफर देख लोग बहकावे में आ गए. जमकर पैसा लगा दिया. किसी ने 500 रुपए तो किसी ने लाखों रुपए लगा दिए. कुछ लोगों को कंपनी ने शुरुआत में पैसा डबल करके दिया भी, लेकिन मोटी रकम जमा होने के बाद ये ऐप पैसों समेत चंपत हो गया.

उत्तराखंड पुलिस के मुख्य प्रवक्ता एडीजी अभिनव कुमार ने इस बारे में आजतक को बताया,

कुछ दिन पहले हरिद्वार के श्यामपुर निवासी रोहित कुमार और कनखल निवासी राहुल गोयल ने STF को साइबर ठगी की शिकायत दी थी. देहरादून साइबर क्राइम थाने में दी गई रिपोर्ट में बताया था कि उनके दोस्तों ने उन्हें प्ले स्टोर पर उपलब्ध पावर बैंक ऐप को बारे में बताया था. कहा था कि इस पर 15 दिन में रकम दोगुनी करवाते हैं.इसके बाद उन्होंने भी ऐप डाउनलोड कर लिया. पहली बार में 91,200 रुपये और दूसरी बार 73,000 रुपये जमा करा दिए. लेकिन कुछ ही रोज बाद उन्हें ये ऐप प्ले स्टोर से गायब मिला, तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ.

इस बीच, टिहरी जिले में भी ऐसा ही एक मामला दर्ज किया गया. पावर बैंक नाम के ऐप का नाम लेकर ठगी की हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं. इसके बाद जांच शुरू की गई. 15 दिन की जांच में हमें पता चला कि यह स्कैम तो बहुत बड़ा है.

उत्तराखंड पुलिस को अब तक इस मामले में 20 शिकायतें मिल चुकी हैं. इसमें से दो शिकायतें साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में दर्ज कराई गई हैं. एक केस टिहरी में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत दर्ज किया गया है.

सांकेतिक तस्वीर
पावर बैंक ऐप के जरिए लोगों को 15 दिन में पैसे दुगने करने का लालच दिया जाता था. मई में यह ऐप बंद हो गया और तमाम लोगों के पैसे फंस गए. (सांकेतिक तस्वीर)

इस तरह अंजाम दिया गया  घोटाला

उत्तराखंड पुलिस के एसएसपी अजय सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से बताया कि इस घोटाले को कैसे अंजाम दिया गया. आप भी जानिए-

फरवरी महीने में ‘पावर बैंक’ नाम का एक ऐप गूगल प्ले स्टोर पर अपलोड किया गया. इस ऐप को चलाने वालों में चाइनीज़ कंपनियां और कुछ चाइनीज़ नागरिक भी शामिल थे. इन लोगों ने सोशल मीडिया और वॉट्सऐप, टेलिग्राम आदि के जरिए इसका खूब प्रचार किया. देखते ही देखते इसके 50 लाख डाउनलोड हो गए. सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, देशभर से लोगों ने इसमें पैसे लगाने शुरू कर दिए.शुरुआत में कुछ लोगों को पैसे डबल करके भी दिए गए.

कंपनी इन पैसों को कुछ ऐसी शेल कंपनियों में जमा करती थी, जो सिर्फ कागज़ों पर थीं. इन शेल कंपनियों के अकाउंट में पैसा पेटीएम और कई जाने-माने पेमेंट गेटवे सिस्टम के जरिए भेजे जाते थे. इसके बाद इन पैसों को कंपनियों के अकाउंट से क्रिप्टोकरेंसी या कोड आधारित डिजिटल करेंसी में तब्दील किया जाता था. ये इसलिए ताकि किसी अथॉरिटी की उस तक पहुंच न हो. इसके बाद इन पैसों को दूसरे देशों में जमा करा दिया जाता था. एक्सपर्ट्स फिलहाल पैसों के ट्रांसफर की गुत्थी को सुलझाने में लगे हैं. पुलिस की शुरुआती जांच में तकरीबन 250 करोड़ रुपए के हेरफेर की जानकारी मिली है लेकिन यह घोटाला उससे कहीं बड़ा हो सकता है.

चाइनीज़ शेल कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार

जांच पड़ताल के बाद उत्तराखंड की स्पेशल टास्क फोर्ट ने नोएडा सेक्टर 99 से पवन कुमार पांडे नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, यह शख्स उन शेल कंपनियों में से एक का डायरेक्टर है, जिनमें पैसा जमा कराया गया. पुलिस इसे चाइनीज कंपनी बता रही है, जिसके जरिए पैसे विदेश भेजे गए. एसटीएफ ने पवन के पास से 19 लैपटॉप, 5 मोबाइल और 592 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं.

उत्तराखंड पुलिस का दावा है कि इस घोटाले में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं. इनकी धरपकड़ के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की भी मदद मांगी है. फिलहाल पुलिस ने देशभर के लोगों से अपील की है कि उनमें से किसी ने भी पावर बैंक ऐप के जरिए पैसा लगाया है, तो लोकल पुलिस में शिकायत करें.


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