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पीएम मोदी ने फसलों के दाम 200 से 1827 रुपये तक बढ़ा दिए हैं

आर्थिक मंत्रालयों के लिए बनी कैबिनेट कमिटि ने 4 जून को फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी की है. इस कमिटि के मुखिया खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. उन्होंने खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है. इस फैसले से सबसे ज्यादा फायदा उन किसानों को होने वाला है, जो अपनी फसलों को सरकारी दाम पर बेचते हैं. हालांकि ऐसे किसानों की संख्या करीब-करीब 5 फीसदी है, लेकिन इसके बाद भी किसानों को बड़ा फायदा होने वाला है.

धान के किसानों के लिए खुशखबरी बड़ी है. धान पर एक साथ 200 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी बढ़ा दी गई है.

सरकार ने 4 जून को जो फैसला किया है, उसके मुताबिक सबसे ज्यादा फायदा मूंग के किसानों, सूरजमुखी के किसानों और कपास के किसानों को होने वाला है. सरकार के फैसले के मुताबिक 2018-19 की खरीफ की फसलों के लिए सरकार की ओर से धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मेज, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, सोयाबीन, तिल, नाइजर सीड और कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की गई है.

avinash

क्या किसानों को खुश करने की है कवायद?

इस साल के बजट में पीएम मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था.

1 फरवरी 2018 को जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2018-19 के लिए बजट पेश किया था, तो उसमें कहा गया था कि सरकार की कोशिश है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी. इस फैसले के पीछे किसानों को फायदा पहुंचाने की कोशिश के साथ ही वोट बैंक को भी मज़बूत करने की कोशिश है. वजह ये भी है कि पिछले दो साल से देश के किसान अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग मुद्दों पर आंदोलन करते आ रहे हैं. पिछले साल तमिलनाडु के किसानों का लंबे समय तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन हुआ था. सरकार किसी तरह से किसानों को समझाने में कामयाब रही. फिर मध्यप्रदेश के किसान आंदोलन करने लगे. वो आंदोलन इतना उग्र हुआ कि छह किसान पुलिस की गोलियों से मारे गए. अभी वो शांत ही हो रहा था कि महाराष्ट्र में करीब 35 हजार किसान एक साथ मुंबई पहुंच गए. सरकार ने उनको भी मनाया तो एक बार फिर से किसानों ने गांवबंद कर दिया. शुरुआत मध्यप्रदेश से हुई और फिर किसानों ने दूध-सब्जियां सड़कों पर फेंक दी. किसानों के बार-बार के इस गुस्से को सरकार भी समझ रही थी और इसी को शांत करने के लिए सरकार की ओर से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है.

2019 पर वोट लेने और वोट देने वाले दोनों की है नज़र

पिछले दो साल से पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों में किसान आंदोलन कर रहे हैं.

2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं. उससे पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं. 2009 के चुनावी साल में जब मनमोहन सिंह की सरकार ने धान के समर्थन मूल्य में एक साथ 155 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी, तो यूपीए सरकार सत्ता में वापस आ गई थी. वहीं हालिया चुनावों में बीजेपी को किसानों की नाराज़गी का सामना करना पड़ा था. हाल ही में कैराना में हुए उपचुनावों में गन्ना एक बड़ा मुद्दा था और बीजेपी को वहां हार का सामना करना पड़ा था. इससे पहले गुजरात में हुए विधानसभा चुनावों में मूंगफली और कपास की एमएसपी बढ़ा मुद्दा था. बीजेपी वहां जैसे-तैसे जीत हासिल कर पाई. कर्नाटक में भी ग्रामीण इलाकों में बीजेपी को खासा नुकसान उठाना पड़ा था. ऐसे में केंद्र सरकार विपक्ष के आरोपों के साथ ही किसानों की नाराजगी भी झेल रही थी. लेकिन 4 जुलाई के इस फैसले से सरकार किसानों की नाराजगी कम करने की भरपूर कोशिश कर रही है.


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