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जिस बात पर पीएम मोदी भावुक हुए, उसका ज़िक्र भी गुलाम नबी आज़ाद ने किया

आज तो राज्यसभा की बात ही कुछ और थी. मल्टी पार्टी डेमोक्रेसी वाली भारतीय राजनीति का एक अलग ही रूप आज राज्यसभा में दिखा. सांसदों में आपसी निजी रिश्तों का ज़िक्र था, दलगत राजनीति से ऊपर एक दूसरे के लिए तारीफें थी, दुख-दर्द के किस्सों का ज़िक्र था. माहौल कई बार भावुकता के स्तर को पार गया. कुछ ऐसी बातें आई कि कहते कहते थे प्रधानमंत्री का गला भर आया, आंखें नम हो गई. ये सब हुआ राज्यसभा के चार सांसदों की विदाई के मौके पर. ये चारों जम्मू कश्मीर से राज्यसभा के सांसद हैं. कांग्रेस के सांसद गुलाम नबी आज़ाद, पीडीपी के नजीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फैयाज, बीजेपी के शमशेर सिंह मन्हास. पीडीपी सांसद नजीर अहमद लावे और बीजेपी के शमशेर सिंह मन्हास का कार्यकाल 10 फरवरी को पूरा हो रहा है. गुलाम नबी आज़ाद और पीडीपी के मीर मोहम्मद फैयाज का कार्यकाल 15 फरवरी को पूरा हो जाएगा. इन सभी सांसदों को आज ही राज्यसभा में विदाई दी गई. गुलाम नबी आज़ाद लंबे वक्त से संसद सदस्य हैं और सदन में नेता प्रतिपक्ष भी हैं, इसलिए उन का ज़िक्र सबसे ज्यादा हुआ.

विदाई भाषण में क्या हुआ?

विदाई भाषण की शुरुआत प्रधानमंत्री से हुई. प्रधानमंत्री ने कहा आज़ाद उन नेताओं में से हैं जो पार्टी से ज्यादा देश और सदन की फिक्र करते रहे हैं. पीएम ने बताया कि पार्टियां अलग अलग होने के बाजवूद आज़ाद के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते कितने गहरे रहे हैं. आज़ाद के मुख्यमंत्री रहते 31 मई को श्रीनगर में गुजराती पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री भावुक हो गए.

पीएम मोदी के बाद हर पार्टी की तरफ से गुलाम नबी आज़ाद और रिटायर हो रहे जम्मू कश्मीर के 3 और सांसदों को विदाई दी गई. गुलाम नबी आज़ाद की पार्टी कांग्रेस से आनंद शर्मा ने उनकी कुछ खूबियों का ज़िक्र किया है. और हर बार की तरह महफिल लूटी रामदास आठवले ने अपने अंदाज़ में शायरियों पढ़कर. इसके बाद राज्यसभा से रिटायर हो रहे सांसदों ने बोलना शुरू किया. पीडीपी के नज़ीर अहमद लावे ने कहा कि वो संसद की खुशबू जम्मू कश्मीर लेकर जा रहे हैं. नज़ीर अहमद के दो और सांसदों ने अपने अनुभव रखे और फिर गुलाम नबी आज़ाद ने संसद में अपने 28 साल का अनुभव बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वो हिंदुस्तान के मुसलमान हैं.

किस बात पर भावुक हुए पीएम मोदी?

जिस बात पर पीएम मोदी भावुक हुए थे उसका ज़िक्र भी गुलाम नबी आज़ाद ने किया और उन घटनाओ 5 घटनाओं का ज़िक्र किया जब वो दहाड़ें मारकर रोने लगे थे.

नहीं आएगी याद तो बरसों नहीं आएगी, मगर जब याद आएगी तो बहुत याद आएगी…

इस शेर के साथ गुलाम नबी आज़ाद ने अपनी बात खत्म की. गुलाम नबी आज़ाद की बहुत याद तो अब राज्यसभा में कांग्रेस को भी आएगी. 2014 के बाद से राज्यसभा में गुलाम नबी आज़ाद नेता प्रतिपक्ष हैं और कांग्रेस की एक मजबूत आवाज़ रहे हैं. लेकिन फिलहाल कांग्रेस गुलाम नबी आजाद को राज्यसभा नहीं भेज पाएगी. जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया और अभी विधानसभा नहीं है तो राज्यसभा के चुनाव नहीं होंगे. 15 फरवरी के बाद जम्मू कश्मीर से राज्यसभा में कोई सांसद नहीं होगा.

पहली बार महाराष्ट्र लोकसभा से बने सांसद

गुलाम नबी आज़ाद पहली बार 1980 में महाराष्ट्र की वासिम लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. 1990 में पहली बार महाराष्ट्र से ही राज्यसभा सांसद बने. 1996 में वो जम्मू कश्मीर से राज्यसभा पहुंचे और मुख्यमंत्री बनने के बाद अप्रैल 2006 में राज्यसभा से इस्तीफा दिया. 2009 में फिर वो जम्मू कश्मीर से राज्यसभा पहुंच गए. गुलाम नबी आज़ाद गांधी परिवार के भरोसेमंद रहे हैं लेकिन हाल में उन्होंने कांग्रेस में लीडरशिप को लेकर सवाल उठाए थे जिसके बाद कुछ तल्खियां बढ़ने की खबरें आई. पार्टी में कुछ सुधारों को लेकर कांग्रेस के 23 बड़े नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी जिसमें गुलाम नबी आज़ाद भी थे.

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इसकी संभावना बहुत कम है कि केरल से गुलाम नबी आज़ाद को राज्यसभा भेजा जाए. (फोटो – इंडिया टुडे)

इन सब के बावजूद भी अगर कांग्रेस उन्हें राज्यसभा में लाना चाहती है तो अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा. अप्रैल में केरल की 3 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा जिनमें एक कांग्रेस आराम से दोबारा जीत जाएगी. हालांकि इसकी संभावना बहुत कम है कि केरल से गुलाम नबी आज़ाद को राज्यसभा भेजा जाए. और अगर ऐसा होता है तो भी कांग्रेस को अभी राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष तो बनाना ही पड़ेगा. गुलाम नबी आज़ाद के बाद भी आनंद शर्मा, दिग्विजय सिंह, पी चिदंबरम, मल्लिकार्जुन खडगे जैसे कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता राज्यसभा में हैं. मल्लिकार्जुन खडगे के नाम की ज्यादा अटकलें हैं. अब ये तो वक़्त ही बताएगा कि नेता प्रतिपक्ष कौन बनते हैं.


वीडियो – राज्यसभा में पीएम मोदी ने गुलाम नबी की तारीफ की, फिर ताना मार दिया

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