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खट्टर सरकार रेपिस्ट बाबा की जेल से छुट्टी का समर्थन कर रही, लेकिन जानिए ऐसा होना संभव क्यूं नहीं

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बलात्कार करने और पत्रकार की हत्या करने के दोष में उम्रकैद की सज़ा काट रहा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आना चाहता है. बहाना आप सुनेंगे तो कह उठेंगे, वाह! ‘पिताजी’ वाह!. राम रहीम के भक्त उसे इसी नाम से पुकारते थे (हैं). आप कहेंगे कि जेल से बाहर निकलने की इजाज़त तो कैदियों को होती है, इसमें इतनी बड़ी बात क्या है और क्यों इतनी चर्चा हो रही है.

इसके दो कारण हैं- 

पहला

अगर गुरमीत राम रहीम जैसा कोई चर्चित और ताक़तवर आपराधी जेल से बाहर आएगा तो चर्चा होनी लाज़मी है. इसके भक्तों की संख्या अच्छी खासी है. इसी के भक्तों में से एक मोहिंदर पाल सिंह बिट्टू की कुछ ही दिन पहले पंजाब की नाभा जेल में हत्या कर दी गई थी. बिट्टू पर आरोप था सिखों के पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने का. खैर ये विषयांतर हो रहा है. क्योंकि इसका कोई सीधा लेना-देना नहीं है. हालांकि विधानसभा चुनाव, लोगों की भावनाएं और बाबा की रिहाई के बीच आप कोई ताना बाना बुन पाएं तो ये आपकी पारखी नज़र होगी. वापस लौटते हैं बलात्कारी बाबा की गुज़ारिश पर.

दूसरा

पैरोल के लिए किया गया बहाना. राम रहीम चाहता है कि उसे 42 दिन की पैरोल मिले. यानी वो 42 दिन के लिए बाहर आना चाहता है. कानून के मुताबिक ज़रूरी हालातों में कैदी को रिहाई दी जा सकती है. अब काम ज़रूरी है या नहीं, कितना ज़रूरी है, असली है या बहाना है, ये सब जेल प्रशासन को तय करना होता है. जेल में कैदी कैसे रहा है, उसका बर्ताव कैसा है, पैरोल देते वक्त जेल प्रशासन इसे भी ध्यान में रखता है. इस सब के बाद अर्ज़ी मंज़ूर होती है.

कोई बात नहीं, कन्हैया भी जेल में पैदा हुए थे. (कन्हैया कुमार नहीं)
राम रहीम ने पूरा जोर लगा रखा है

अधिकारियों ने माना, मिली  है पैरोल की अर्जी

हरियाणा सरकार के अधिकारियों ने माना है कि हरियाणा के गृह  विभाग के पास गुरमीत राम रहीम का आवेदन पैरोल के लिए पहुंचा है. लेकिन सरकार ने फिलहाल उसके आवेदन पर कोई फैसला नहीं लिया है. गृह सचिव के मुताबिक अभी सरकार ने सिरसा और रोहतक जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है कि क्या गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी जानी चाहिए ? क्या उसको पैरोल देने के बाद इन जिलों में कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है.

मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक कर रहे पैरवी

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम की परोल का विरोध नहीं किया है.
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राम रहीम की परोल का विरोध नहीं किया है.

राम रहीम को पैरोल मिले या नहीं, फैसला रोहतक की सुनारिया जेल प्रशासन को लेना है. लेकिन हरियाणा सरकार के मंत्री इस मामले में बड़े बयानवीर बन रहे हैं. बलात्कारी और हत्यारे की पैरोल के लिए खुलेआम पक्ष ले रहे हैं. और तो और कानूनी जानकारी होने के बाद भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर भी इसके ख़िलाफ सख़्त रुख नहीं दिखा रहे हैं. हरियाणा के मंत्री अनिल विज कह रहे हैं कि राम रहीम बाकी कैदियों की तरह पैरोल का हक़दार है. अगर वो शर्तें पूरी करता है तो पैरोल मिलनी चाहिए. जेल मंत्री कृष्णलाल पंवार का कहना है कि राम रहीम की रिक्वेस्ट पर सिरसा जिला प्रशासन विचार कर रहा है. उसी की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी. साथ ही सफाई दे डाली कि इसे चुनाव से ना जोड़ें.

प्रशासन ने क्या किया

राम रहीम ने लिखा है कि उसे पैरोल दी जाए क्योंकि उसे खेती करनी है, लेकिन फैक्ट ये है कि उसके पास कृषि योग्य भूमि नहीं है. सारी ज़मीन ट्रस्ट के नाम है. यानी राम राम रहीम की खेतीबाड़ी के लिए मांगी पैरोल के बेसिक लॉजिक में ही झोल है. रेवेन्यू डिपार्टमेंट के तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि डेरे के पास कुल 250 एकड़ भूमि है, लेकिन इस जमीन के रिकॉर्ड पर कहीं भी राम रहीम मालिक या बतौर किसान रजिस्टर्ड नहीं है. माना जा रहा है कि सिरसा के रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के आधार पर राम रहीम की पैरोल की याचिका खारिज की जा सकती है.

 

एमएसजी फिल्म के सीक्वल में राम रहीम.
जब तक बाबा बाहर था, दबंग बनकर घूमता था. एक्टिंग भी ऐसी ही करता था. 

हरियाणा पुलिस भी पैरोल के पक्ष में नहीं

हरियाणा पुलिस की खुफिया रिपोर्ट भी राम रहीम को पैरोल देने के हक में नहीं हैं. पुलिस का मानना है कि ऐसा करने पर सिरसा में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और पंचकूला जैसे हालात बन सकते हैं. पंचकूला में जब बलात्कार केस में राम रहीम को सजा सुनाई गई थी तो भक्तों ने खासी तोड़-फोड़ की थी. इस हिंसा में 34 लोगों की जान गई थी. हरियाणा पुलिस दोबारा ऐसा नहीं चाहती. काफी सतर्कता के साथ काम कर रही है. इसके अलावा पुलिस की नज़र दो और मामलों पर भी है. इन मामलों में राम रहीम आरोपी है और अभी मामला चल रहा है. ये दो मामले हैं- रेप पीड़िता के भाई रंजीत सिंह की हत्या और डेरे में रह रहे साधुओं को जबरन नसबंदी करवाना. दोनों मामले खत्म होने से पहले राम रहीम को पैरोल पर भी छोड़ने का रिस्क पुलिस नहीं लेना चाहती.

राम रहीम से पहले संजय दत्त के पैरोल को लेकर खूब विवाद हुए थे.
राम रहीम से पहले संजय दत्त के पैरोल को लेकर खूब विवाद हुए थे.

आपने बार बार पैरोल शब्द पढ़ लिया. अब इसका मतलब भी जान लीजिए. लेकिन उससे पहले एक और शब्द है, जिसके बारे में जानना ज़रूरी है और वो शब्द है फरलो.

फरलो (Furlough) मतलब छुट्टी. अगर जेल के किसी कैदी पर अपराध सिद्ध हो गया है, और सज़ा हो गई है तो उसे एक साल में जेल से 14 दिनों की छुट्टी मिल सकती है. ज़रूरत पड़ने पर ये छुट्टी दो हफ़्तों यानी और 14 दिनों तक बढ़ाई जा सकती है. फरलो जेल के कैदी का अधिकार है. कई संगीन मामलों के मुज़रिमों को कई बार जेल प्रशासन ने फरलो देने से भी इनकार किया है.

लेकिन इसके उलट पैरोल (Parole) पूरी तरह से प्रशासन पर निर्भर करता है. किसी आपातकालीन स्थिति या ज़रूरी काम के लिए आवेदन करने पर जेल प्रशासन कैदी को पैरोल देता है. एक साल में अधिकतम 90 दिनों का पैरोल मिल सकता है, और एक बार में अधिकतम 30 दिनों का पैरोल मिल सकता है. पैरोल के बारे में यह भी जानना चाहिए कि यह कैदी का अधिकार नहीं है. यानी पैरोल राम रहीम का हक नहीं है. ये सरकार की इच्छा पर डिपेंड करता है.

मुख्यमंत्री खट्टर राम रहीम को दोषी करार दिए जाने से पहले कई बार इसी तारीफ कर चुके थे, कई बार डेरे पर नतमस्तक हो चुके थे. ये पुराना ट्वीट है.
मुख्यमंत्री खट्टर राम रहीम को दोषी करार दिए जाने से पहले कई बार इसी तारीफ कर चुके थे, कई बार डेरे पर नतमस्तक हो चुके थे. ये पुराना ट्वीट है 6 मई, 2017 का .

और सरकार की इच्छा क्या है?

हरियाणा में चुनाव से पहले राम रहीम को लेकर सियासत गर्म हो गई है. राम रहीम की करतूत से हैरान-परेशान रही हरियाणा की खट्टर सरकार पैरोल को लेकर काफी उदार दिख रही है. जेल मंत्री कृष्णलाल पंवार, राम रहीम के अधिकार और कानूनी हक की वकालत कर रहे हैं तो मंत्री अनिल विज खुलकर समर्थन में उतर आए हैं. लेकिन इन सब से ऊपर मुख्यमंत्री खट्टर का बयान पढ़ लीजिए.

कुछ कानूनी कार्यवाही होती है, अगर कोई पैरोल चाहता है तो वो पैरोल ले सकता है. हम किसी को रोक नहीं सकते. अभी तक हमने राम रहीम की पैरोल के बारे में कोई भी फैसला नहीं लिया है.

साफ है, बलात्कारी, हत्यारे, 34 लोगों की मौत और तमाम कानूनी अवहेलनाओं के पीछे इकलौता कारण है- गुरमीत राम रहीम. और खट्टर सरकार की उदारता देखिए कि ऐसे शख़्स को पैरोल के लिए साफ-साफ ना कहने की बजाए ‘कानूनी कार्यवाही’ का बहाना बनाया जा रहा है.

हरियाणा ऑन पॉलिटिकल अलर्ट

हरियाणा की राजनीतिक पार्टियां इस वक्त अलर्ट पर हैं. 4 महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं. कोई भी कड़ा बयान नहीं देना चाहता. कांग्रेस की ओर से गेंद सरकार के पाले में डाल दी गई है. पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पैरोल पर उन्हें कुछ नहीं कहना, इस पर सरकार को फैसला लेना है. भाजपा भी कानून और राजनीति के बीच का रास्ता खोज रही है. वैसे आपको याद होगा ही कि राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत ने जेल जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी पर क्या आरोप लगाए थे. अगर नहीं भी है तो हम याद करा देते हैं. हनीप्रीत ने दावा किया था कि भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में समर्थन के बदले केस वापस लेने का वादा किया था. हालांकि ये आरोप सिर्फ आरोप रह गए.

हनीप्रीत बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी है.
हनीप्रीत बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी है.

अब आगे क्या होगा, ये तो वक्त ही बताएगा. फिलहाल बात इतनी सी है कि गुरमीत राम रहीम की पैरोल को लेकर हरियाणा की सियासत गरमा रही है और अब बात पैरोल से आगे निकलती दिख रही है. और बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी. कितनी दूर, इसका पता चुनाव बाद ही चल पाएगा.


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parole controversy: Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim seeking 42-day parole for farming which has created a political ruckus in Hariyana

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