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NPR तैयार करते वक्त क्या नहीं मांगा जाएगा, ये सरकार ने संसद में साफ कर दिया है

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी एनपीआर. नागरिकता संशोधन कानून आने के बाद से इसका भी विरोध हो रहा है. इसी बीच सरकार ने कहा है कि एनपीआर अपडेट करने के दौरान कोई डॉक्यूमेंट नहीं लिया जाएगा. केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 18 मार्च को राज्यसभा में यह जानकारी दी. राय ने सवाल के जवाब में कहा-

एनपीआर 2020 को अपडेट करने के दौरान कोई डॉक्यूमेंट नहीं लिया जाएगा.

उनका बयान ऐसे समय में आया है, जब एनपीआर का काफी विरोध हो रहा है. विपक्षी दल इसे एनआरसी की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि अभी तक सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी को लेकर कोई फैसला नहीं किया है. एनपीआर का काम 1 अप्रैल से शुरू होना है. यह 30 सितंबर तक चलेगा.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय. (Photo: PTI)
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय. (Photo: PTI)

कई राज्यों ने किया एनपीआर का विरोध

एनपीआर को लेकर कई राज्यों ने विरोध जताया है. इनमें पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य शामिल हैं. इन राज्यों की सरकारों का कहना है कि सरकार एनपीआर के जरिए एनआरसी का रास्ता साफ करना चाहती है. वहीं बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके राज्य में एनपीआर का काम 2010 के फॉर्मेट में ही होगा.

एनपीआर अपडेट करने के पीछे सरकार का तर्क है कि किसी भी देश के पास वहां रहने वाले लोगों का डेटा होना चाहिए.
एनपीआर अपडेट करने के पीछे सरकार का तर्क है कि किसी भी देश के पास वहां रहने वाले लोगों का डेटा होना चाहिए.

2010 में सबसे पहले हुआ एनपीआर

सबसे पहले एनपीआर का काम 2010 में हुआ था. इसके बाद 2011 में जनगणना हुई थी. 2015 में एनपीआर को फिर से अपडेट किया गया. इस दौरान सरकार ने आधार और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां लोगों से ली थीं. कहा जा रहा था कि इस बार सरकार ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर आईडी कार्ड जैसी जानकारी लेगी. साथ ही सरकार की ओर से कहा गया था कि जन्म स्थान बताना ऑप्शनल होगा. यानी कोई चाहे, तो बता सकता है या फिर मना कर सकता है.

Npr
सरकार कह रही है कि NPR को सेंसस 2021 की तैयारी की तरह देखा जाए. फाइल फोटो

क्या है एनपीआर

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर, माने देश की पॉपुलेशन में जो भी हैं, उन सब का रजिस्टर. NPR भारत के Usual Residents यानी सामान्य रहवासियों को दर्ज करता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, सामान्य रहवासी हर उस शख्स को माना जाएगा, जो किसी एक जगह पर छह महीने से रह रहा हो या आने वाले छह महीनों तक वहां रहना चाहता हो.

ध्यान दीजिए, यहां बात रहवासियों की है, न कि नागरिकों की. NPR रहवासियों की गिनती करेगा, तो इसमें नागरिक भी शामिल होंगे और भारत में रह रहे विदेशी भी. NPR एक अनिवार्य प्रक्रिया है. सादी भाषा में, आप चाहें न चाहें, नियमों के मुताबिक, आपको NPR में जानकारी दर्ज करानी ही होगी. चाहें आप नागरिक हों या न हों.

NPR की कवायद हर स्तर पर होगी. इसका पहला चरण होता है हाउस लिस्टिंग. इसमें देश में मौजूद हर इमारत और ढांचे की सूची बनती है. साथ में ये भी दर्ज होता है कि इमारत किस काम आती है, रहने के या फिर काम-धंधे के. हाउस लिस्टिंग के दौरान इमारत में दी गई सुविधाएं, जैसे टॉयलेट, पानी और इमारत में मौजूद सामान, मसलन फ्रिज वगैरह को भी दर्ज किया जाता है.


Video: NPR में ये ‘D’ वाला कॉलम क्या है, जिसका ज़िक्र अमित शाह ने संसद में कर सफाई दी

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