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कोविशील्‍ड की 2 डोज़ के बीच का अंतर क्यों बढ़ा, नीति आयोग के डॉ. वीके पॉल ने बताया

13 मई को केंद्र सरकार ने कोविशील्‍ड वैक्‍सीन (covishield vaccine) के दो डोज़ के बीच के अंतर को बढ़ाकर 12 से 16 सप्ताह कर दिया. अब तक ये अंतर 6 से 8 सप्ताह का था. सरकार के इस फैसले पर तमाम सवाल उठे. कहा गया कि देश में वैक्सीन की कमी के वजह से ये फरमान जारी कर दिया गया है. इस पर 15 मई को नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल ने जवाब दिया. प्रेस कॉन्फ्रेस करके उन्होंने कहा –

“कोविशील्ड की दोनों डोज़ के अंतर को जब 4 से 6 हफ्ते से बढ़ाकर 12 हफ्ते तक किया गया तो उसके बारे में कहा गया कि ये फैसला किसी दबाव में लिया गया है या (वैक्सीन की) कमी हो गई है. ये बहुत ही दुख वाली बात है. हमारे देश की वैज्ञानिक संस्थाओं में स्वतंत्र वैज्ञानिक हैं. नेशनल टेक्निकल अडवाइज़री ग्रुप ऑन इम्युनाइज़ेशन स्वतंत्र संस्था है. इसी संस्था ने रोटा वायरस की वैक्सीन के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए थे. यही संस्था विज्ञान के आधार पर बताती है कि कब-कौन सी वैक्सीन इस्तेमाल करनी है. किसी भी फैसले के पीछे पूरी एक समूह होता है, न कि कोई एक व्यक्ति.”

डॉ. पॉल ने वैक्सीन के स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पर भी बात रखी. बोले –

“जब इस वैक्सीन की स्टडी हुई थी तो स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल 4 से 6 हफ्ते वाला था. कहीं बीच में जाकर ये प्रोटोकॉल डिस्टर्ब हुआ. दूसरी डोज़ देने में देरियां हुईं. लेकिन जब इन केसेज़ का बाद में अध्ययन किया गया तो पता चला कि दूसरी डोज़ में देर हो जाने पर भी कुछ ख़ास फ़र्क नहीं पड़ा. सुरक्षा उतनी ही रही.”

डॉ पॉल बोले कि वैक्सीन का रियल लाइफ डेटा बताता है कि दोनों डोज़ के बीच 3 महीने तक का अंतर होने पर भी कोविड-19 के चलते होने वाली गंभीर स्थिति से 65 से 85 फीसदी तक सुरक्षा मिल जाती है. साथ ही वायरस के संक्रमण में भी कमी आती है. इन्हीं नतीजों के चलते वैज्ञानिकों ने फैसला किया कि अब दोनों डोज़ के बीच का अंतर बढ़ाने के लिए सही समय है.

बताते चलें कि सरकार ने शुरुआत में कोविशील्ड के दोनों डोज़ के बीच 4 से 6 हफ्ते, यानी 28 से 42 दिन का अंतर रखा था. इसके बाद इसे बढ़ाते हुए 6 से 8 हफ्ते यानी 42 से 56 दिन कर दिया गया था. अब इसे और बढ़ा दिया गया है. हालांकि देश में बनी कोवैक्सीन की डोज के अंतराल में कोई बदलाव नहीं किया गया है. 28 दिन पर उसकी दूसरी डोज लग रही है.


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