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जामताड़ा का नया ई-सिम फ़्रॉड मिनटों में बैंक खाते के तोते उड़ा सकता है; इससे बचने का यही उपाय है

झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 250 किलोमीटर दूर एक ज़िला है. नाम है जामताड़ा. फ़िशिंग यानी बैंक फ़्रॉड और ऑनलाइन स्कैम का हब बन चुका है. चर्चा इतनी है कि नेटफ़्लिक्स पर ‘जामताड़ा – सबका नम्बर आएगा’ नाम की वेब सीरीज़ तक आ चुकी है. मगर हम आज अचानक से इस कुख्यात ‘फ़िशिंग कैपिटल ऑफ़ इंडिया’ का ज़िक्र क्यों कर रहे हैं? हुआ ये है कि जामताड़ा के स्कैम मास्टरों ने ई-सिम (eSIM) फ़्रॉड को जन्म दिया है, जो चुटकियों में आपके सारे के सारे बैंक अकाउंट को खाली कर सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, फ़रीदाबाद पुलिस ने ई-सिम फ़्रॉड केस में पांच लोगों को अरेस्ट किया है. इनमें से चार जामताड़ा के हैं. पुलिस का मानना है कि इस फ़िशिंग रैकेट ने पंजाब, हरियाणा, बिहार, वेस्ट बंगाल और झारखंड के क़रीब 300 बैंक खातों को चपत लगाई है. क्या है ये नया फ़्रॉड और ये ई-सिम क्या बला है? और सबसे ज़रूरी, इससे कैसे बच सकते हैं? सब बताएंगे, यहीं पर.

ई-सिम क्या है? और ये नॉर्मल सिम कार्ड से अलग कैसे है?

ई-सिम को जानने से पहले ये समझना होगा कि सिम कार्ड क्या होता है. हां-हां, वही वाला सिम जो आपके फ़ोन में पड़ता है. SIM का फ़ुल फ़ॉर्म होता है सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल (subscriber identity module). इसके अंदर आपकी वो जानकारी होती है, जो टेलिकॉम ऑपरेटर को आपकी पहचान बताती है. उसके बाद ही ऑपरेटर आपको नेटवर्क इस्तेमाल करने की इजाज़त देता है. तभी आप कॉल कर पाते हैं और मोबाइल पर इंटरनेट चला पाते हैं.

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(सांकेतिक फ़ोटो)

ई-सिम बस इसी का इलेक्ट्रॉनिक रूप है. यानी ऐसा सिस्टम, जिसमें फ़िज़िकल सिम कार्ड डालने की ज़रूरत नहीं पड़ती. बस एक चिप होती है, जो टेलिकॉम नेटवर्क पर रजिस्टर करवाई जाती है. इसको आप ऐसे समझिए— DTH केबल के STB यानी सेट टॉप बॉक्स में एक फ़िज़िकल ID कार्ड लगता है, जो कम्पनी को आपके अकाउंट और उसके रीचार्ज वग़ैरह की जानकारी देता है. लेकिन ये जो शाओमी, जियो और ऐपल के टीवी बॉक्स आए हैं ना, इनमे कोई फ़िज़िकल कार्ड नहीं पड़ता बल्कि आपको इनमें बस आईडी और पासवर्ड डालकर लॉगिन करना होता है. यही फ़र्क़ सिम और ई-सिम में है.

जिन स्मार्टवॉच में कॉलिंग का सिस्टम होता है, उनमें ई-सिम ही होता है. बहुत सारे स्मार्टफ़ोन भी अब ई-सिम के सपोर्ट के साथ आते हैं. ऐपल और गूगल के कुछ फ़ोन में दो सिम इसी तरह काम करते हैं. एक फ़िज़िकल सिम कार्ड पड़ता है और दूसरा ई-सिम होता है. आप ई-सिम का नेटवर्क भी बदल सकते हैं. जैसे आमतौर पर आप फ़ोन में से पुराना सिम कार्ड निकालकर नया सिम डालते हैं, वैसे ही ई-सिम को दूसरे नेटवर्क पर रजिस्टर करवा सकते हैं.

कैसे हो रहा है ई-सिम फ़्रॉड?

ई-सिम ऐक्टिवेट करवाने के लिए आपको अपने टेलिकॉम ऑपरेटर से सम्पर्क करके ई-सिम के लिए रिक्वेस्ट डालनी होती है. KYC पूरी करवानी होती है, जिसके बाद आपको एक QR कोड मिलता है. इसे स्कैन करने पर सब्सक्रिप्शन डेटा मिल जाता है. इसे स्मार्टवॉच या स्मार्टफ़ोन के ई-सिम सिस्टम में इंस्टॉल करना होता है.

ये जो फ़्रॉडिये हैं ना, ये बस आपके नाम पर ई-सिम रजिस्टर करवा लेते हैं और आपको लम्बी-चौड़ी चपत लगा देते हैं. वो क्या है ना, सारे के सारे OTP एसएमएस मैसेज के ज़रिए ही आते हैं. तो जिसके पास आपका सिम, उसके पास आपका बैंक अकाउंट और बाक़ी बहुत कुछ.

मगर ये जामताड़ा के खिलाड़ी आपके नाम पर ई-सिम रजिस्टर कैसे करवाते हैं?

फ़रीदाबाद पुलिस के मुताबिक़, सबसे पहले ये फ़्रॉडिये कुछ मोबाइल नम्बर निकालते हैं. फिर इनको बैंकिंग ऐप्स में लॉगिन करने के लिए ट्राई करते हैं. अगर किसी नम्बर को डालने पर ऐप OTP मांगती है तो समझ लीजिए कि शिकार मिल गया. फिर शुरू होता है खेल.

कस्टमर केयर वाला बनकर ये आपको फ़ोन करते हैं. सिम कार्ड अपग्रेड कराने या KYC डिटेल को अपडेट कराने की बात करते हैं. एक बार आपका भरोसा मिल जाने पर ये आपका ईमेल ऐड्रेस लेते हैं. वो वाला ईमेल, जो आपके बैंक में रजिस्टर है.

जामताड़ा सीरीज़ का स्क्रीन ग्रैब. बस ऐसे ही कुछ बात कहने के लिए संकेतात्मक कैप्शन जोड़े हैं.

इनका टार्गेट ये होता है कि आपसे असली वाले कस्टमर केयर पर एक रिक्वेस्ट डलवा दें. किस चीज़ की? आपके मोबाइल नम्बर के साथ अपने ख़ुद के ई-मेल ऐड्रेस की. ऐसा करने के लिए ये आपके ईमेल ऐड्रेस पर ईमेल आईडी बदलने वाला टेक्स्ट लिखकर ई-मेल कर देते हैं. फिर आपको उसे ऑफ़िशियल कस्टमर केयर को फ़ॉर्वर्ड करने को बोलते हैं. अब आपके बैंक अकाउंट में मोबाइल नम्बर आपका होगा, मगर ई-मेल आईडी स्कैम करने वाले की.

फिर ये अपनी ई-मेल आईडी से आपके टेलिकॉम ऑपरेटर को एक रिक्वेस्ट डालते हैं. आपके सिम को ई-सिम में कन्वर्ट करने की. अब इनके पास ना सिर्फ़ आपके बैंक से जुड़ा हुआ ख़ुद का ई-मेल ऐड्रेस है बल्कि आपका सिम भी है. अब अगर ये फ़्रॉडिये एक फूटी कौड़ी भी आपके अकाउंट में छोड़ दें तो ये इनका बड़प्पन होगा.

शक्तियों का गलत इस्तेमाल

अरेस्ट होने वाले पांच लोगों में एक शख़्स पंजाब का है. पुलिस का कहना है कि यही बंदा स्कीम का मास्टरमाइंड था. रिपोर्ट के मुताबिक़, इसने पहले एक टेलिकॉम कम्पनी और एक डिजिटल पेमेंट कम्पनी के साथ काम किया था. पुलिस का मानना है कि पूरे स्कैम को रचने में इसी एक्सपीरियंस का हाथ हो सकता है.

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(सांकेतिक फ़ोटो)

पुलिस ने ये भी पाया कि हाईजैक किए गए बैंक अकाउंट से ये लोग सारा पैसा एक साथ नहीं निकालते थे. पकड़े ना जाएं, इसके लिए ये थोड़े-थोड़े अमाउंट के कई सारे ट्रान्ज़ैक्शन करते थे. रिपोर्ट में लिखा है कि ये लोग 10,000 रुपए से लेकर 99,000 रुपए तक के पेमेंट में पैसे निकालते थे. इसके साथ ही 1 लाख तक के बैलेन्स को 500 या 1000 रुपए के ट्रान्ज़ैक्शन से निकालते थे. इसके साथ ही पैसा ‘फ़ोन पे’, ‘ओला मनी’, ‘Paytm’ वग़ैरह की वॉलेट में भी निकाला जाता था.

ई-सिम फ़्रॉड से कैसे बचें?

ई-सिम फ़्रॉड कुछ वक़्त पहले भी सुनने में आया था. इसी साल जुलाई में तेलंगाना में इसी टाइप का रैकेट पकड़ा गया था. इनसे बचने का एक तरीक़ा यही है कि फ़ोन पर सुनी हुई किसी भी तरह की स्कीम पर भरोसा करने से पहले सौ बार सोचिए. अगर कोई सिम से रिलेटेड काम हो तो ख़ुद से कस्टमर केयर को कॉल कीजिए या फिर टेलिकॉम ऑपरेटर के रिटेल स्टोर पर जाकर काम निपटा लीजिए. बैंक अकाउंट की डिटेल को ऐसे छुपाकर रखिए, जैसे 80 के दशक की फ़िल्मों में तिजोरी की चाबी छुपाकर रखी जाती थी.

SMS या फिर ई-मेल पर जो लिंक आए, उन्हें तब तक क्लिक ना करें, जब तक ये ना कन्फ़र्म हो जाए कि सही जगह से आयी हैं.

अगर कोई आपको KYC के नाम पर एनी डेस्क (AnyDesk) या टीम व्यूअर (Team Viewer) जैसी ऐप्लिकेशन इंस्टॉल करवा रहा हो तो उसको दूर से ही वनक्कम कर दीजिए. ये ऐप्लिकेशन दूसरे बंदे को आपके फ़ोन या लैप्टॉप का रिमोट ऐक्सेस देती हैं. तो पैसा ग़ायब होने के पूरे चान्स हैं.

अपने ऊपर ये तो पढ़ा ही है कि कैसे ई-सिम फ़्रॉड होता है. तो बस इसमें जितने भी स्टेप हैं, उनसे बचकर रहिए. कोई ज़रूरत नहीं है किसी भी तरह का ईमेल फ़ॉर्वर्ड करने की.

Risk

कई बार हमें जब फ़ोन पर कोई इग्ज़ेक्युटिव कुछ इन्स्ट्रक्शन देता है तो हमें समझ नहीं आता कि हो क्या रहा है. ऐसे में हम थोड़े प्रेशर में आ जाते हैं और जो बताया जा रहा है, वो जैसा का तैसा बिना सवाल पूछे करते चले जाते हैं. इनसे बचिए. जब तक समझ ना आ जाए, सामने वाले का दिमाग़ चाटते रहिए. अगर सामने वाला फ़्रॉड है तो आपके सवाल कहीं ना कहीं उसे अटका ही देंगे.

बाक़ी ऐसा कोई भी मामला आए तो सामने वाले को बोलिए कि 10 मिनट बाद फ़ोन करे और तब तक आप अपने किसी जानने वाले से इस बारे में चीज़ें डिस्कस कर लें कि देखो भाई ऐसी-ऐसी कॉल आयी है और ऐसा-ऐसा बताया जा रहा है. फ़्रॉड है क्या?

आपके साथ अगर ई-सिम फ़्रॉड हो भी जाता है तो आपको देरी से पता चलता है तो फ़ौरन ही कस्टमर केयर को कॉल करके इसकी जानकारी दीजिए. ई-सिम रिक्वेस्ट को हटाने के लिए आप कस्टमर केयर के नम्बर पर “NO SIM” लिखकर मैसेज भी कर सकते हैं. बाक़ी आप जामताड़ा के बारे में यहां पर क्लिक कर के डिटेल में पढ़ सकते हैं.


वीडियो: जानिए, भारत में ऑनलाइन धोखाधड़ी कैसे होती है?

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