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कानपुर में कोरोना रिपोर्ट बार-बार ले रही यू-टर्न, डॉक्टरों को दिख रहा अलग ही पैटर्न!

27 मई को 27 साल का एक आदमी कानपुर में कोरोना पॉजिटिव पाया गया. इसके बाद उसे कानपुर के सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर कांशीराम ट्रॉमा सेंटर में ले जाया गया. दो दिन बाद फिर कोरोना टेस्ट हुआ, तो नतीजे नेगेटिव आए. इसके बाद उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया और 14 दिनों के लिए आइसोलेशन में रहने को कहा गया. 7 जून को हुए तीसरे कोरोना टेस्ट में वह फिर संक्रमित पाया गया. अभी रमा मेडिकल हॉस्पिटल में उसका इलाज़ जारी है.

हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए उस आदमी ने कहा, “पॉजिटिव-नेगेटिव देखते हुए मैं मानसिक रूप से थक चुका हूं. अगर मैं आगे नेगेटिव होता हूं, तो संभव है कि मुझे यकीन न हो.”

ऐसे कितने मामले आए हैं

ऐसा सिर्फ एक केस नहीं है. कानपुर इलाके में ऐसे कई केस देखे गए हैं कि कोरोना टेस्ट के नतीजे कभी पॉजिटिव, तो कभी नेगेटिव आ रहे हैं. ऐसे कम से कम 20 मामले सामने आए हैं.

एक और उदाहरण. 80 साल के एक बुजुर्ग को फ्लू था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में जब इनका कोरोना टेस्ट किया गया, तो नतीजा नेगेटिव आया. उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं होने पर उनके सैंपल SGPGIMS भेजे गए. यहां उनके नतीजे पॉजिटिव आए.

ऐसा ही चंपागंज की भी एक महिला के साथ हुआ. पहले टेस्ट में वह नेगेटिव बताई गईं. लेकिन दो दिन बाद उनके संक्रमित होने की रिपोर्ट आई. कर्नलगंज में भी एक ऐसा मामला देखा गया है, जब पहले टेस्ट में एक महिला पॉजिटिव पाई गई और दो दिन बाद हुए टेस्ट में उनके नतीजे नेगेटिव थे. इसके तीन दिन बाद फिर से उन्हें कोरोना संक्रमित बताया गया. बाद में उनकी मौत हो गई.

डॉक्टर क्या कह रहे हैं

GSVM मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर इस पैटर्न को नज़दीक से मॉनिटर कर रहे हैं. मामले को लेकर स्टडीज में शामिल डॉक्टरों का कहना है कि वायरस का लोड पांच दिनों के बाद बढ़ जाता है. ऐसे में नतीजे पॉजिटिव आ रहे हैं.

मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर प्रेम सिंह ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से बातचीत करते हुए बताया है कि वायरस साफ़ तौर पर अपना चरित्र बदल रहा था. कोरोना के लक्षण वाले लोगों के नतीजे पहले टेस्ट में नतीजे नेगेटिव आए. बाद में वायरस का लोड बढ़ने से दो-तीन दिनों बाद मरीज़ के नतीजे पॉजिटिव आ रहे हैं.

मामले को लेकर एक और डॉक्टर ने बताया कि GSVM मेडिकल कॉलेज ने इस तरह के सभी मरीज़ों की केस हिस्ट्री तैयार की है, ताकि इस पैटर्न का समाधान खोजा जा सके.


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