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कोरोना से मौत पर कितना मुआवजा मिलेगा, केंद्र सरकार ने तय कर दिया है

अगर किसी व्यक्ति की कोरोना वायरस से मौत होती है, तो उसके परिजनों को 50 हज़ार रुपए की राशि मुआवज़े के तौर पर मिलेगी. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA ने इसकी सिफ़ारिश की है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी है. सरकार ने ये भी कहा है कि ये मुआवज़ा राशि राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) से जिला के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) या जिला प्रशासन को दी जाएगी. उसे मृतक के परिजन तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी DDMA और ज़िला प्रशासन की होगी. SDRF से ये रकम दिए जाने का हालांकि विरोध भी हो रहा है.

किसे माना जाएगा कोरोना डेथ?

सरकार ने कोर्ट को बताया कि कोरोना से मौत पर मुआवजे को लेकर दिशा-निर्देश तय किए गए हैं. इसके मुताबिक़ मौत की वजह कोविड-19 होनी चाहिए. जिसके लिए डेथ सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत होगी. ये सर्टिफ़िकेट स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा 3 सितंबर को जारी गाइडलाइन पर आधारित होना चाहिए.

ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिशा-निर्देश जारी करके पहले बताया था कि कोविड से मौत किसे माना जाएगा. कहा था कि जिन लोगों के RT-PCR या मॉलिक्यूलर टेस्ट या फिर रैपिड एंटीजन टेस्ट में कोविड कन्फर्म हुआ हो, या फिर अस्पताल ने जिन्हें क्लिनिकली कोविड से पीड़ित बताया हो, और उनकी मौत हो गई हो, तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा. इसमें शर्त ये है कि टेस्ट का रिज़ल्ट आने से 30 दिनों के अंदर व्यक्ति की मौत हुई हो.

हालांकि मुआवज़े के लिए ये ज़रूरी नहीं कि मौत अस्पताल में हुई हो. इसके अलावा ज़हर खाने या आत्महत्या या किसी ऐक्सिडेंट से अगर किसी कोरोना पीड़ित व्यक्ति की मौत हुई हो, तो उसे मुआवज़ा का पात्र नहीं माना जाएगा. इस पर कोर्ट ने आत्महत्या के पहलू पर फिर से विचार करने के लिए कहा था.

आगे कोरोना से मौत पर भी मुआवजा

सरकार ने बताया है कि ये मुआवजा उन लोगों को भी दिया जाएगा, जिनकी महामारी के दौरान राहत कार्यों में योगदान देते हुए कोरोना की वजह से मौत हुई है. केंद्र सरकार ने ये भी स्पष्ट किया है कि ये मुआवजा सिर्फ कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान हुई मौतों तक सीमित नहीं है. आगे आने वाली संभावित लहरों के दौरान होने वाली मौतों के दौरान भी इसका लाभ मिलेगा.

NDMA ने कोर्ट में कहा है कि कोविड-19 ऐसी आपदा है, जो अब तक ख़त्म नहीं हुई है. इससे मरने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वायरस के नए वेरिएंट्स और भविष्य में इसकी नई लहर को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. इस वजह से ये आकलन कर पाना अभी मुश्किल है कि इसके लिए और कितने फंड की ज़रूरत पड़ेगी.

केंद्र ने राज्य सरकारों से कहा था कि वे डिजास्टर रिलीफ फंड का इस्तेमाल कोरोना से मौत पर मुआवजे में न करें. दिल्ली, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्य मुख्यमंत्री राहत कोष से ऐसे मुआवजे दे रहे हैं. NDMA ने कोर्ट में ये भी कहा कि कई राज्य सरकारें पहले से ही कोविड-19 की रोकथाम और प्रबंधन के लिए SDRF की मदद से योजनाएं चला रही हैं. केंद्र सरकार ने कोविड-19 की रोकथाम और कोविड पीड़ितों की सहायता के लिए राष्ट्रीय बजट से काफ़ी रकम खर्च की है.

ग़ैर-बीजेपी शासित राज्यों ने जताई आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट गौरव कुमार बंसल और रीपक कंसल ने कोरोना से मौत के मामले में मुआवज़े को लेकर याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ताओं ने 4 लाख रुपये मुआवजा देने को मांग की थी. हालांकि कोर्ट ने उसे खारिज करते हुए NDMA से मुआवजे की राशि तय करने के लिए कहा था. ये भी कहा था कि सरकार अपनी जिम्‍मेदारी से भाग नहीं सकती. इसी आदेश के बाद NDMA ने मुआवजे की गाइडलाइंस तय की हैं.

हालांकि NDMA की इन गाइडलाइंस का केरल और राजस्थान ने विरोध किया है. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दी इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि केंद्र सरकार को भी इसमें राज्यों की मदद करनी चाहिए. वह अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते. वहीं राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि केंद्र इस तरह से राज्यों पर थोप नहीं सकता. SDRF पर पहले से काफ़ी बोझ रहता है.


वीडियो- मेरठ में BJP नेता को जिस तरह कोरोना वैक्सीन लगाई गई उसकी कहानी सिर घुमा देगी 

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