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इन 3 वजहों से एजेंसियों को हुआ शक और अडानी के पोर्ट पर पकड़ी गई करीब 3000 किलो हेरोइन

गुजरात के कच्छ में मुंद्रा पोर्ट (Mundra Port) से अब तक की सबसे बड़ी ड्रग बरामदगी के पीछे की कहानियां सामने आने लगी हैं. लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की कीमत की हेरोइन को सीज करने में डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की टीम की प्रमुख भूमिका रही थी. मुंबई स्थित नेशनल कस्टम्स टारगेटिंग सेंटर (NCTC) की इस टीम ने ड्रग तस्करी में शामिल दो कंटेनरों की पहचान के लिए लगभग एक महीने का समय लगाया. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, NCTC को ऐसे तीन सुराग मिले थे, जिनका पीछा करते हुए उसने लगभग 2,990 किलो हेरोइन की तस्करी का खुलासा किया था.

NCTC कस्टम की वो एजेंसी है, जो संदिग्ध कार्गो और व्यक्तियों पर नजर रखती है. इस साल जून में एजेंसी से एक बड़ी चूक हो गई थी. जिसकी वजह से हेरोइन की एक बड़ी खेप उनकी नजरों से बच निकली. यही वजह थी कि इस बार कस्टम की ये एजेंसी बहुत चौकन्नी थी. पिछली असफलता की वजह से एजेंसी के कुछ अधिकारियों पर सवाल भी उठे थे, इसे लेकर भी एजेंसी के ऊपर अतिरिक्त दबाव था.

तीन वजहों से हुआ शक

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, NCTC के पास संदिग्ध कारगो को सीज करने के लिए मुख्य तौर पर तीन कारण थे. एक सूत्र ने विस्तार से इन कारणों की जानकारी भी दी-

  • एजेंसी को शक हुआ कि विजयवाड़ा की कंपनी आयात के लिए गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का इस्तेमाल कर रह रही थी, जबकि कंपनी के लिए सबसे नजदीक पोर्ट विशाखापट्टनम है.
  • एजेंसी को इस बात पर भी शक हुआ कि आयात करने वाली कंपनी ने माल को टैल्कम पाउडर बताया है और इसका सोर्स अफगानिस्तान को. वहीं दूसरी तरफ, टैल्कम पाउडर बनाने वाले टॉप के दो देश चीन और ब्राजील हैं.
  • इन दोनों तथ्यों पर शक गहराने के बाद एजेंसी ने आयात करने वाली कंपनी आशी ट्रेडिंग का रजिस्ट्रेशन चेक किया. पता चला कि कंपनी का ऑफिस असल में विजयवाड़ा के सत्यनारायणपुरम में स्थित एक घर में है.
मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई हेरोइन. (फोटो: आजतक)
मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई हेरोइन. (फोटो: आजतक)

इन सब तथ्यों के सामने आते ही एजेंसी का शक पुख्ता हो गया और अधिकारी तुरंत मुंद्रा पोर्ट पहुंच गए. जहां उन्होंने दोनों कंटेनरों को सीज कर लिया. जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि इतनी भारी मात्रा में हेरोइन के लिए भारत को एक ट्रांजिट डेस्टिनेशन के तौर पर चुना गया था. यहां से इस हेरोइन को छोटे-छोटे बैच में यूरोपीय देशों में भेजा जाना था.

अडानी पोर्ट के जांच के आदेश

मुंद्रा पोर्ट को चलाने की जिम्मेदारी बड़े कारोबारी गौतम अडानी के मालिकाना हक वाली अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकॉनमिक जोन (APSEZ) कंपनी की है. अब तक इस पूरे मामले में जो सुनवाई हुई है, उसमें कोर्ट ने इस कंपनी पर भी सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने यह जांच करने का आदेश दिया है कि क्या इस तस्करी में मुंद्रा पोर्ट और इसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार लोगों को कोई फायदा होने जा रहा था. कोर्ट ने इस तथ्य पर भी सवाल उठाया कि आखिर विजयवाड़ा की एक कंपनी ने आयात के लिए गुजरात के मुंद्रा पोर्ट को क्यों चुना. दूसरी तरफ APSEZ की तरफ से जारी बयान में कहा जा चुका है कि उसकी जिम्मेदारी केवल पोर्ट के संचालन तक सीमित है. उसके अधिकारी किसी कंटेनर की जांच नहीं कर सकते. APSEZ ने इतनी भारी मात्रा में ड्रग पकड़े जाने के लिए सरकारी एजेंसियों की तारीफ भी की है.

गौतम अडाणी के मालिकाना हक वाली कंपनी APSEZ का कहना है कि उसकी जिम्मेदारी केवल पोर्ट के संचालन तक सीमित है. (फोटो: PTI)
गौतम अडाणी के मालिकाना हक वाली कंपनी APSEZ का कहना है कि उसकी जिम्मेदारी केवल पोर्ट के संचालन तक सीमित है. (फोटो: PTI)

इससे पहले NCTC की इसी टीम ने जुलाई में मुंबई के एक पोर्ट से लगभग 293 किलो हेरोइन पकड़ी थी. इसकी कीमत लगभग दो हजार करोड़ रुपये आंकी गई थी. इस मामले में पंजाब के तरण तारण में काम करने वाले व्यक्ति को पकड़ा गया था. यह हेरोइन उसी ने मंगाई थी. एजेंसी इस मामले में एक नेता की भूमिका की भी जांच कर रही है.

दूसरी तरफ, मुंद्रा पोर्ट पर हेरोइन बरामदगी मामले में अब तक सात लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इसमें आशी ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले पति-पत्नी सुधाकर और वैशाली को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया है. उनके साथ-साथ इस मामले में चार अफगान नागरिक भी गिरफ्तार हुए हैं. इस पूरे कन्साइनमेंट को अफगानिस्तान के कंधार स्थित हसन हुसैन लिमिटेड नाम की कंपनी ने एक्सपोर्ट किया था. कन्साइनमेंट अफगानिस्तान से होकर ईरान और ईरान से होकर गुजरात पहुंचा था. जहां 16 सितंबर को अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया.


वीडियो-  गुजरात: मुंद्रा पोर्ट से 3 टन हेरोइन पकड़े जाने के बाद अडानी ग्रुप ने क्या सफाई दी है?

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