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मोदी 2.0 की पहली एनिवर्सरी पर किसानों और रेहड़ी वालों को क्या मिला

पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 1 जून (सोमवार) को कैबिनेट की बैठक हुई. इसमें किसानों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे उद्योगों के लिए बड़े फैसले लिए गए. आइए इन फैसलों को समझते हैं आसान भाषा में.

पहला फैसला, रेहड़ी पटरी वालों के लिए

सवाल- क्या है योजना

जवाब- प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि. इसके तहत रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार रुपये का लोन मिलेगा. लोन की रकम हर महीने इंस्टॉलमेंट में लौटा सकते हैं. टाइम से लोन लौटाया तो ब्याज में छूट मिलेगी. सात पर्सेंट की.

इसे ऐसे समझिए. राजू सब्जी की दुकान लगाते हैं. उन्होंने इस योजना के तहत 1200 रुपये का लोन लिया.

इस पैसे को 12 किश्तों में वापस चुकाया. यानी हर महीने 100 रुपये की किश्त दी.

समय पर पैसा चुकाया तो सब्सिडी के रूप में 7 पर्सेंट ब्याज वापस मिल गया. यानी करीब 84 रुपये वापस खाते में आ गए.

सरकार का कहना है कि 50 लाख से अधिक लोगों को इस योजना से लाभ मिलने की संभावना है.

स्कीम के तहत लोन सरकारी वेबसाइट या ऐप पर अप्लाई कर ले सकते हैं.

इसके अलावा बैंक में जाकर भी अप्लाई कर सकते हैं.

दूसरा फैसला, किसान को लोन चुकाने में राहत

खेती-किसानी के लिए बैंक से लिए तीन लाख रुपये तक के लोन को चुकाने की सीमा बढ़ाई गई. अब 31 अगस्त तक लोन चुका सकते हैं. यह रियायत 1 मार्च 2020 से 31 अगस्त 2020 के बीच चुकाए जाने वाले लोन के लिए है. आमतौर पर किसानों को 31 मार्च तक लोन चुकाना होता है. लेकिन लॉकडाउन के चलते इस बार 31 मई तक लोन चुकाने की छूट थी. इसे अब सरकार ने 31 अगस्त कर दिया है. इस तारीख तक लोन चुकाने पर किसान को ब्याज में छूट मिलती रहेगी.

बता दें कि तीन लाख रुपये तक के लोन की ब्याजदर 9 फीसदी है. लेकिन सरकार इसमें 2 परसेंट की सब्सिडी देती है. इस तरह यह 7 फीसदी पड़ता है. समय पर लौटा देने पर 3 फीसदी की और छूट मिल जाती है. ऐसे में टाइम पर लोन चुकाने वाले किसानों के लिए ब्याज की दर केवल 4 फीसदी रह जाती है.

इसे ऐसे समझिए

अनिल ने बैंक से एक साल के लिए एक लाख रुपये का लोन लिया. इसकी ब्याज दर 9 परसेंट हैं. यानी अनिल को एक साल बाद करीब 1 लाख 10 हजार 800 रुपये चुकाने पड़ते

लेकिन सरकार बैंकों को 2 परसेंट की सब्सिडी देती है. यानी ब्याज की दर 7 परसेंट ही हो गई.

अब अनिल को एक साल होने पर 7 परसेंट ब्याज के साथ एक लाख रुपये बैंक में जमा कराने होंगे. यानी यह रकम हो गई 1 लाख 8 हजार 4 सौ रुपये.

अनिल ने समय पर 1 लाख 8 हजार 4 सौ रुपये चुका दिए. तो उसे तीन फीसदी की छूट और मिलेगी. यानी बैंक 3600 रुपये अनिल को वापस कर देगा.

अब किसान यह फायदा 31 अगस्त तक ले सकते हैं.

खरीफ की 14 फसलों की सरकारी खरीद का दाम बढ़ाया

भारत में फसलें तीन तरह की होती है. रबी. खरीफ. जायद. रबी की फसल दिवाली के आसपास बोई जाती है. जैसे गेंहू, चना, सरसों आदि.

मॉनसून के समय बोई जाने वाली फसल खरीफ कहलाती है. इसमें बाजरा, मूंगफली, ग्वार, मूंग-मोठ आते हैं.

कई जगहों पर होली के बाद गर्मियों में भी फसल बोई जाती है. इसे जायद कहते हैं. इसमें ज्यादातर सब्जियां बोई जाती है. जैसे तरबूज, खीरा, करेला. इनके अलावा कई जगहों पर जायद में मूंग, बाजरा भी बोते हैं.

यह हम अभी क्यों बता रहे हैं? क्योंकि सरकार ने खरीफ की 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया है. आप सोच रहे होंगे कि एमएसपी क्या होता है?

एमएसपी, दरअसल सरकारी खरीद मूल्य होता है. इसे सरकार तय करती है. सरकारी मंडियों में एमएसपी पर ही फसल खरीदी जाती है. एमएसपी के बारे में डिटेल से यहां पर जान सकते हैं.

अभी कौनसी फसलों का एमएसपी बढ़ा

सरकार ने इन फसलों का एमएसपी बढ़ाया है.
सरकार ने इन फसलों का एमएसपी बढ़ाया है.

सरकार ने कहा कि लॉकडाउन के बावजूद रबी फसलों की खरीद बढ़ी है. इसके तहत गेंहू, धान और दलहन-तिलहन का उदाहरण दिया गया. यह टेबल देखिए-

रबी फसलों की खरीद के आंकड़े.
रबी फसलों की खरीद के आंकड़े.

छोटे उद्योगों की परिभाषा बदली

कैबिनेट ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम दर्जे के उद्योग यानी माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए भी फैसले लिए हैं.

पहले यह जान लेते हैं कि MSME होता क्या है

MSME में तीन तरह के धंधे शामिल होते हैं. माइक्रो, स्मॉल और मीडियम. ये दरअसल छोटे उद्योग-धंधे होते हैं. जैसे चूड़ी बनाने का काम, प्रिंटिंग प्रेस, फर्नीचर बनाना, कूलर-पंखे बनाना, खाने पीने का सामान बनाना. इस तरह के बहुत सारे काम MSME में आते हैं. इनसे बहुत से लोग जुड़े होते हैं. इनका देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान है. साथ ही रोजगार का सबसे बड़ा जरिया भी है. सरकार इस तरह के छोटे उद्योग धंधों को कई तरह से मदद करती है.

लेकिन यह पता कैसे चले कि कौनसा धंधा माइक्रो है और कौनसा स्मॉल. इसके लिए सरकार ने तीन अलग-अलग खांचे बनाए. जो जिसमें फिट बैठता है उसकी वही कैटेगरी हो जाती है. अब सरकार ने इन्हीं खांचों को फिर से बनाया है. जिससे कि और बहुत सारे उद्योग धंधे MSME में शामिल हो सकें. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 20 लाख करोड़ वाले पैकेज में इस बारे में ऐलान किया था. इसी पर अब मुहर लगी है. सरकार का कहना है कि 14 साल बाद MSME की परिभाषा या उनके खांचे बदले गए हैं.

कैसे बदली परिभाषा 

MSME की पुरानी और नई परिभाषा.
MSME की पुरानी और नई परिभाषा.

# माइक्रो उद्योग- पहले 25 लाख का निवेश और 10 लाख का कारोबार होना चाहिए था. अब  1 करोड़ रुपये का निवेश और 5 करोड़ रुपये तक का कारोबार शामिल होगा. .

# स्मॉल उद्योग- पहले 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ का कारोबार. अब 5 करोड़ का निवेश और 2 करोड़ रुपये का कारोबार.

# मीडियम उद्योग- पहले 10 करोड़ का निवेश और 5 करोड़ का कारोबार. अब 50 करोड़ का निवेश और 250 करोड़ का कारोबार.

यहां निवेश से मतलब है कि कंपनी ने मशीनरी, कामकाज वगैरह में कितना पैसा लगाया है.

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा कि निर्यात को कारोबार में नहीं गिना जाएगा. इससे बहुत से उद्योग MSME में आएंगे और इन्हें भी फायदा होगा.

अब बात पैकेज की 

सरकार ने MSME सेक्टर के लिए दो पैकेज भी जारी किए हैं. एक पैकेज 20 हजार करोड़ रुपये का है. दूसरा 50 हजार करोड़ रुपये का.

पहले 20 हजार करोड़ के पैकेज की बात

यह डिस्ट्रेस फंड है. यानी संकट के समय मदद करने वाला फंड. इससे संकट से जूझ रही या बंद हो चुकी MSME इकाइयों की मदद की जाएगी. केंद्रीय मंत्री गडकरी ने बताया कि कई MSME इकाइयां बैंकों का लोन चुका नहीं पाई. इसके चलते वे एनपीए की श्रेणी में आ गईं. यानी बैंक से अब उन्हें पैसे नहीं मिल रहे. ऐसे में काम बंद हो गया. इन्हें 20 हजार करोड़ रुपये के पैकेज से मदद होगी. इसके तहत सरकार 4000 करोड़ रुपये क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट में डालेगी. यह ट्रस्ट बैंकों को लोन देने की गारंटी के रूप में काम करेगा. बदले में बैंक संकट से जूझ रहीं MSME इकाइयों को लोन देगा.

इस बारे में इंडिया टुडे हिंदी के एडिटर अंशुमान तिवारी से बात की. उन्होंने कहा कि इस पैकेज का ऐलान आत्मनिर्भर भारत पैकेज में ही हो चुका है. अभी कैबिनेट ने मुहर लगाई है. यह जुलाई से शुरू होगा. लेकिन सरकार ने यह नहीं बताया कि इसके तहत दोबारा लोन कितने परसेंट ब्याज पर मिलेगा. अगर 12,-13 परसेंट पर ब्याज मिला तो फायदा नहीं होगा. इससे कम ब्याज पर ही MSME इकाइयों को फायदा होगा.

अब बात 50 हजार करोड़ के फंड की

इस पैकेज के तहत सरकार MSME इकाइयों को शेयर मार्केट में लिस्ट होने में मदद करेगी. अभी इसमें 10 हजार करोड़ रुपये डाले जाएंगे. फिर धीरे-धीरे यह रकम बढ़ेगी. सरकार का कहना है कि कई कंपनियां अच्छा काम कर रही है. उनका एक्सपोर्ट, टर्नओवर और जीएसटी रिकॉर्ड अच्छा है. लेकिन उनके पास पैसों की तंगी है. वे शेयर मार्केट में भी नहीं जा सकती है. ऐसी इकाइयों में सरकार इक्विटी खरीदेगी यानी उनमें हिस्सेदारी लेगी. इससे दो बातें होंगी-

  1. MSME इकाइयों को लोन नहीं लेना होगा. क्योंकि हिस्सेदारी बेचने से मिला पैसा उनका खुद का होगा. इसे उन्हें किसी को चुकाना नहीं होगा.
  2. साथ ही MSME को शेयर मार्केट में लिस्ट होने में मदद मिलेगी. सरकार की हिस्सेदारी होने से इन इकाइयों में भरोसा बढ़ेगा.

हालांकि अभी यह नहीं बताया कि यह फंड काम किस तरह करेगा. और कौनसी इकाइयां इसमें शामिल होंगी. इस बारे में अर्थशास्त्री विजय सरदाना ने बताया कि सरकार ने अभी केवल ऐलान किया है. लेकिन ज्यादा डिटेल दी नहीं है. यह नहीं बताया कि इक्विटी बेचने के लिए MSME किससे संपर्क करे. कैसे संपर्क करे. साथ ही यह भी देखना होगा कि इसका एग्जीक्यूशन कैसे होगा?

भारत में कोरोना वायरस के मामलों का स्टेटस


Video: मोदी सरकार 2.0 के पहले साल में नरेंद्र सिंह तोमर ने किसान और खेती के लिए क्या नए फैसले लिए?

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