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ये अजूबा मामला है रिश्वतखोरी का, 15 साल, 20 हज़ार और दो कहानियां

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लालच बुरी बला है. बचपन में पढ़ा था. सभी पढ़ते हैं. मास्टरजी छड़ी लेकर जो सबक़ सिखाते थे उनमें से एक सबक़. सच बोलो, किसी का बुरा मत करो… इन्हीं शिक्षाओं की पोटली में एक शिक्षा थी. लालची मत बनो. लेकिन शिक्षाओं और सबकों का हिसाब बड़ा गड़बड़ झाले वाला होता है. प्राइमरी स्कूलों की कच्ची दीवारों में जज़्ब हो चुके हैं ये सबक़. बड़े होकर इन बच्चों ने सिर्फ़ एक सबक़ सीखा. सिर्फ़ एक चीज़ याद रह गई. ‘सब कुछ भूल जाओ’. आदमी का कल्याण करने वाले ये आदिम सबक़ अगर आदिम जाति कल्याण विभाग की महिला क्लर्क मीना साहू को भी याद होते तो आज ये ख़बर ना कहनी-सुननी पड़ती.

# बात क्या है आइए समझें

मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में एक विभाग है आदिम जाति कल्याण विभाग. यहां एक क्लर्क हैं मीना साहू. इन्हें ये नौकरी अनुकंपा पर मिली थी. मतलब आश्रित कोटे से. मीना साहू के पति विजय साहू 15 साल पहले स्कूली बच्चों की स्कॉलरशिप के मामले में फंसे थे. आरोप लगा था कि विजय साहू ने स्कॉलरशिप में घोटाला किया है. बाद में विजय साहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

उभीं विजय साहू की जगह अनुकंपा पर उनकी पत्नी मीना साहू को क्लर्क की नौकरी मिली थी. आदिम जाति कल्याण विभाग में क्लर्क मीना साहू अब रिश्वत लेते गिरफ़्तार हुई हैं. स्थानीय अखबार बता रहे हैं कि मीना साहू 20 हज़ार की रिश्वत लेते गिरफ़्तार हुई हैं, वो भी रंगेहाथ. पुराने तरीके से. जब बरामद हुए नोट को केमिकल से धुला जाता है और रिश्वत लेने वाले के हाथ लाल हो जाते हैं.

# पूरा मामला क्या है?

मध्य प्रदेश लोकायुक्त को कुछ दिन पहले खिमलासा के रहने वाले शिवचरण अहिरवार ने लिखित में  शिकायत दी थी. शिवचरण को एक मामले में मध्य प्रदेश शासन से राहत राशि मिलनी थी. रक़म थी 4 लाख 50 हज़ार. इसी राहत राशि को रिलीज़ करने के लिए मीना साहू 20 हज़ार रूपए की रिश्वत मांग रही थीं. शिवचरण ने इसकी शिकायत लोकायुक्त एस पी से की. लोकायुक्त की टीम के साथ शिवचरण मीना साहू के दफ़्तर आए. लोकायुक्त टीम का कहना है कि शिवचरण ने पैसे दिए और मीना साहू ने गिनकर अपने पर्स में रख लिए.

इसके बाद शिवचरण ने इशारा किया टीम ने पर्स से केमिकल लगे नोट बरामद कराए और वहीं मीना साहू को गिरफ़्तार किया गया.

सोचने वाली बात ये है कि जिस रिश्वत के चक्कर में पति ने आत्महत्या की. उसी की जगह पत्नी को नौकरी मिली. उस महिला का रिश्वत के मामले में ही गिरफ्तार होना बेहद अजीब है. सबक़ भुला दिए जाएं लेकिन समय सबकुछ याद रखता है.


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