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रफाल के अलावा फ्रांस से और क्या-क्या लाने वाले हैं पीएम मोदी?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त को फ्रांस के दौरे पर जा रहे हैं. वहां मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों से मुलाकात करेंगे. मैक्रों PM मोदी के स्वागत में डिनर आयोजित करेंगे. इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच डिफेंस, न्यूक्लियर ऐनर्जी, समुद्री सहयोग और आतंकवाद पर बात होगी. अपनी इस यात्रा में नरेंद्र मोदी हमेशा की तरह वहां रह रहे हिंदुस्तानियों से भी मिलेंगे. भाषण देंगे. एक स्मारक के उद्घाटन का भी प्रोग्राम है. ये स्मारक बना है एयर इंडिया के प्लेन क्रैश में मरने वाले लोगों की याद में. ये सारी चीजें तो ऐसी होती हैं कि गए हैं तो ये भी कर लेते हैं. मगर जाने का जो बड़ा मकसद है, मतलब जिस चीज के लिए गए हैं, वो क्या है? एक मोटा-मोटी खाका है. दोनों देशों के एक-दूसरे से जुड़े अपने-अपने हित हैं. इनमें सबसे अहम पॉइंट्स हैं-

1. डिफेंस- दोनों देशों का अपना हित है. भारत हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार है. ऐसे में हथियार बेचने वाले सभी देश भारत के साथ अपने रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं. डिफेंस डील बहुत बड़ी होती है. अरबों-अरब रुपये की. अमेरिका, रूस, फ्रांस, हथियार बनाने वाले टॉप देशों में बड़ा कॉम्पीटिशन होता है. सब चाहते हैं कि उनके साथ डील पक्की हो. न हो, तो निराश भी होते हैं. हथियार खरीदने वाले देश को खरीदने की अपनी कपेसिटी का फायदा भी मिलता है. चीजें म्यूचुअल हो जाती हैं. भारत ने फ्रांस के साथ रफाएल डील की है. भारत इसका एक फायदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत करके उठाना चाहेगा.

2. सिक्यॉरिटी काउंसिल- यहां बड़ा खेल है. खूब गुटबाजी होती है. पांच परमानेंट सदस्य हैं. रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन. भारत जैसे देश, जो बड़े हैं मगर स्थायी सदस्य नहीं हैं, वो सिक्यॉरिटी काउंसिल में स्थायी सदस्यों के माध्यम से अपने हित सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं. सबसे बड़ी वजह तो ये होती है कि उनसे जुड़ी कोई बात उठे वहां, जो उनके हितों या मसलों से जुड़ी हो, तो उनके दोस्त सपोर्ट करें उनका. उसके हितों की रक्षा करें. जैसे रूस करता आया है. भारत वहां अपने लिए स्थितियां मज़बूत करना चाहता है. इसमें फ्रांस मदद कर सकता है.

3. कश्मीर जैसे मसले- पाकिस्तान और उसका मददगार चीन, दोनों कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने में जुटे हैं. लगातार कोशिश कर रहे हैं. ऐसे मौकों पर किसी भी देश की कोशिश होती है डिप्लोमैटिक चैनल्स का इस्तेमाल करना. अपने रिश्तों, राजनयिक संबंधों के इस्तेमाल से ये सुनिश्चित करना कि एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय वर्ग उसके मुताबिक प्रतिक्रिया दे. 5 अगस्त को भारत ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का निर्णय लिया. सिक्यॉरिटी काउंसिल में फ्रांस भारत के साथ मजबूती से खड़ा नजर आया. UN में भी पाकिस्तान को निराशा मिली. ऐसा डिप्लोमसी की वजह से ही मुमकिन हो पाता है.

4. पर्यावरण- पैरिस क्लाइमेट डील का सेंटर है फ्रांस. मैक्रों बहुत गंभीरता दिखाते हैं इसके लिए. फ्रांस में उनके खिलाफ खूब विरोध प्रदर्शन हुए पिछले दिनों. येलो जैकेट प्रोटेस्ट. इसकी एक बड़ी वजह ये थी कि मैक्रों सरकार ने डीजल की कीमतें काफी बढ़ा दी थीं. इसके पीछे सरकार का यही तर्क था कि पर्यावरण की रक्षा के लिए पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधनों पर टैक्स बढ़ाना होगा. ताकि एक तो इसका इस्तेमाल कम हो. लोग ग्रीन फ्यूल की तरफ ज्यादा बढ़ें. दूसरा, पैसा आए तो सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए ज्यादा खर्च कर पाए. भारत सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले देशों में है. पैरिस क्लाइमेट डील के लक्ष्यों को पूरा कर पाना अभी ही मुमकिन नहीं लग रहा. ऐसे में फ्रांस जैसे देशों को भारत जैसे मुल्कों के साथ की सख़्त ज़रूरत है.

मिर्जापुर में फ्रांस के सहयोग से बने सोलर प्लांट से आसपास के जिलों में बिजली सप्लाई की जाएगी. (फाइल फोटो)
मिर्जापुर में फ्रांस के सहयोग से बने सोलर प्लांट से आसपास के जिलों में बिजली सप्लाई की जाएगी.

5. सोलर ऐनर्जी- मैक्रों 2018 में भारत आए थे. तब मोदी और मैक्रों, दोनों नेताओं ने सोलर एनर्जी पर काम करने को काफी तवज्जो दिया. 11 मार्च, 2018 को नई दिल्ली में इंटरनेशनल सोलर अलायंस का शुरुआती कॉन्फ्रेंस हुआ.  मैक्रों ने PM मोदी के साथ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 100 मेगावाट के सोलर पार्क का उद्घाटन भी किया. इससे पहले जब ओलांदे राष्ट्रपति थे फ्रांस के, तब नवंबर 2015 में दोनों देशों ने मिलकर इंटरनेशनल सोलर अलायंस लॉन्च किया था. इसका मकसद सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है. भारत में सोलर एनर्जी का काफी स्कोप है. हालांकि सौर ऊर्जा को लेकर भी कुछ चिंताएं हैं, मगर ये काफी साफ ज़रिया है एनर्जी का.

6. न्यूक्लियर- सितंबर 2008 में भारत और फ्रांस ने न्यूक्लियर सहयोग समझौता साइन किया. मार्च 2016 में फ्रांस की EDF और भारत की NPCIL के बीच छह EPR यूनिट जैतपुर में बनाने का समझौता (रिवाइज़्ड MoU) हुआ. हर रिएक्टर की क्षमता 1,650 मेगावाट बिजली पैदा करने की होगी. न्यूक्लियर ऊर्जा में काफी संभावनाएं हैं. आशंकाएं भी हैं. दुर्घटना की. क्योंकि दुनिया की याद्दाश्त में चेरनोबिल और फुकुशिमा दोनों हैं. मगर इन आशंकाओं के पार न्यूक्लियर एनर्जी सबसे सुरक्षित, सबसे सस्ता और सबसे ग्रीन विकल्प है ऊर्जा का. ज़रूरत बस ये होती है कि आप तकनीक कितनी विकसित कर पाते हैं. कितना फुल प्रूफ कर पाते हैं. ऊर्जा के मामले में भारत को अभी काफी कुछ हासिल करना है. सस्ता विकल्प खोजना है. ज़रूरत पूरी करने लायक उत्पादन करना है. जितना विकास होगा, उतनी ज्यादा ऊर्जा की ज़रूरत बढ़ेगी. फ्रांस इस मामले में भारत की काफी मदद कर सकता है.

ये सब थीं काम की बातें. जहां तक अपने प्रधानमंत्री की यात्रा की बात है, तो वो बस फ्रांस तक नहीं रुकेंगे. आगे बढ़कर पहले बहरीन, फिर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जाएंगे. फिर वापस फ्रांस आएंगे. G7 सम्मेलन में हिस्सा लेने. जिसका मेजबान इस बार फ्रांस ही है. और मेजबान होने के नाते उसने भारत को स्पेशल न्योता दिया है. भारत G7 का सदस्य देश नहीं हैं. इस एलीट ग्रुप के मेंबर हैं- कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम.

बाकी G7 में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी आएंगे. कुछ दिनों पहले इमरान खान से मुलाकात के टाइम उन्होंने कश्मीर की बात उठाई थी. दावा किया था कि नरेंद्र मोदी ने अपनी मुलाकात में उनसे कश्मीर मामले में मध्यस्थता करने को कहा था. बाद में भारत ने ट्रंप के इस दावे को कट्टम-कुट्टा कर दिया.

अभी हाल ही में ट्रंप ने कश्मीर में चल रहे तनाव पर बात करने के लिए मोदी और इमरान खान, दोनों को फोन घुमाया था. तब भी भारत ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान सुधरेगा नहीं, शांति कैसे आएगी? कश्मीर के द्विपक्षीय मुद्दा होने वाली अपनी पारंपरिक लाइन भी फिर से कह दी भारत ने. इसके बाद भी ट्रंप ने कश्मीर और मध्यस्थता वाली बात कही है. G7 में वो जब मोदी से मिलेंगे, तो हो सकता है फिर से कश्मीर उठाएं. ऐसा होगा तो फिर ख़बर बनेगी. बाकी भारत अपनी ‘नो तीसरा पक्ष’ वाली लाइन बदले, ऐसा मुमकिन तो नहीं लगता. जो होगा, उसके अपडेट का कच्चा-चिट्ठा (अमीबा वाले इतिहास से वर्तमान तक, समूचा) बताने के लिए हम तो हैं ही. आइएगा दोबारा, पढ़ने.


वीडियो: डॉनल्ड ट्रंप ने कश्मीर पर बात करने को फोन किया, जानिए मोदी ने क्या जवाब दिया?

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