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सड़क पर गाय के नाम पर गुंडई और मेनका गांधी पर आरोप

साउथ दिल्ली के मेन रोड पर पुलिस के सामने तीन लोगों को पीटा गया. अफवाह उड़ाई गई थी कि वो लोग स्लॉटर करने के लिए गाय बेचने के लिए जा रहे थे. लेकिन असल में वो भैंस बेचने गाजीपुर मंडी जा रहे थे. जिन लोगों ने उन तीनों को पीटा, उन्होंने खुद को एनजीओ ‘पीपल फॉर एनिमल’ का मेंबर बताया था. इस एनजीओ की चेयरपर्सन मेनका गांधी हैं. मेनका गांधी ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था.

लेकिन अब इस मामले में एक बड़ा बयान सामने आया है. पीपल फॉर एनिमल के हरियाणा के चेयरमैन नरेश कादयान ने दावा किया है,

जिन दो लोगों ने 22 अप्रैल को तीन लोगों पर अटैक किया था उनको मैंने ही ट्रेन किया था. और मैं ऐसी ट्रेनिंग 2005 से ही करवा रहा हूं. और ये सब मेनका गांधी के निर्देशों पर होता था. 

नरेश कादयान.
नरेश कादयान.

ये वही नरेश कादयान हैं जिन्होंने 2010 में एक ही गोत्र में शादी को बैन करने के लिए पीआईएल डाली थी. लेकिन कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट में किसी भी तरह के बदलाव से इंकार कर दिया था.

नरेश के मुताबिक,

‘मेनका गांधी ने मुझे ट्रेनिंग करवाने के लिए बोला था. मुझे याद है कि उस वक्त हम लोगों ने जानवरों के बाल से बने ब्रशों को ले जा रहे ट्रक को रोका था. मैंने वॉलंटियरों को सीख दी थी कि इन सब मामलों में सबसे पहले पुलिस को कॉल करनी चाहिए. वो दोनों लड़के गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता भी उस ट्रेनिंग का हिस्सा थे. मुझे नहीं मालूम अब ये  लोग पीएफए के लिए किस तरह का काम करते हैं. लेकिन इस तरह की ट्रेनिंग मैंने उन्हें नहीं दी थी.’

पीएफए, फरीदाबाद के फाउंडर-प्रेसीडेंट रवि दुबे के मुताबिक,

‘गौरव गुप्ता और उसका भाई सौरभ गुप्ता दिल्ली यूनिट की रेड टीम का हिस्सा हैं. वो गाजियाबाद से काम करते हैं. और उन्हें ऊपर बैठे लोगों का पूरा सपोर्ट मिला हुआ है. वो वॉलंटियर्स के साथ मिलकर पिछले 12-12 सालों से रेड करवा रहे हैं.’

मेनका गांंधी के साथ गौरव गुप्ता
मेनका गांंधी के साथ गौरव गुप्ता, फोटो: फेसबुक

पीएफए की दिल्ली यूनिट के पूर्व प्रेसीडेंट राजीव जैन के मुताबिक, ‘मैंने उनके साथ ज्यादा काम तो नहीं किया है लेकिन वो रेड करने वाली टीम में था.’ राजीव जैन का स्टेटमेंट इसलिए जरूरी है क्योंकि पीएफए की दिल्ली में यूनिट होने से ही इंकार कर दिया गया था. 23 अप्रैल को मेनका गांधी के ऑफिस में जब उनकी एनजीओ पीएफए से जुड़े इस मामले के बारे मे बात की गई थी, तो उन्होंने इस मामले से खुद को अलग कर लिया था. साथ ही ऑफिस ने ये भी बताया था कि पीएफए का दिल्ली में कोई ऑफिस ही नहीं है तो मेंबर्स कहां से आ गए.

जबकि पीएफए की दिल्ली यूनिट को 1998 में बनाया गया था.

पीएफए की वेबसाइट peopleforanimalsindia.org 23 अप्रैल की शाम से ही ऑफलाइन हो गई है. इस वेबसाइट पर पीएफए को ‘इंडिया का सबसे बड़ा एनिमल वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन’ बताया गया था. जिसका 26 हॉस्पिटल, 165 यूनिट और ढाई लाख मेंबर का नेटवर्क है.

मेनका गांधी की एनजीओ 'पीपल फॉर एनिमल' की साइट का स्क्रीनशाट
मेनका गांधी की एनजीओ ‘पीपल फॉर एनिमल’ की साइट का स्क्रीनशॉट

वेबसाइट स्क्रॉल ने रिपोर्ट किया था कि रविवार की सुबह एनजीओ की साइट पर गौरव गुप्ता और उसके भाई सौरभ गुप्ता का नाम मेंबर के तौर पर दर्ज था. हालांकि रविवार की शाम को ही दोनों का नाम साइट से हटा लिया गया था.

इस मामले में पीएफए की तरफ दो एफआईआर दर्ज कराई थी उसमें एड्रेस लिखा था, 14 अशोक रोड, नई दिल्ली, 110001. जो कि मेनका गांधी के ऑफिस का पता है.

2013 में पीएफए के फेसबुक पेज ने एक सीरीज ‘यू आस्क शी आंसर्स’ पोस्ट की थी. इसमें ‘शी’ मेनका गांधी ही थीं, सारे जवाब उनकी तरफ से थे.

मेनकता गांधी के सौरभ गुप्ता, फोटो: फेसबुक
मेनका गांधी के सौरभ गुप्ता, फोटो: फेसबुक

इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है, पीएफए की ज्यादातर स्टेट यूनिट्स का भी ये कहना है कि ये एनजीओ मेनका गांधी के अंडर में चलती है. ओडिशा के पीएफए इन-चार्ज बिप्लब महापात्रा के मुताबिक, ये मेनका गांधी की ही गाइडेंस है कि अब हमारी 150 यूनिट हैं. आगरा यूनिट के इंचार्ज सूरत प्रसाद के मुताबिक, मेनका गांधी पीएफए की मेंटर हैं. ये बिना सरकारी मदद वाली एनजीओ है.

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के डेटा के मुताबिक पीएफए की गोवा और वरधा की यूनिट को एनिमल बर्थ कंट्रोल स्कीम 2015-16 से ग्रांट मिला था. गोवा यूनिट को 3,91,680 और वरधा यूनिट को 3,70,000 रुपए दिए गए थे. एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया सरकारी एडवाइजरी बोर्ड है.

'पीपल फॉर एनिमेशन' का लोगो
‘पीपल फॉर एनिमेशन’ का लोगो

क्या था मामला:

रिजवान अपने साथियों के साथ गाजीपुर मंडी में भैंस बेचने ले जा रहा था. ट्रक में 14 भैंसें थीं. और उनके पास भैंसों की खरीद-फरोख्त करने का लाइसेंस भी था. ट्रक रिजवान चला रहा था. वो गुड़गांव के पटौदी हरियाणा गांव से आ रहे थे. पुलिस के पास एक पीसीआर कॉल आती है कि इस ट्रक में गायों को मारने के लिए ले जाया जा रहा है. इतने में ही कुछ लोग एक गाड़ी से आते हैं और तीन लोगों, रिजवान, आशू और कामिल को ट्रक से उतारकर पीटने लगते हैं. इस गाड़ी पर एक एनजीओ का स्टिकर लगा था. ‘पीपल्स फॉर एनिमल्स’ (PFA) का स्टिकर था. ये मामला 22 अप्रैल की रात का है.


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