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पीएम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र बीजेपी में उथल-पुथल मच गई?

क्या महाराष्ट्र बीजेपी में सब कुछ सही है? सियासी हल्कों में ये सवाल इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि ऐसी चर्चाएं हैं कि पंकजा मुंडे और उनकी बहन प्रीतम मुंडे बीजेपी में अपनी कथित उपेक्षा के चलते नाराज हैं. माना जा रहा है कि पंकजा मुंडे केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए हालिया विस्तार में अपनी बहन और बीड की सांसद प्रीतम मुंडे को देखना चाहती थीं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. भागवत कराड को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर पंकजा मुंडे नाराज बताई जा रही हैं. उनके हालिया बयान इस ओर इशारा भी करते हैं. उधर, पंकजा की कथित उपेक्षा से नाराज उनके समर्थक इस्तीफे दे रहे हैं.

मामला क्या है?

बीती 7 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था. कयास लगाए जा रहे थे कि मुंडे की बेटी और बीड की सांसद प्रीतम मुंडे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. लेकिन राज्यसभा सांसद डॉ. भागवत कराड को वित्त राज्यमंत्री बनाया गया. पंकजा मुंडे के पिता दिवंगत गोपीनाथ मुंडे को कराड का राजनीतिक गुरु माना जाता है. कराड औरंगाबाद के मेयर भी रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि शिवसेना के वर्चस्व को कम करने के लिए कराड को केंद्र में मौका दिया गया है.

उधर, महाराष्ट्र के परली विधानसभा से दो बार विधायक रहीं पंकजा मुंडे, फडणवीस सरकार में मंत्री रह चुकी हैं. लेकिन 2019 में हुए चुनावों में पंकजा को हार का सामना करना पड़ा. उनके चचेरे भाई और NCP नेता धनंजय मुंडे ने उन्हें शिकस्त दे दी. वहीं, प्रीतम मुंडे की बात करें तो 2014 में गोपीनाथ मुंडे की अचानक मृत्यु के बाद खाली हुई बीड लोकसभा से उन्होंने उपचुनाव लड़ी और जीतीं. 2019 के लोकसभा चुनावों में भी उन्हें जीत मिली. ऐसे में उन्हें इस इलाके से पीएम मोदी के मंत्रिमंडल के लिए दावेदार माना जा रहा था. लेकिन हुआ कुछ और ही.

बयानबाजी का दौर

इधर केंद्र में प्रीतम को जगह नहीं मिली और उधर महाराष्ट्र में उनके और पंकजा के समर्थकों ने बीजेपी से इस्तीफे देने शुरू कर दिए. ऐसा कहा जाने लगा कि मुंडे बहनें नाराज हैं. हालांकि मंत्रिमंडल विस्तार के दो दिन बाद 9 जुलाई को समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए पंकजा ने कहा,

“प्रीतम मुंडे और मैंने अभी कोई मांग नहीं की है. जिन्होंने शपथ ली है, उनसे भी हमारे मतभेद नहीं हैं. वे भी गोपीनाथ मुंडे जी के अनुयायी हैं.”

फिर 13 जुलाई को उन्होंने कहा,

“मैंने सभी (समर्थकों) के इस्तीफे अस्वीकार कर दिए हैं. क्या मैंने तुमसे इस्तीफे के लिए कहा था. नहीं. मैं नहीं चाहती कि आप मेरे लिए बलिदान दें. मैं इस धर्मयुद्ध में नहीं पड़ना चाहती. मैं खुश हूं कि मेरे ही समुदाय के एक शख्स को मंत्री बनाया गया है.

मुंडे साहब (गोपीनाथ मुंडे) ने हमेशा समाज के पिछड़े तबकों को ऊंचा पद दिया. वे हमें राजनीति में मंत्री बनाने के लिए नहीं लाए थे. जब वे गुजर गए तब मुझे महाराष्ट्र बीजेपी में मंत्री पद का ऑफर था, लेकिन मैंने इंकार कर दिया था. प्रीतम और मेरी इसको लेकर कोई इच्छा नहीं है. मैं राष्ट्रीय स्तर पर काम करती हूं. नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा मेरे नेता हैं. “

Pankaja Munde
पंकजा के पिता गोपीनाथ मुंडे, महाराष्ट्र बीजेपी के बड़े नेता थे. फोटो- आजतक

9 जुलाई और 13 जुलाई के बीच पंकजा दिल्ली भी गई थीं. देश भर के भाजपा सचिवों के साथ अध्यक्ष जेपी नड्डा ने रविवार 11 तारीख को मुलाकात की थी. इसके बाद इन सभी की मुलाकात पीएम मोदी से भी हुई थी. पंकजा भी बीजेपी सचिव हैं. लौट कर आने के बाद 13 जुलाई को दिए बयान में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस का नाम नहीं लिया. इसके भी मायने निकाले जाने लगे. पत्रकारों ने उनसे पूछा तो उन्होंने कहा,

“मैं फिलहाल पार्टी की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हूं. मैं महाराष्ट्र में बीजेपी के किसी भी पद पर नहीं हूं. इसलिए मेरे नेता राष्ट्रीय स्तर के ही हैं. मैं आत्मसम्मान के साथ राजनीति करती हूं.”

पंकजा ने अपने समर्थकों से इस्तीफा नहीं देने को कहा और साथ ही ये भी,

“महाभारत में कौरव 100 थे लेकिन पांडव केवल 5 थे. फिर भी पांडवों की ही जीत हुई थी. मैं अभी खत्म नहीं हुई हूं. मेरे कार्यकर्ता मेरी ताकत हैं.”

शिवसेना और महाराष्ट्र सरकार की नजरें भी मुंडे पर

पंकजा के घर जुटी भीड़ पर महाराष्ट्र सरकार की भी नजरें थीं. इसी के बाद कोविड गाइडलाइन्स के उल्लंघन के मामले में 42 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

दूसरी ओर शिवसेना के मुखपत्र सामना में भी ‘पंकजा नाराजगी प्रकरण’ को छापा गया है. इस लेख में कहा गया है,

‘पंकजा के राजनीतिक करियर को खत्म करने के लिए कराड को राज्यमंत्री बनाया गया है. कराड, मुंडे की छत्रछाया में राजनीति करते रहे, लेकिन कैबिनेट विस्तार में उन्हें मंत्री बना दिया गया.’

पंकजा को जानबूझकर साइडलाइन किया जा रहा?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  2019 का चुनाव हारने के बाद पंकजा को उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें विधान परिषद भेजेगी और विपक्ष का नेता बनाएगी. लेकिन बीजेपी ने रमेश कराड को चुना. इसके बाद पंकजा को राज्यसभा के लिए भी नहीं चुना गया. बल्कि उनकी जगह भागवत कराड को चुन लिया गया. फिर कैबिनेट विस्तार में भी उनकी बहन को जगह नहीं दी गई. वहां भी कराड को ये पद दिया गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे नाराज होकर अलग-अलग स्थानीय निकायों के 105 सदस्यों ने पंकजा के प्रति समर्थन दिखाते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. इस पर पंकजा मुंडे ने अपने समर्थकों से कहा, “हम इस घर को छोड़ कर क्यों जाएं, हमने इसे बनाया है. हालांकि अगर कभी छत गिरने की नौबत आएगी तब देखेंगे कि क्या करना है.”


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