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क्या इन घोटालों से बचने के लिए अजित पवार ने बीजेपी को समर्थन दिया?

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18 सितंबर 2014. महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के दौरान सीएम देवेंद्र फडणवीस ने एक बयान दिया था. ये बयान एनसीपी के नेता अजित पवार से जुड़ा था. मराठी में देवेंद्र फडणवीस ने कहा था,

सिंचाई घोटाले में अजित पवार ने क्या किया है ये सबको पता है. महाराष्ट्र में हमारी सरकार बनती है तो अजित पवार जेल जाएंगे. अजित पवार चक्की पीसिंग, पीसिंग एंड पीसिंग.

नतीजे आए और महाराष्ट्र के सीएम बने देवेंद्र फडणवीस. लेकिन न चक्की पिसी और न अजित पवार चक्की पीसे. जैसा कि चुनाव प्रचार के दौरान देवेंद्र फडणवीस घूम-घूम दावा कर रहे थे. पूरे 5 साल बीत गए. 2019 में महाराष्ट्र में फिर चुनाव हुए. शिवसेना और बीजेपी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन सीएम पोस्ट पर बात नहीं बनी और शिवसेना की राह अलग हो गई. पार्टी एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का सपना देख रही थी. लेकिन 23 नवंबर की सुबह बीजेपी ने खेल कर दिया. जब सबकी नींद खुली तो देवेंद्र फडणवीस सीएम बन गए थे. और अजित पवार डिप्टी सीएम.

हां, वहीं जिनकी चक्की पिसने वाली थी. वही अजित पवार जिन्हें कभी देवेंद्र जेल भेजना चाहते थे. अजित पवार पर घोटालों के आरोप हैं. सिंचाई घोटाला, जिसकी बात फडणवीस कर रहे थे. उसके बारे में कहा जाता है कि यह घोटाला 70 हजार करोड़ रुपए का है. महाराष्ट्र में राजनेताओं, नौकरशाहों और ठेकेदारों की मिलीभगत से 1999 से 2009 के बीच ये घोटाला हुआ. बीजेपी के नेताओं ने कई बार इस घोटाले में अजित पवार के शामिल होने का आरोप लगाया. 28 नवंबर 2018 को महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने अजित पवार को सिंचाई घोटाले में आरोपी बनाया. अजित पवार एनसीपी के उन मंत्रियों में शामिल रहे, जिनके पास महाराष्ट्र में 1999 से 2014 के दौरान कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन सरकार में सिंचाई विभाग का प्रभार था. हालांकि मामला हाईकोर्ट में है. और इसकी जांच चल रही है.

एक और घोटाला है. महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक घोटालाय इसमें ईडी ने 24 सितंबर 2019 को अजित पवार सहित अन्य 70 के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. ये घोटाला करीब 25 हजार करोड़ रुपये का है. कथित तौर पर चीनी मिल को कम दरों पर कर्ज दिया गया था. डिफॉल्टर की संपत्तियों को सस्ते में बेच दिया था. आरोप है कि संपत्तियों को बेचने, सस्ते लोन देने और उनका रीपेमेंट नहीं होने से बैंक को 2007 से 2011 के बीच 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. अजित पवार उस समय बैंक के डायरेक्टर थे.

शरद पवार पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज़ है. जब शरद पवार के खिलाफ ईडी ने जांच शुरू की और मुकदमे शुरू किए तो पूरी पार्टी उनके पीछे खड़ी हो गई. राजनीतिक हल्कों में कहा जा रहा है कि अजित को इससे ये लगने लगा कि जब शरद संकट में तो पार्टी उनके साथ. जब वो संकट में तो उनका साथी कोई नहीं. पार्टी ने उन्हें अकेले कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए छोड़ दिया. जानकार कह रहे हैं कि बीजेपी के साथ जाने का फैसला अजित पवार ने इसीलिए किया. वो उम्‍मीद कर रहे हैं कि इससे उनके मुकदमे ठंडे बस्‍ते में चले जाएंगे या खत्‍म हो जाएंगे.

कौन हैं अजित पवार
अजित पवार शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं. 22 जुलाई 1959 को जन्म हुआ. अजित के पिता अनंतराव तो चाहते थे कि अजित फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाएं. लेकिन अजित पवार को राजनीति पसंद थी और वो चाचा की राह चल पड़े. 1982 में राजनीति में आए. कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के बोर्ड में चुने गए. पुणे जिला कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे. फिर बारामती से लोकसभा सांसद का चुनाव जीते. हालांकि बाद में चाचा के लिए सीट खाली कर दी.

बारामती वही जगह है जहां शरद पवार ने राजनीति शुरू की. अजित पवार यहां से 1991 से अब तक 7 बार विधायक चुने गए हैं. साल 2010 में कांग्रेस-एनसीपी की सरकार में अजित पवार पहली बार महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बने. हालांकि सितंबर 2012 में एक घोटाले के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

अजित अपने बयानों की वजह से भी चर्चा में रहे हैं. 7 अप्रैल 2013 को पुणे के पास इंदापुर में एक फंक्शन में उन्होंने कहा था, “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” उनके इस बयान से पार्टी की काफी लानत-मलानत हुई. बाद में खुद अजित पवार ने इसके लिए माफ़ी मांगी. कहा था कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी ग़लती थी. 2014 लोकसभा इलेक्शंस के दौरान उन पर वोटर्स को धमकाने के आरोप भी लगे थे. कहा गया कि उन्होंने गांववालों को धमकी भी दी थी. बोला था कि अगर सुप्रिया सुले को वोट नहीं दिया तो वो गांववालों का पानी बंद कर देंगे. खैर, वो अब डिप्टी सीएम हैं. फिलहाल वो जनता के लिए पानी की व्यवस्था करें तो ठीक.


मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष रहे संजय निरूपम महाराष्ट्र कांग्रेस नेताओं पर क्या बोले?

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