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महाराष्ट्र के 4 हजार रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर क्यों हैं?

महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर हैं. 1 अक्टूबर 2021 से. ये हड़ताल अनिश्चितकालीन है. यानी कि जब तक डॉक्टर्स की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक हड़ताल चलती रहेगी. रेजिडेंट डॉक्टर्स यानी कि ऐसे डॉक्टर जो मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद ट्रेनिंग कर रहे होते हैं.

रेजिडेंट डॉक्टर्स के संगठन महाराष्ट्र रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कहा है कि इस दौरान ओपीडी की सुविधाएं बंद रहेंगी. हालांकि इमरजेंसी सुविधाएं चालू रहेंगी.

क्यों हड़ताल कर रहे हैं डॉक्टर?

स्ट्राइक पर जाने से पहले रेजिडेंट डॉक्टर्स ने अपनी मांगों की एक लिस्ट जारी की. इसमें सबसे प्रमुख है फीस माफी की मांग. रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि कोरोना महामारी आई तो उन्होंने सरकार से बिना कोई सवाल पूछे कोविड ड्यूटी की. कोरोना की वजह से एकेडमिक्स प्रभावित हुई. कोरोना काल के दौरान कोई लेक्चर नहीं हुआ. लेकिन अब फीस मांगी जा रही है.

मुंबई के सायन हॉस्पिटल के डॉक्टर अक्षय यादव कहते हैं,

कोविड काल के दौरान करीब दो साल हमारी एकेडमिक पढ़ाई हुई ही नहीं. हमें एक रात में तैयार करके कोविड वार्ड में भेज दिया गया. आज हमसे उस समय की फीस मांगी जा रही है. जब पढ़ाई हुई ही नहीं तो फिर फीस किस बात की दें?

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, रेजिडेंट डॉक्टर्स को सत्र 2020-21 में 94,400 रुपए ट्यूशन फीस जमा करनी है. इसके अलावा एडमिशन फीस, हॉस्टल फीस अलग से. फीस माफी के बाद दूसरा मुद्दा हॉस्टल्स का है. हड़ताल पर गए रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल्स की हालत बहुत खराब है. कुल 20 कॉलेज में से 10-12 कॉलेज ऐसे हैं, जहां हॉस्टल्स की कंडीशन ठीक नहीं है.

घाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल औरंगाबाद के डॉक्टर ऋषिकेश कहते हैं,

हम यहां 24 घंटे काम करते हैं. मेडिकल कॉलेज रेसिडेंट डॉक्टर्स के भरोसे ही चलते हैं. लेकिन आप हमें ही परेशान कर रहे हैं. हमारे रहने की जगह ठीक नहीं है. जिसकी वजह से हमें काफी सारी दिक्कतें होती हैं. इसकी वजह से हमारे यहां 375 रेजिडेंट डॉक्टर कोविड पॉजिटिव भी हुए. हमने अपनी जान दांव पर लगाकर कोविड काल में लोगों का इलाज किया. लेकिन इसके बावजूद हमारी मांगों को नहीं सुना जा रहा है.

हॉस्टल भी है मुद्दा

रेजिडेंट डॉक्टर्स का कहना है कि हम दिन-रात मेहनत करते हैं. लोगों का इलाज करते हैं. हमारे हॉस्टल्स की कंडीशन कम से कम ऐसी तो हो, जहां थोड़ी देर आराम किया जा सके. हॉस्टल के बाद रेजिडेंट डॉक्टर्स की तीसरी डिमांड है स्टाइपेंड से कटने वाले टैक्स को रद्द करने की. साथ ही जिन मेडिकल कॉलेजों में कोरोना काल में ड्यूटी का इंसेंटिव नहीं मिला है, वो भी दिया जाए.

डॉ. अक्षय यादव बताते हैं,

BMC के जो तीन कॉलेज हैं, उनमें टैक्स कटता है. आप सोचिए कि हमें स्टाइपेंड के रूप में छोटी सी राशि मिलती है. इसमें भी बीएमसी के जो हॉस्पिटल हैं, टैक्स काट लेते हैं. बाकी किसी कॉलेज में ये सिस्टम नहीं है. हमारी मांग है कि ये बंद होना चाहिए. इसके अलावा गवर्नमेंट कॉलेज के स्टूडेंट्स को अभी तक कोविड ड्यूटी का इंसेंटिव नहीं मिला है. जब कोरोना शुरू हुआ था तब आश्वासन दिया गया था. वो भी हमें मिलना चाहिए.

पूरे महाराष्ट्र में 20 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज है. 4 हजार से अधिक रेसिडेंट डॉक्टर्स है. सब हड़ताल पर हैं. डॉक्टर्स का दावा है कि वे अचानक से हड़ताल पर नहीं गए हैं और न ही वे इसे जारी रखना चाहते हैं. पिछले छह महीने से वे सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने में लगे हैं. लेकिन सरकार उनकी बातों को सुन नहीं रही है इसलिए हड़ताल पर जाना उनकी मजबूरी है. डॉ. अक्षय यादव बताते हैं,

ये जो सारी डिमांड्स हैं, इन पर हमें सरकार ने आश्वासन दिया था. हमारे चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने ट्वीट भी किया था और फेसबुक पर भी डाला था कि रेजिडेंट डॉक्टर्स की फीस माफी को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई है. लेकिन अभी पांच महीना बीत गया है और कुछ भी नहीं हुआ. हम छह महीने से इसका फॉलोअप ले रहे हैं. हम स्ट्राइक नहीं करना चाहते, हमें काम करना है. लेकिन सरकार ने हमारी सुनी नहीं. हमें केवल आश्वासन मिला, उसे क्रियान्यवित नहीं किया गया. यही वजह है कि हमें स्ट्राइक करना पड़ा.

सरकार का क्या रुख है?

पूरे महाराष्ट्र के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं. प्रदर्शन कर रहे हैं. सरकार को उनके दिए आश्वासन की याद दिला रहे हैं. इस हड़ताल की वजह से इलाज के लिए आ रहे लोगों को भी काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं. कई जगह तो दूर-दराज के इलाकों से आए लोगों को वापस लौट जाना भी पड़ा है.

हालांकि अब तक सरकार की ओर से रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. हमने महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. अगर महाराष्ट्र सरकार या चिकित्सा शिक्षा मंत्री की ओर से कोई जवाब आता है तो हम आपको आगे अपडेट देंगे.


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