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कोरोना मरीज़ का शव आठ दिन तक अस्पताल के टॉयलेट में सड़ता रहा, अधिकारी कुछ और कहानी बताते रहे

महाराष्ट्र का जलगांव. यहां का सिविल अस्पताल इस वक्त खबरों में हैं. क्योंकि यहां एडमिट हुई एक कोरोना पॉज़िटिव बुजुर्ग महिला का शव टॉयलेट में बेहद खराब हालत में मिला. महिला 2 जून से ही गायब हो गई थी. अस्पताल वाले कहते रहे कि वो अपने मन से बाहर चली गईं, लेकिन 10 जून को उनका शव टॉयलेट में मिला. ज़ाहिर सी बात है, आठ दिन बाद शव मिला, काफी हद तक वो सड़ चुका था.

क्या है पूरा मामला?

राहुल (बदला हुआ नाम) मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव हैं. 32 बरस के हैं. पुणे में रहते हैं, पत्नी प्रेगनेंट हैं, आठवां महीना चल रहा है, लॉकडाउन भी लगा हुआ है, इन सबकी वजह से राहुल वहीं फंसे हुए हैं. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने (मई) उनके पिता कोरोना पॉज़िटिव पाए गए, जो इस वक्त नासिक के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती हैं. फिर उनकी मां और दादी भी संक्रमित पाई गईं. पहले उन्हें रेलवे के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर जलगांव सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया गया. 31 मई को राहुल की मां की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन तब ICU में कोई पलंग खाली नहीं था, वो छह घंटे तक इलाज के अभाव में तड़पती रहीं और फिर उनकी मौत हो गई.

अगले दिन राहुल की दादी, जो 82 बरस की थीं, उनकी तबीयत खराब होने लगी. लेकिन उन्हें ICU तो दूर, आइसोलेशन वॉर्ड भी नहीं मिला था. उन्हें कोरोना के संदिग्ध मरीजों वाले वॉर्ड में रखा गया था. 2 जून को वो गायब हो गईं. राहुल ने अस्पताल में कॉल करके पूछा, तो कहा गया कि वो अपने मन से बाहर चली गईं. राहुल के एक रिश्तेदार, जो पुणे में ही थे, उन्होंने पुलिस में बुजुर्ग महिला के गायब होने की शिकायत दर्ज कराई. इधर राहुल अस्पताल वालों से बोलते रहे कि वो टॉयलेट में जाकर चेक करें, लेकिन ये नहीं किया गया.

कुछ दिन बाद जब मरीज़ों ने टॉयलेट से बदबू आने की शिकायत की, तो उसका दरवाज़ा तोड़ा गया, देखा तो वहां राहुल की दादी का शव था. यानी सोचिए कि अस्पताल में इतने दिनों तक टॉयलेट्स की सफाई भी नहीं हुई होगी. राहुल कहते हैं,

‘मैं सोचता हूं कि तो कांप जाता हूं, वो कैसे चल के गई होंगी अकेले टॉयलेट तक. वो ठीक से चल भी नहीं पाती थीं.’

घटना के बाद अब डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर अविनाश धाकने का कहना है कि उन्होंने सिविल अस्पताल के सभी क्रिटिकल पेशेंट्स को दो प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट करवा दिया है. वहीं 10 जून की रात अस्पताल के पांच अधिकारियों के निलंबन का आदेश भी दे दिया गया है. इन पांच अधिकारियों में अस्पताल के डीन डॉ बी.एस. खैरे भी शामिल हैं. मेडिकल एजुकेशन सेक्रेटरी संजय मुखर्जी का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.


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