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हाईवे पर पहुंचते ही गाड़ी की स्पीड बढ़ा देते हैं तो हाई कोर्ट का ये फैसला पढ़कर ही निकलिएगा

केंद्र सरकार ने 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी करके कहा था कि हाईवे और एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां अब 100 से 120 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकेंगी. पहले ये स्पीड लिमिट 80 किमी प्रति घंटे की हुआ करती थी. यानी स्पीड लिमिट को बढ़ाया गया था. अब मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया है. हाई कोर्ट ने कहा है कि हाईवे, एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की स्पीड लिमिट के मामले में अगस्त 2014 के नोटिफिकेशन को ही फॉलो किया जाए, जो गाड़ियों की स्पीड लिमिट 80 किमी प्रति घंटे तक सीमित रखता है. कोर्ट ने इस नियम को ही लागू कराए जाने के निर्देश दिए हैं.

हाई कोर्ट ने ये आदेश एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया. ये याचिका एक महिला डॉक्टर की थी, जो सड़क हादसे में 90 फीसदी विकलांग हो गई हैं. कोर्ट ने महिला को मिलने वाली मुआवजे की रकम को साढ़े 18 लाख से बढ़ाकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये करने का आदेश भी दिया है.

Highways
हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार को स्पीड गन, स्पीड इंडिकेशन डिस्प्ले और ड्रोन्स का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके गाड़ियों की रफ्तार को ट्रैक करना चाहिए. (सांकेतिक फोटो- PTI)

ओवर स्पीडिंग पर सख़्ती

जस्टिस एन किरुभाकरन और जस्टिस टीवी तमिसेल्वी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि गाड़ियों की ओवर स्पीडिंग ही अधिकतर हादसों में कारण के तौर पर सामने आती है. अदालत ने सरकार के उस तर्क को मानने से भी इनकार कर दिया कि गाड़ियों की इंजन क्वालिटी और सड़कों की इंफ्रास्ट्रक्चर क्वालिटी को बेहतर करके हादसों को रोका जा रहा है. बेंच ने कहा –

“जब अधिकतर हादसों का कारण ही ओवर स्पीडिंग है तो इसका गाड़ियों के इंजन या सड़कों की क्वालिटी से क्या वास्ता? बल्कि इंजन क्वालिटी जैसे-जैसे अच्छी होगी, गाड़ियों की रफ्तार और बढ़ेगी. यानी और हादसे होंगे.”

कोर्ट ने दिए सुझाव

हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार को स्पीड गन, स्पीड इंडिकेशन डिस्प्ले और ड्रोन्स का अधिक से अधिक इस्तेमाल करके गाड़ियों की रफ्तार को लगातार ट्रैक करना चाहिए. साथ ही सुझाव के तौर पर कहा कि हाई क्वालिटी इंजन्स को इस तरह से डिज़ाइन किया जाना चाहिए कि गाड़ियां एक तय स्पीड लिमिट से ऊपर जाएं ही न. अदालत ने एक सुझाव सरकार को भी दिया. वो ये कि यातायात से जुड़े मामले, सड़क हादसे से जुड़े मामले देखने के लिए एक अलग कोर्ट लाई जाए.

बता दें कि 2020 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें बताया गया था कि देश में हर घंटे औसतन 6 दो-पहिया वाहन चालकों की सड़क हादसे में मौत हो रही है. इसके लिए दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियों की ओवर स्पीडिंग को बड़ा कारण माना गया था.


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