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पासपोर्ट पर कमल छाप तो दिया लेकिन सरकार खुद इसे राष्ट्रीय फूल नहीं मानती

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इंडिया के नए पासपोर्टों पर कमल का निशान छपने की खबर आई. हंगामा मच गया. कमल का फूल केंद्र की सत्ता पर काबिज़ भारतीय जनता पार्टी का चुनाव निशान भी है. कहा गया कि बीजेपी अब सरकारी संस्थाओं का भगवाकरण कर रही है. राजनीति के गलियारों में बवाल मचा हुआ है. सोशल मीडिया दो धड़ों में बंटा हुआ है.

बचपन से ही हम ऐसे सिंबलों को रटते आ रहे हैं. जनरल नॉलेज मजबूत करने के लिए. लेकिन क्या हो कि वो झूठा साबित हो जाए. पिछले कुछ समय में कुछ ऐसा ही हुआ है. पहले हॉकी को राष्ट्रीय खेल मानने वाला दावा गलत साबित हुआ. अब कमल को राष्ट्रीय फूल मानने वाली बात संदिग्ध साबित हो रही है.

Modi Bjp
कमल बीजेपी का चुनाव निशान है, इस वजह से विपक्ष पासपोर्टों के भगवाकरण का आरोप लगा रहा है.

11 दिसंबर 2019. कांग्रेस के एम के राघवन ने शून्यकाल में ये मुद्दा उठाया. राघवन ने कहा कि कमल का निशान बीजेपी का इलेक्शन सिंबल है, ऐसे में उसका इस्तेमाल सरकारी कामकाज में करना गलत है.

सरकार का इसपर रिप्लाई भी आ गया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हैं रवीश कुमार. उनका जवाब था,

ये निशान हमारा राष्ट्रीय फूल है. फर्जी पासपोर्टों की पहचान करने के लिए बनाए गए सिक्योरिटी फीचर्स का हिस्सा है. ये सिक्योरिटी फीचर्स इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन के गाइडलाइन्स के तहत लगाए गए हैं.’

सिक्योरिटी फीचर्स तक तो बात समझ में आती है. लेकिन आगे जो उन्होंने कहा, वो बात पल्ले नहीं पड़ती.

Raveesh Kumar Mea
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सरकार की तरफ से जवाब दिया.

रवीश कुमार ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा,

कमल के अलावा और भी दूसरे नेशनल सिंबल का इस्तेमाल रोटेशन के आधार पर किया जाएगा. फिलहाल ये कमल है, अगले महीने ये कुछ और हो सकता है. ये भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों में से ही कोई एक होगा जैसे कि राष्ट्रीय पुष्प या राष्ट्रीय पशु.

सवाल ये उठता है कि क्या कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है?

इसका जवाब आपको मिलेगा, 10 जुलाई 2019 को राज्यसभा की कार्रवाई में. गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बीजू जनता दल के सांसद प्रसन्ना आचार्या के सवाल का लिखित जवाब दिया था.

प्रसन्ना आचार्या ने पूछा था,

i. भारत के राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्रीय फूल क्या हैं?

ii. क्या सरकार या किसी और सक्षम संस्था के द्वारा इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन जारी हुआ है?

iii. अगर ऐसा है तो नोटिफिकेशन की डिटेल्स दी जाए. अगर नहीं तो, किस नियम के तहत UGC, NCERT और भारत सरकार के पोर्टल राष्ट्रीय पशु, राष्ट्रीय पक्षी और राष्ट्रीय फूल का नाम प्रकाशित कर रहे हैं?

पहले दोनों सवालों का जवाब था,

जैसा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के द्वारा सूचित किया गया, बाघ को राष्ट्रीय पशु और मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया जा चुका है. इस संबंध में 30 मई 2011 को नोटिफिकेशन जारी किया गया था. राष्ट्रीय फूल के बारे में ऐसा कोई नोटिस मिनिस्ट्री द्वारा कभी जारी नहीं किया गया.

तीसरे सवाल के बारे में कहा गया,

इस बारे में संबंधित संस्थाओं से जानकारी जमा की जा रही है. और, उसे सदन के पटल पर रखा जाएगा.

7 नवंबर 2017 को डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट छपी है. इसमें आरटीआई से हुए एक खुलासे का ज़िक्र है. लखनऊ की ऐश्वर्या पराशर ने बॉटेनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया से पूछा था कि क्या कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है?

इसका जवाब मिला था,

बॉटेनिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया ने कभी किसी फूल को भारत का राष्ट्रीय फूल घोषित नहीं किया है.

National Flower
सरकारी पोर्टल पर कमल को राष्ट्रीय फूल बताया जा रहा है, लेकिन गृह राज्यमंत्री इस दावे को गलत बता चुके हैं.

इसके बावजूद India. gov.in नाम के सरकारी पोर्टल पर कमल को राष्ट्रीय फूल के तौर पर दिखाया जा रहा है. यहां तक कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पूरे दावे के साथ सरेआम कमल को राष्ट्रीय फूल घोषित कर दे रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग कमल को राष्ट्रीय फूल मानकर झगड़ने पर तुले हैं.

अब सवाल उठता है कि किसका दावा सच है! क्या कमल भारत का राष्ट्रीय फूल है? अगर नहीं तो क्या बीजेपी सचमुच में देश में भगवाकरण कर रही है?


वीडियो : कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली बीजेपी इस नक्शे पर क्या कहेगी?

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