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क्या MP में बाहर से आने वाले मजदूरों और छात्रों के बीच भेदभाव किया गया?

लॉकडाउन में जो लोग जहां हैं, वहीं फंसे हुए हैं. मजदूरों का काम चौपट हो रखा है. वे घर लौटना चाहते हैं. कोटा सहित कई जगहों पर छात्र भी फंसे हुए हैं. राज्य सरकारें मजदूरों और छात्रों को वापस राज्य ला रही हैं. मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले में भी कई जगहों से मजदूर और छात्र लाए गए.

अब प्रशासन पर मजदूरों और छात्रों में भेदभाव करने का आरोप लग रहा है. छात्रों को जहां पैकेटबंद खाना और पानी की सीलबंद बोतलें दी गईं, वहीं मजदूरों को नीचे बिठाकर कागज़ की प्लेट में पूरी-सब्जी खिलाई गई. सवाल उठ रहे हैं कि ऐसा भेदभाव क्यों किया गया? मजदूरों को खाना देते वक्त सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ध्यान क्यों नहीं रखा गया?

2 तारीख और 2 तस्वीर

22 अप्रैल, 2020. जगह – आगर मालवा

Agar Malwa Student
आगर मालवा में 22 अप्रैल को राज्य से बाहर फंसे बच्चे आए थे. (फोटो: इंडिया टुडे)

22 अप्रैल को कोटा में पढ़ रहे 120 से ज्यादा छात्रों को मध्यप्रदेश लाया गया था. ये छात्र मध्य प्रदेश के आठ जिलों के रहने वाले थे. प्रशासन ने इन बच्चों को पैकट बंद खाना, सीलबंद पानी मुहैया कराया. सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा गया.

28 अप्रैल, 2020. जगह – आगर मालवा

Agar Malwa Labors
लॉकडाउन के दौरान आगर मालवा में करीब 9 हज़ार मजदूर वापस लौटे हैं. (फोटो: इंडिया टुडे)

28 अप्रैल को राजस्थान में काम करने वाले करीब 900 मजदूर आए. बच्चे-बूढ़े-महिला-जवान सभी उम्र के लोग. इन्हें मैट पर बिठाकर भोजन परोसा गया. पूरी सब्जी आदि. सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भी ध्यान नहीं रखा गया. ऐसे में सवाल उठने शुरू हुए कि क्या जिला प्रशासन ने भेदभाव किया?

मामले को लेकर जब हमने आगर मालवा के डीएम संजय कुमार से बातचीत की तो उन्होंने कहा,

दोनों बात को जोड़ना ठीक नहीं है. लॉट पर निर्भर करता है. सौ आदमी और हज़ार आदमी. ये बहुत बड़ा अंतर है. इससे बहुत फर्क पड़ता है. हालत को देखते हुए हमें यह फैसला करना पड़ता है कि कैसे काम करना है. इस वक्त जो सबसे बेहतर हो सकता है, हमने वो किया है. पूरी टीम अभी कोरोना वायरस से लड़ रही है. हमने मजदूरों को पूड़ी, दो सब्जी, दाल, चावल आदि परोस-परोस कर खिलाया. सामान्य तौर पर कोई मजदूर घर पर भी टेबल-कुर्सी पर नहीं खाते. हम भी घर में फर्श पर खाते हैं.

Agar Malwa Dm
आगर मालवा के डीएम संजय कुमार (फोटो: इंडिया टुडे)

दोनों क्लास अलग-अलग हैं. आप दोनों चीज़ों को मिलाकर नहीं देख सकते. हम उन्हें भी पैकेट दे सकते थे लेकिन उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती. उन्हें  सम्मानपूर्वक बढ़िया से फर्श पर चादर बिछाकर खिलाया गया है. इसमें कोई अपमान नहीं है. कई बार सोसाइटी में पैकेट देने को भी बुरा मान लिया जाता है. मेरे पिता बुरा मान जाते हैं. ये नजरिए की बात है. हम अपने हेडक्वार्टर से बहुत दूर जाकर काम कर रहे हैं. वहां खाना ले जाते हैं. कोशिश करते हैं सभी को भरपेट खाना मिले. हम कुछ दिखावा नहीं कर रहे हैं, जो सबसे बेहतर हो सकता था, हमने वो किया है.

लोगों को क्वारंटीन करने को लेकर उन्होंने कहा,

हम सभी लोगों को ट्रैक कर रहे हैं. उन्हें ग्राम पंचायतों में रखा गया है. अलग-थलग. कम से कम 14 दिनों के लिए. लोगों को मॉनिटर करने के लिए राज्य सरकार के सार्थक ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं.

जिले में अभी तक कुल करीब 120 छात्र आए हैं. सभी को क्वारंटीन किया गया है. लॉकडाउन में अभी तक करीब 9000 मजदूर लौटे हैं. इनमें से कई लोग दूसरे जिले के थे. उन्हें सुरक्षित तरीके से और जिलों में भेजा गया है. 28 अप्रैल को करीब 900 मजदूर आए हैं. जिले में अभी तक कोरोना के 11 केस मिले हैं. इसमें शहर के 10 और गांव से एक केस देखे गए हैं.


ये ख़बर इंडिया टुडे से जुड़े प्रमोद ने रिपोर्ट की है.


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