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चिराग पासवान ने चाचा को लिखी चिट्ठी शेयर कर दी, कहा 'अब रिश्तों पर भरोसा नहीं कर पाता हूं'

चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस के बीच अब जाहिर तौर पर तलवारें खिंच चुकी हैं. 6 में से 5 सांसदों ने पशुपति पारस का साथ देना सही समझा. बागी सांसदों ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आपातकालीन बैठक बुलाकर पार्टी के संविधान का हवाला दिया. और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटा दिया. इस पर चिराग पासवान ने कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते पांचों सांसदों को पार्टी से निष्काषित कर दिया. इसी सब झंझट के बीच चिराग ने एक चिट्ठी ट्विटर पर शेयर की है जो उन्होंने मार्च में पशुपति को लिखी थी. देखिए उन्होंने इस चिट्ठी में क्या कुछ लिखा है-

“आदरणीय चाचा जी, आज होली के दिन यह पत्र मैं इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि पापा के बिना यह पहली होली है जिसमें हम सब साथ नहीं हैं. जब तक पापा थे इस त्योहार को हम लोग खूब धूमधाम से मनाते थे. पर अब उनके नहीं रहने पर शायद ही हम कभी वैसी होली दुबारा मना पाएं. इस पत्र के लिखने से पहले आपसे मिलकर बात करना चाहता था. खालिक साहब और सूरजभान जी ने कई बार प्रयास किया कि यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे साथ बैठकर सुलझा लिया जाए. लेकिन आपकी तरफ से कभी कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला जिसके परिणामस्वरूप आज सारी बातें इस पत्र के माध्यम से आपको लिख रहा हूं.

2019 में रामचंद्र चाचा के निधन के बाद से ही मैंने आपमें बदलाव देखा है और आज तक देखते आ रहा हूं. चाचा के निधन के बाद से ही प्रिंस की जिम्मेदारी चाची ने मुझे दे दी और कहा कि आज से मैं ही प्रिंस के लिए पिता समान हूं और मुझे इसके भविष्य को बेहतर करने की जवाबदेही दी. रामचंद्र चाचा के नहीं रहने के कारण पापा और मम्मी भी बहुत दुखी रहने लग गए थे. प्रिंस को आगे बढ़ाने के लिए उसको प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मैंने दी ताकि आप सबके सामने ही प्रिंस पार्टी को बढ़ा पाए और बिहार में अपने पांव जमा ले.

मेरे इस फैसले से सभी लोग खुश हुए. मुझे विश्वास था कि प्रिंस को मिली नई जिम्मेदारी से आप भी संतुष्ट होंगे और प्रिंस के लिए खुश होंगे परंतु उस वक्त मुझे पीड़ा हुई जब आप इस फैसले के विरोध में नाराज हो गए और आपने प्रिंस को मिली नई जिम्मेदारी के लिए उसे शुभकामना देना भी उचित नहीं समझा. पापा चाहते कि मैं पार्टी के लिए और समय दूं जिसके लिए उन्होंने मुझे पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया. आपने इस फैसले पर भी अपनी नाराजगी जताई.

जिस दिन मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया, आप केवल 5 मिनट के लिए आए, प्रस्तावक बने और चले गए. उस दिन पापा कार्यक्रम के बाद बहुत दुखी थे. मेरे अध्यक्ष बनने के बाद आपने घर आना जाना भी कम कर दिया.

मुझे मिली नई जिम्मेदारी के बाद मैंने बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट यात्रा की शुरूआत की. इसका उद्देश्य था कि मैं पूरे बिहार का भ्रमण कर बिहार की छोटी बड़ी समस्या को समझकर पार्टी के विजय डॉक्यूमेंट का हिस्सा बनाऊं. इस यात्रा में बिहार के लोगों का अभूतपूर्व साथ और प्यार मिला. पार्टी के सभी सांसद, विधायक और कार्यकर्ता इस यात्रा से काफी खुश थे. मैं चाहता था कि इस यात्रा में मुझे आपका भी आशीर्वाद मिले परंतु आपने पूरी यात्रा से दूरी बनाए रखी.

कोरोनाकाल के दौरान कई बार यह महसूस हुआ कि प्रदेश सरकार दूसरे प्रदेशों में रह रहे बिहारियों के साथ कैसा सौतेला व्यवहार कर रही है. पापा भी कोरोना में बिहार सरकार के कार्य से बेहद चिंतित थे और हमेशा मुझसे कहते थे कि मैं वही करूं जिस पर मैं विश्वार करता हूं अन्यथा जीवन भर मुझे इस बात का पछतावा होगा कि क्यों मैंने कोरोना के दौरान देशभर में फंसे बिहार के लोगों की समस्या सुलझाने के दौरान बिहारियों के पक्ष में अपनी बातों को मजबूती से बिहार सरकार के समक्ष नहीं रखा. मुझे आज भी याद है वह दिन जब रातों रात श्री नीतीश कुमार जी एनडीए की मदद से मुख्यमंत्री बने और आपने खुद एमएलसी और मंत्री बनने की इच्छा जताई और खुद पहले ही नीतीश कुमार जी से इस विषय पर बातकर अपनी इच्छा जाहिर की. इससे पहले पापा श्री राजू तिवारी या श्रीमति नूतन सिंह जी को मंत्री बनाने की बात सोच रहे थे लेकिन आपके बोलने के बाद पापा ने कुछ नहीं बोला.

आपके मंत्री बन जाने से पापा बेहद खुश थे. परंतु मंत्री बनने के बाद आपको पशुपालन विभाग मिला और इससे नाराज होकर आपने मंत्रालय बदलने की बात करने को कहा. पापा कई दिनों बाद आपको मंत्री बना देख खुश थे. लेकिन आप तब भी खुश नहीं थे इस बात से पापा काफी दुखी थे. आपको लेकर पापा हमेशा चिंतित रहते थे. कई बार उन्होंने अमित शाह जी से आपके लिए बात की ताकि आपको केंद्र के किसी आयोग में जगह दिलाई जा सके.

चाचाजी, पापा के हर उस फैसले से मैं खुशी-खुशी सहमत था जिसमें आपको एमएलसी, मंत्री और फिर एमपी बनाने की बात कही थी. हमेशा पापा बोलते थे कि मैं अपने भाईयों को पिता के जैसा प्यार करता हूं ताकि बाबूजी अगर देख रहे हों तो उन्हें शांति मिले.

लॉकडाउन में अनाज बांटने को लेकर पापा और बिहार सरकार में विवाद हुआ जिस पर आपने नीतीश कुमार को कोई जवाब नहीं दिया. मुझ पर या पार्टी पर नीतीश जी की पार्टी द्वारा जब-जब प्रहार किया गया, आप हमेशा खामोश रहे. मुझे याद है कि कुछ दिनों बाद पापा की तबियत खराब हुई और मैं उन्हें अस्पताल ले गया. उनकी रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि उनका हार्ट ट्रांसप्लांट करनावा पड़ेगा. अस्पताल में भी पापा को मीडिया के माध्यम से आपसे जुड़ी पार्टी विरोधी खबरों की जानकारी प्राप्त हुई जिसका आपने कभी खंडन नहीं किया. तब पापा ने आपको फोन कर ऐसी खबरों पर अंकुश लगाने को कहा. मैं उस दौरान पार्टी के काम और उनके इलाज के बीच संघर्ष करता रहा. इसी बीच पापा ने सुझाव दिया कि पेपर में ऐड दिया जाए ताकि पार्टी अपने विचारों को और अधिक लोगों तक पहुंचा पाए. पेपर में विज्ञापन छपवाने के लिए पार्टी के हरएक मजबूत साथी ने अपना योगदान दिया. विज्ञापन छपने से पापा बहुत खुश थे और उस पूरा दिन अस्पताल से ही पार्टी के लोगों को फोन कर विज्ञापन से हो रही पार्टी की चर्चा के बारे में जानकारी ली.

पापा ने मुझे बोला कि अब पार्टी को आगे बढ़ाने का समय आ गया है. अब ये समय आ गया था जहां पापा और मैं नीतीश जी के साथ मिलकर चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. एक साल में पार्टी ने भी काफी मेहनत की थी जिसके आधार पर चुनाव अकेले ही लड़ा जा सकता था.

आप अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं थे और यह बात किसी से छुपी नहीं थी. चुनाव के दौरान भी आपने नीतीश कुमार जी की तारीफ की जिससे पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ा. मुझे पापा के जाने के बाद सबसे ज्यादा आपकी जरूरत थी लेकिन आपने जब चुनाव के पूर्व नीतीश जी के पक्ष में बात की तो मुझे बेहद दुख हुआ. पार्टी के प्रत्याशियों ने आपके ऊपर कार्रवाई करने की मांग की लेकिन मैंने नजर अंदाज किया.

पापा के नहीं रहने के बाद एक पिता के तौर पर आपसे मार्गदर्शन की अपेक्षा रखता था. मुझे उम्मीद थी कि जब मैं पापा के निधन के बाद उनकी क्रिया कार्यों में एक पुत्र की जिम्मेदारी निभा रहा था तब आप चुनाव की तैयारियों में मेरा साथ देते परंतु आपने चुनाव के प्रचार प्रसार या रणनीति बनाने में कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. पिता तुल्य होने के नाते आपने कभी मुझे नहीं जानना चाहा कि पापा के निधन के बाद मैं अकेले चुनाव का खर्चा कैसे उठा रहा हूं? पूरे चुनाव में आपने एक भी विधानसभा का दौरा नहीं किया. एक बार भी आर्थिक व्यवस्था की बात मुझसे नहीं की. आपके कहने पर उचित टिकट भी दिया गया लेकिन लालगंज की सीट आप श्री बिट्टू गुप्ता को देना चाहते थे जबकि पार्टी ने फैसला लिया था कि पार्टी अपने सिटिंग विधायक का टिकट नहीं काटेगी.

श्री राज कुमार साह का टिकट नहीं काटना चाहती थी और ऐसा ही विवाद जगदीशपुर की सीट पर हुआ था. आपने चुनाव में पांच सिंबल मांगे थे मैंने वो भी आपको भिजवा दिए थे. मात्र दो टिकट नहीं मिलने के कारण आपने पापा की मृत्यु के बाद जिस प्रकार का व्यवहार किया उससे मैं टूट गया और अब रिश्तों पर भरोसा नहीं कर पाता हूं.

मैंने हमेशा चाहा कि जैसे पापा हमेशा अपने दोनों भाईयों को साथ लेकर आगे बढ़े उसी तरह मैं भी प्रिंस, कृष्ण और मुस्कान को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद करूं. मुझे उम्मीद थी कि हम बच्चों को आगे बढ़ता देख आप खुश होंगे. पापा के बाद मेरी गलतियों को सुधारने की जिम्मेदारी आपकी थी. मुश्किल दौर में आपको मेरा मार्गदर्शन करना था. परंतु ऐसा करना तो दूर, आपने मुझसे बात करना ही बंद कर दिया. पार्टी या परिवार में जब भी कोई मुश्किल आई, मैंने सबसे पहले आपको याद किया. पापा के रहते और उनके बाद भी कई बार आपने पार्टी तोड़ने की कोशिश की.

चाचा जी इन सभी बातों के साथ यह बात भी मुझे बहुत दुख देती है कि पापा की तेरहवीं के लिए भी मम्मी ने पापा की तेरहवीं का कार्यक्रम करने के लिए 25 लाख रुपये दिए. मुझे यह बात सुनकर पीड़ा हुई और अकेला होने का अहसास हुआ.

कुछ दिन पूर्व स्वाति नाम की महिला जो पहले पार्टी से जुड़ी हुई थी वह प्रिंस पर यौन शोषण के आरोप लगाकर ब्लैकमेल कर रही थी. परिवार के बड़े होने के नाते आपसे इस विषय पर परामर्श किया लेकिन आपने इस गंभीर मामले को भी अनदेखा कर दिया. आपके अनदेखा करने के बाद मैंने प्रिंस को पुलिस के पास जाने की सलाह दी ताकि सच और झूठ सामने आए एवं जो कोई भी दोषी हो वह दंडित हो.

संगठन को लेकर भी मैंने आपसे चर्चा करनी चाही या सुझाव मांगा तो आपने हमेशा ये कहकर नकार दिया कि आपका इससे कुछ लेना देना ही नहीं. पार्टी के कार्यक्रमों में जब भी आपको आमंत्रित किया गया आपने हमेशा उसे अस्वीकार किया. सार्वजनिक तौर पर आपने अपने साथियों के बीच हमेशा मेरी निंदा की व पार्टी के प्रति हमेशा नकारात्मक बातें कहीं. मम्मी ने पूरी उम्र इस परिवार को एक रखने में बिताई. आपको एवं रामचंद्र चाचा को सगे भाई से बढ़कर प्यार किया. हर सुख दुख में आपके एवं चाची के साथ वह चट्टान की तरह खड़ी रहीं परंतु आज पापा के नहीं रहने पर उन्हें अकेला छोड़ दिया. यदि आपको मुझसे शिकायत है तो इसकी सजा मम्मी या पूरे परिवार को क्यों दी जा रही है.

पार्टी के साथ आप काम करना चाहें तो करें नहीं करना चाहें तो ना करें. लेकिन मुझे और प्रिंस को चाचा की जरूरत है ताकि हमारा परिवार एक रहे. मेरे लिए मुस्कान और प्रिंस में कोई अंतर नहीं है. पार्टी के कामों को परिवार से अलग रखना चाहिए यही मैंने अपने अनुभव से सीखा है. आपने जो कुछ कहा किया मेरे मन में अब कुछ नहीं है. यदि आपके मन में कुछ है तो मुझसे खुल कर बात करें. पापा हमेशा चाहते थे कि परिवार एक रहे. पापा के सपनों को और मम्मी की मेहनत को मैं विफल होते नहीं देख सकता इसलिए इस पत्र के माध्यम से आपसे आग्रह करता हूं कि बड़े होने के नाते परिवार एवं पार्टी को एक रखने की जिम्मेदारी आप उसे तरह निभाएं जैसे पापा निभाते थे.”


वीडियो- लोजपा में घमासानः चिराग पासवान और पशुपति पारस के रार का पूरा खाका-चिट्ठा

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