Submit your post

Follow Us

पुंछ मुठभेड़ से कुछ देर पहले भाई से बचपन की बातें कर हंस रहे थे शहीद मंदीप सिंह!

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में सोमवार 11 अक्टूबर को सेना और आतंकियों के बीच गोलीबारी हुई. इसमें सेना ने अपने 5 जवान खो दिए, जो अपने पीछे कई कहानियां छोड़ गए हैं. इन शहीदों के नाम हैं,

सिपाही वैशाख एच.

सिपाही सराज सिंह.

सिपाही गज्जन सिंह.

नायक मंदीप सिंह.

नायब सूबेदार जसविंदर सिंह.

वैशाख एच

Vaishakh H
वैशाख एच.

केरल के कोल्लम ज़िले के रहने वाले वैशाख ने 2017 में भारतीय सेना जॉइन की थी. उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब में हुई थी. ढाई साल पहले जम्मू-कश्मीर में तैनाती की गई थी.

न्यूज़ चैनल एशिया नेट के मुताबिक़ वैशाख के घर वालों की माली हालत काफ़ी ख़राब है. माता-पिता ने दोनों बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी सारी जमा पूंजी लगा दी थी. परिवार के पास एक छोटा सा घर था, वो भी उन्होंने बेच दिया था.

हालांकि परिवार में अकेले कमाने वाले वैशाख अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने परिवार के रहने के लिए एक नया घर बनाया था. इसके लिए लोन भी लिया था. पिछले महीने ही परिवार नए घर में शिफ़्ट हुआ था. गृह प्रवेश के समारोह में वैशाख खुद शामिल हुए थे. लेकिन ये खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिकी. आतंकियों ने परिवार से 23 साल का जिम्मेदार बेटा छीन लिया.

एशिया नेट के मुताबिक, वैशाख के गांव की पंचायत के एक सदस्य ने बताया कि वैशाख की शादी एक साल पहले तय हुई थी. लेकिन वैशाख की चाहत थी कि छोटी बहन शिल्पा की शादी पहले हो. इस वजह से उन्होंने अपनी शादी टाल दी थी. वैशाख ने जोर देकर कहा था कि वो बहन की शादी के बाद ही शादी करेंगे. वो मौका आने से पहले ही वैशाख परिवार को हमेशा के लिए छोड़ गए.

सराज सिंह

Saraj Singh
सराज सिंह.

25 साल के सिपाही सराज सिंह UP के शाहजहांपुर के रहने वाले थे. चार साल पहले सेना में भर्ती हुए थे. सराज के दो बड़े भाई हैं, गुरप्रीत और सुखवीर सिंह. वे दोनों भी फ़ौज में हैं. उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए सराज सेना में शामिल हुए थे.

दिसंबर 2019 में सराज की शादी हुई थी. उनकी पत्नी का नाम रणजीत कौर है. अंग्रेज़ी अख़बार दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़, सराज ने अपनी पत्नी रंजीत कौर से रविवार रात आख़िरी बार बात की थी.

UP सरकार ने शहीद के परिवार के लिए 50 लाख रुपए के मुआवज़े का ऐलान किया है. इसके अलावा परिजनों में से एक को नौकरी और एक सड़क का नामकरण सराज के नाम पर करने की घोषणा की है.

गज्जन सिंह

Gajjan Singh
शहीद गज्जन सिंह.

पंजाब के रोपड़ ज़िले की पंचरडा गांव के रहने वाले गज्जन सिंह की उम्र सिर्फ़ 27 साल थी. इस साल फ़रवरी महीने में उनकी शादी हुई थी. आजतक के विजय सिंह के मुताबिक़ गज्जन सिंह के परिवार में उनके पिता, मां और पत्नी के अलावा तीन भाई हैं. पिछले कुछ दिनों से गज्जन सिंह की मां की तबीयत ख़राब है. बुधवार 13 अक्टूबर को गज्जन सिंह का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया जाएगा. वहां पूरा पंचरडा गांव उनके अंतिम संस्कार में शामिल होगा.

मंदीप सिंह

Mandeep Singh
शहीद मंदीप सिंह.

30 साल के नायक मंदीप सिंह भी इस आतंकवादी हमले का शिकार हुए थे. मंदीप 20 साल की उम्र से फ़ौज का हिस्सा थे. उनकी पत्नी का नाम मंदीप कौर है. दो बेटे हैं. एक की उम्र 3 साल है और दूसरा महज़ डेढ़ साल का है.

मंदीप के बड़े भाई हैं जगरूप सिंह. वो भी फ़ौज का हिस्सा हैं और राजस्थान के गंगानगर में तैनात हैं. आजतक के मुताबिक़ जगरूप अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पंजाब के गुरदासपुर के छठा गांव पहुंचे हैं. दी इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जगरूप ने कहा कि उनकी पोस्टिंग की वजह से दोनों भाई मिल नहीं पाते थे. डेढ़ साल पहले उन्होंने आख़िरी बार भाई को सामने से देखा था.

अखबार के मुताबिक, जगरूप सिंह ने 11 अक्टूबर को ही मंदीप से फोन पर बात की थी. पुंछ में हुई मुठभेड़ से कुछ घंटे पहले. तब उन्हें क्या पता था कि वे आखिरी बार अपने भाई से बात कर रहे हैं.

जगरूप ने भाई को याद करते हुए इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि कैसे मंदीप उन्हें बहुत उत्साहित होकर घर को नए तरीक़े से बनाने की बात कह रहे थे. जगरूप ने कहा,

“उसने (मंदीप) मुझे एक डिज़ाइन भेजा कि हमारा घर कैसा दिखेगा. एक वॉयस नोट भी भेजा. हमने चर्चा की कि पैसे की व्यवस्था कैसे की जाए. हम हंस रहे थे, अपने बचपन के बारे में बात कर रहे थे. मुझे नहीं पता था कि जब मैं सुबह उठूंगा तो मेरा भाई नहीं रहेगा.”

आजतक के मुताबिक़ जगरूप के परिवार के पास 1 एकड़ से भी कम जमीन है. इस वजह से उनके सभी भाइयों के पास नौकरी के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं था. उनके गांव के 15 से भी ज़्यादा लोग फ़ौज में हैं. सो उन्होंने और मंदीप ने भी फौज को चुना. मंदीप के एक और भाई कतर में हैं.

जसविंदर सिंह

Jaswinder Singh
शहीद जसविंदर सिंह. (सभी तस्वीरें-आजतक)

पंजाब के कपूरथला जिले के माना तलवंडी गांव के रहने वाले थे. वे अगले महीने की शुरुआत में गांव आने वाले थे. अपने दिवंगत पिता के एक शोक समारोह में शामिल होने के लिए. जसविंदर के परिवार में उनकी पत्नी सुखप्रीत कौर, बेटा विक्रमजीत सिंह, बेटी हरनूर कौर और मां हैं.

साल 2001 में जसविंदर आर्मी में शामिल हुए थे. 2006 में कश्मीर में तीन आतंकवादियों को मारने में उनकी भूमिका के लिए सेना ने उनको पदक से सम्मानित किया था.

जसविंदर के पिता हरभजन सिंह भी फ़ौज में थे. वो कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. बड़े भाई राजिंदर सिंह भी फ़ौज में थे. 2015 में वो सेवानिवृत्त हुए.

जसविंदर के साथ हुई घटना की जानकारी बड़े भाई राजिंदर को मिली. दी इंडियन एक्सप्रेस से उन्होंने कहा,

“मुझे सबसे पहले सुबह सेना से फोन आया और अधिकारियों ने कहा कि वे सिर्फ हमारा हाल-चाल जानना चाहते हैं. मुझे शक हुआ. फिर एक और फोन आया और ये खबर हमारे पास आई.”

इन पांचों शहीदों में से 3 पंजाब से हैं. ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने तीनों के परिवारों के लिए 50-50 लाख रुपए के मुआवज़े का ऐलान किया है. इसके अलावा परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया है.


वीडियो-जम्मू-कश्मीर: सतिंदर कौर और टीचर दीपक चांद की हत्या की ज़िम्मेदारी ‘दि रेज़िस्टेंस फ़्रंट’ ने ली

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

बीकानेर रेप केस: दलित छात्रा से दुष्कर्म के दोषी टीचर, कॉलेज प्रिंसिपल और वार्डन को क्या सजा मिली है?

पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने शुक्रवार को सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

राजस्थान में एक और दलित को बुरी तरह पीटा गया, मंदिर चला गया था!

इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है.

मध्य प्रदेशः कॉलेज के गरबा कार्यक्रम में पहुंचे मुस्लिम युवक, पकड़कर जेल भेज दिए गए!

गिरफ्तार लड़के के परिवारवाले न्याय की गुहार लगा रहे हैं.

पोर्ट से 21 हजार करोड़ की हेरोइन जब्त होने के बाद अडाणी ग्रुप ने अब ये बड़ा कदम उठाया है

मुंद्रा पोर्ट पर मिली थी करीब 2,988 किलो हेरोइन.

पेट्रोल-डीजल की महंगाई के लिए पेट्रोलियम राज्य मंत्री ने जो वजह बताई, वो गले नहीं उतरेगी!

ये भी बोले, पेट्रोल-डीजल से महंगा है पीने का पानी.

एलिमिनेटर की हार से दुखी RCB फ़ैन्स को खुश कर जाएंगे ये आंकड़े!

ये परेशानी तो सुलझ गई.

RCB कप्तान के रूप में आखिरी बार क्या बोले विराट कोहली?

'मेरे लिए वफादारी मायने रखती है.'

विराट कोहली जी, इस बहसबाज़ी की ज़रूरत नहीं थी

बेकार का बवाल.

सुनील नरेन ने तय कर दिया KKR का IPL जीतना?

स्टैट्स तो यही कहते हैं.

RCB के बिग शो ने कौन सा बड़ा काम कर दिया?

जो इस सीजन कोहली-ABD भी नहीं कर पाए.