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लखीमपुर खीरी में किसानों को रौंदने वाली तीसरी गाड़ी किसकी निकली?

लखीमपुर हिंसा में शामिल 3 गाड़ियों में सबसे पीछे चलने वाली स्कॉर्पियो गाड़ी लखीमपुर के किसी ठेकेदार की नहीं, बल्कि आशीष मिश्रा के ही रिश्तेदार की बताई जा रही है. जिसे आशीष का ड्राइवर चला रहा था. इंडिया टुडे रिपोर्टर संतोष शर्मा के मुताबिक रिमांड पर लिए गए आशीष मिश्रा और उनके करीबी अंकित दास को घटनास्थल पर ले जाकर पुलिस ने 3 अक्टूबर के पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की, रिक्रिएट किया. इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के बयान से समझा कि घटना के बाद कौन-कहां से और कैसे भागा. पुलिस इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के सहारे भी सुबूत इकट्ठा करने में जुटी है.

पुलिस ने घटनास्थल पर अंकित दास, उनके गनर लतीफ और ड्राइवर शेखर को उतारा और समझने की कोशिश की कि घटना के बाद वे लोग कैसे भागे और कैसे उनकी गाड़ी पलटी. पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान आशीष मिश्रा को घटनास्थल पर जीप में ही बैठा रहने दिया. दरअसल पुलिस ने जब आशीष मिश्रा से घटनास्थल के बारे में जानकारी लेनी शुरू की तो आशीष अपने बयान पर कायम रहे कि वे घटनास्थल पर थे ही नहीं तो उन्हें कुछ नहीं पता.

अंकित दास से हुई पूछताछ

अंकित दास से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि किसानों को रौंदने के बाद थार जीप सामने से आ रही बस के चलते नहीं निकल पाई और सड़क के किनारे पलट गई. पीछे जिस फॉर्च्यूनर में अंकित दास सवार थे, वह भी आगे जाकर पलट गई. लेकिन मौके से स्कॉर्पियो निकल गई. अंकित दास ने पूछताछ में बताया कि गाड़ी पलटने के बाद वह अपने गनर लतीफ के साथ खेतों से भागा था. इस दौरान उसने 3 लोगों को कॉल भी की थी. पुलिस अब उन 3 लोगों से भी पूछताछ करेगी.

इसी दौरान पता चला कि तीसरी गाड़ी यानी स्कॉर्पियो अंकित दास की नहीं, आशीष मिश्रा के रिश्तेदार की थी. जबकि ये पहले ही पता चल चुका है कि थार गाड़ी आशीष मिश्रा की और फॉर्च्यूनर अंकित दास की थी.

वहीं पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिए गए आशीष मिश्रा पूरे वक्त अपने बयान पर कायम रहे कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे, उन्हें कोई जानकारी नहीं है. लिहाजा पुलिस ने भी रिमाइंड खत्म होने के 17 घंटे पहले ही लखीमपुर जेल में दाखिल कर दिया. लेकिन अंकित दास और उसके गनर लतीफ और ड्राइवर शेखर से पूछताछ के आधार पर पुलिस को कई अहम सुराग हासिल हुए हैं.


लखीमपुर हिंसा: आशीष मिश्रा को 12 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया

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