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अमित शाह ने योगी सरकार को किस बात के लिए 4 हजार करोड़ का बिल थमा दिया!

लखीमपुर खीरी में हिंसा को लेकर हालात तनावपूर्ण हैं. यूपी सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह मंत्रालय से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की तैनाती की मांग की. मंत्रालय ने तैनाती की मंज़ूरी दे भी दी. लेकिन इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय ने योगी आदित्यनाथ सरकार को 4,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बिल थमा दिया. किस बात का बिल? केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की तैनाती का बिल.

लखीमपुर में CAPF की चार कंपनियां

यूपी के लखीमपुर (Lakhimpur) खीरी जिले के तिकुनिया इलाके में 3 अक्टूबर को हिंसा में 8 लोगों की मौत हो गई थी. डिप्टी सीएम केशव मौर्य को काले झंडे दिखाने के लिए जमा हुए किसानों को गाड़ी से टक्कर मार दी गई. इसमें 4 किसानों की मौत हो गई. इसके बाद हिंसा में 4 और लोग मारे गए. इस घटना को लेकर बीजेपी सांसद व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा सवालों में हैं. उनके खिलाफ एफआईआर भी हो गई है. मामला राजनीतिक रूप से गरमाया हुआ है.

हालात बिगड़ने से रोकने के लिए यूपी सरकार की मांग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में CAPF की चार कंपनियों को लगाया है. समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, इनमें दो कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स की और बाकी दो कंपनी सशस्त्र सीमा बल की हैं. इन्हें तत्काल प्रभाव से तैनात किया गया है. 6 अक्टूबर तक ये फ़ोर्स लखीमपुर खीरी में ही तैनात रहेगी. बता दें कि एक कंपनी में 100 सुरक्षाकर्मी होते हैं.

पुराने बिल का तगादा भी किया

वेबसाइट न्यूज़ 18 के मुताबिक़, CAPF की तैनाती के साथ ही होम मिनिस्ट्री ने एक चिट्ठी भी लिखी है. इसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों की पिछली तैनाती का बिल क्लियर करने को कहा गया है. ये पिछले कई साल से बकाया है. चिट्ठी में की ओर से लिखा गया है,

“हम यूपी सरकार से केंद्रीय पुलिस बलों की तैनाती के लिए 4,084 करोड़ रुपये के बिल का भुगतान करने का आग्रह करते हैं. यह बिल 1 जुलाई 2021 तक का है”

केंद्रीय गृह मंत्रालय चाहता है कि बकाया राशि का भुगतान जल्द से जल्द कर दिया जाए. इसकी वजह यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव हैं.

राज्यों को कितना पेमेंट करना होता है?

गृह मंत्रालय ने 2019 में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के लिए राज्यों से ली जाने राशि में कटौती की थी. गृह मंत्रालय हर पांच साल में अपनी नीतियों में फेरबदल करता है. मंत्रालय की 2019 की नीति के मुताबिक़, 2021-22 में साल भर की सामान्य तैनाती के लिए राज्यों से 17.36 करोड़ रुपये लेने का नियम बनाया गया है. ये खर्च CAPF की 7 कंपनियों के लिए है. अगर कम समय के लिए तैनाती रहती है या फिर कम या ज्यादा कंपनियां तैनात होती हैं, तो उसके हिसाब से ये रकम घट-बढ़ जाती है.

ज़्यादा जोख़िम भरे इलाक़ों और सेंसिटिव इलाक़ों में केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बलों की तैनाती के नियम अलग हैं. ऐसे इलाक़ों में अगर फोर्स तैनात की जाती है तो उसके लिए सालाना 37.93 करोड़ रुपये तय किए गए गए है. ये रकम 2021-22 के लिए है. इस राशि में आमतौर पर हर साल बदलाव होता है. इस तरह, 2023-24 में जब लोकसभा चुनाव होंगे, तब सामान्य जगहों पर सालभर की तैनाती के लिए राज्यों को 22.3 करोड़ खर्च करने पड़ सकते हैं. ज़्यादा जोख़िम भरे और सेंसिटिव इलाक़ों में फोर्स भेजने का खर्च करीब 42 करोड़ रुपये होगा.


वीडियो- लखीमपुर हिंसा: ओवैसी ने इस घटना का प्री-प्लांड बताकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए!

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