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क्या है कोहिनूर मिल केस, जिसकी जांच के दायरे में राज ठाकरे आ गए?

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लोकसभा चुनावों में की हुई मोदी विरोधी सभाओं के बाद राज ठाकरे फिर से सुर्ख़ियों में हैं. इस बार मामला आर्थिक गड़बड़ी का है. ईडी ने यानी कि प्रवर्तन निदेशालय ने राज ठाकरे को नोटिस भेज दिया है. उन्हें 22 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया है. ये पूछताछ कोहिनूर सीटीएनएल कंपनी से जुड़े एक आर्थिक मामले की जांच के सिलसिले में होगी. इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है. तब, जब वहां विधानसभा चुनाव बिल्कुल सर पर हैं. राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस ने इसे बदले की कार्रवाई बताया है. यहां तक कि पार्टी प्रवक्ता संदीप देशपांडे ने ऐसा एक बयान भी दे दिया. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान राज ठाकरे की मोदी विरोधी बातों का लोगों पर काफी असर हुआ था. सो अब भाजपा ईडी का इस्तेमाल कर रही है. ताकि चुनाव में आने वाली चुनौतियों से निपटा जा सके.

इस मामले में राज ठाकरे के साथ शिव सेना के वरिष्ठ नेता मनोहर जोशी के बेटे उन्मेश जोशी का भी नाम है. उन्हें ईडी ने 20 अगस्त को बुलाया था. बहरहाल ये मामला है क्या? आइए थोड़ा सा डिटेल में जानते हैं.

क्या है कोहिनूर स्क्वेयर?

कोहिनूर स्क्वेयर मुंबई के दादर में स्थित एक सेमी ट्विन टॉवर है. कुछ-कुछ वैसे ही जैसे अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर था. बस हाईट उतनी नहीं है. फिर भी ठीक-ठाक है. ये 52 और 35 मंज़िलों की मिक्स्ड स्काईस्क्रेपर इमारत है, जो कोहिनूर सीटीएनएल नामक कंपनी की मिल्कियत है. जिसकी पहली पांच मंज़िलों पर एक आलिशान मॉल है. जिस जगह पर ये टॉवर खड़ा है उसकी खरीद से जुड़े मामले ने ही तमाम झमेला खड़ा कर रखा है. जो तकरीबन 13 साल पहले हुई थी.

इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 2100 करोड़ बताई जाती है.
इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 2100 करोड़ बताई जाती है.

किसने खरीदी थी ज़मीन?

ये ज़मीन कभी तीन लोगों ने मिलकर खरीदी थी. राज ठाकरे, उन्मेश जोशी और राजेंद्र शिरोडकर. यहां पहले कोहिनूर मिल हुआ करती थी. सौदा 421 करोड़ में हुआ था. जिसके बारे में कहा गया था कि चिल्लर में ज़मीन खरीद ली गई है. राज ठाकरे की एक और वजह से भी आलोचना हुई थी. मराठी अस्मिता की राजनीति करने वाले ठाकरे को मराठी मज़दूरों का रोज़गार छीनने वाला बताया गया था. इसका तोड़ ये निकाला गया कि भूमिपूजन समारोह में राज ठाकरे ने एक घोषणा कर दी. कहा कि 100 मिल मज़दूरों के एक बेटे को इस आलिशान प्रोजेक्ट में नौकरी दी जाएगी. ये होते-होते होता लेकिन राज ठाकरे खुद ज़्यादा समय तक प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं रहें. 2008 में वो अपने शेयर बेचकर इससे अलग हो गए.

पुरानी कोहिनूर मिल की ज़मीन महज़ 421 करोड़ में खरीदी गई.
पुरानी कोहिनूर मिल की ज़मीन महज़ 421 करोड़ में खरीदी गई.

ईडी के दखल वाला मामला क्या है?

दरअसल कोहिनूर मिल की ज़मीन खरीदने के लिए आईएल एंड एफएस नामक कंपनी से लोन लिया गया था. ये इन्फ्रा, फाइनेंस और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़ी नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी है. मुंबई मिरर में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने 225 करोड़ रुपए लगाए थे इस प्रोजेक्ट में. जिसमें उसे 135 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा. कहते हैं कि आईएल एंड एफएस ने भी 2008 में ही अपने शेयर महज़ 90 करोड़ में सरेंडर कर दिए थे. बाद में कंपनी ने प्रोजेक्ट के लिए लोन भी दिया जो कि कोहिनूर सीटीएनएल चुका न सकी. पिछले साल आईएल एंड एफएस नकदी संकट में घिर गई थी. कंपनी पर 91,000 करोड़ रुपए का क़र्ज़ हो गया था. कंपनी डूबने की नौबत आई थी और सरकार को मामले में दखल देना पड़ा था.

फिर ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने लगा. उन्होंने पिछले हफ्ते मुंबई की विशेष अदालत में पहली चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी. जिसके मुताबिक़ आईएल एंड एफएस के अधिकारियों ने कई निजी कंपनियों को डिफॉल्ट के बावजूद कर्ज दिए थे. ऐसी ही एक कंपनी है कोहिनूर सीटीएनएल. जिससे जुड़े थे राज ठाकरे. जिन्हें पूछताछ का बुलावा आ गया.

उन्मेश जोशी.
उन्मेश जोशी.

प्रतिक्रिया

ज़ाहिर सी बात है राज ठाकरे के समर्थकों में इसकी उग्र प्रतिक्रिया हुई है. उनके समर्थक विरोध में चक्का जाम करने के मूड में हैं. 22 अगस्त को ठाणे बंद का ऐलान किया गया है. नाशिक में भी राज समर्थकों ने पूरे शहर में पोस्टर लगाए हैं. जिसमें लिखा गया है कि ये कार्रवाई कोहिनूर टॉवर पर नहीं, कोहिनूर हीरे पर की गई है.

राज ठाकरे का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वो 2008 में ही प्रोजेक्ट से अलग हो चुके हैं, तो फिर क्यों उन्हें खामखा परेशान किया जा रहा है? उधर राज ठाकरे की पत्नी शर्मिला ठाकरे ने कहा है कि सरकार को उनसे बहुत प्रेम है और उन्हें ऐसे प्रेमपत्र मिलते रहा करते हैं.


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