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इस मेड इन इंडिया ऐप पर विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग करके इंडियंस भी कहेंगे- ज़ूम बराबर ज़ूम

मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी ने इस साल अप्रैल में एक कॉम्पटिशन चालू किया था. एक बढ़िया-सा वर्ल्ड क्लास विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग सोल्यूशन बनाने का. इनाम रखा 1 करोड़ रुपए का. वीकंसोल (Vconsol) नाम के विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग प्लैटफ़ॉर्म ने इस कॉम्पटिशन को जीत लिया है. और इसको बनाया है केरल के अलप्पुझा में बसी टेक कम्पनी टेकजेंसिया (Techgentsia) ने.

सरकार ने टेकजेंसिया को ऐप्लिकेशन के रख-रखाव के लिए 10 लाख रुपए अलग से भी दिए हैं. सरकार इसे ख़ुद इस्तेमाल में लाएगी और इसके लिए कम्पनी के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट भी करेगी. मतलब कि चांदी ही चांदी.

1 करोड़ वाले कॉम्पटिशन की पूरी कहानी

कॉम्पटिशन की कहानी सुनाने के पहले आपको ज़रा चलना होगा साल 2020 के शुरू में. तब, जब कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को नानी का घर समझकर हल्ला मचाना शुरू किया था. उधर कोरोना ने दस्तक दी और इधर इंसानों ने घर के दरवाजे बंद करके चिटकनी लगा ली और विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग ऐप्स की शरण में आ गए. सारे के सारे तो नहीं, मगर बहुत सारे तो फिर भी आ गए.

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स्काइप-विस्काइप को साइड करके विडियो कॉलिंग के लिए ज़ूम हर तरफ़ छा गया. स्कूलों की पढ़ाई इसी पर होने लगी. इंडियन गवर्नमेंट भी अपनी मीटिंग वग़ैरह के लिए इसका ही इस्तेमाल करने लगी. मगर इसके साथ ही चालू हुए ज़ूम से जुड़े प्राइवेसी और सिक्योरिटी के टंटे. अलग-अलग टाइप की बातें सामने आयीं, जिसमें ज़ूम बॉम्बिंग की सरदर्दी सबसे ख़तरनाक रही.

अब आप सोच रहे होंगे कि ये ज़ूम बॉम्बिंग क्या है? कोई विडियो कॉल पर बम-वम मार देता है क्या? अरे नहीं. जैसे फ़ोटो बॉम्बिंग होती है ना, जिसमें आप कोई फ़ोटो खींच रहे हों और कोई दूसरा आकर उसमें कूद पड़े. ठीक वैसे ही ज़ूम बॉम्बिंग होती है, जहां किसी विडियो मीटिंग में कोई तीसरा ऐसे ही मुंह उठाकर चला आए. कुछ ने तो ज़ूम बॉम्बिंग करते हुए अश्लीलता की हद ही पार कर दी. कई ऐसे भी मामले आए, जिनमें स्कूल की क्लास के बीच ही अश्लील फिल्में चलने लगीं.

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फ़ोटो बॉम्बिंग यानी किसी की फोटो में तीसरा अचानक कूद पड़े. (फ़ोटो: Yarr)

बवाल मचा तो सरकार ने लॉन्च किया कॉम्पटिशन

मामला गरमाया तो ये सवाल भी उठा कि टेक्नॉलजी की दुनिया का महारथी होने के बावजूद भारत के पास अपना एक ढंग का विडियो कॉलिंग ऐप तक नहीं है. इसके बाद गवर्नमेंट ने कहा कि रुको यार, विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग के लिए अब अपने को ख़ुद का मेड इन इंडिया प्लैटफ़ॉर्म मांगता है. फिर सरकार ने चालू किया “इनोवेटिव चैलेंज फ़ॉर डेवेलपमेंट ऑफ़ विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग सोल्यूशन”. आसान शब्दों में कहें तो विडियो कॉन्फ़्रेन्स के लिए ऐप या सॉफ्टवेयर विकसित करने का एक चैलेंज. इसमें जीतने वाले को मिलने थे  1 करोड़ रुपए.

1,983 ऐप्लिकेशन में से हुआ सलेक्शन

सरकार ने बताया है कि इस कॉम्पिटीशन में कुल 1,983 ऐप्लिकेशन आयीं थी. इनमें से 12 को शॉर्टलिस्ट किया गया. इन्हें अपने प्रोटोटाइप ऐप पर काम करने या अपने प्लैटफ़ॉर्म को बेहतर बनाने के लिए 10-10 लाख रुपए भी दिए गए. फिर अगले राउंड में 5 ऐप्स को शॉर्टलिस्ट किया गया. इन्हें टेस्टिंग वग़ैरह के लिए फिर से पैसा दिया गया. टॉप-3 को 20-20 लाख रुपए मिले. बाकी दो को 15-15 लाख रुपए. अब फाइनली 1 करोड़ के इनाम के लिए टेकजेंसिया के वीकंसोल ऐप को चुना गया है.

जॉय सेबैसचियन की टेकजेंसिया

जॉय सेबैसचियन ने 2009 में अपने दोस्त टोनी थॉमस के साथ मिलकर टेकजेंसिया की शुरुआत की थी. इससे पहले के 8 साल इन्होंने अलग-अलग जगह पर टेक्निकल फ़ील्ड में काम किया. इंडियन एक्स्प्रेस को दिए हुए एक इंटर्व्यू में सेबैसचियन बताते हैं कि इनकी कम्पनी ने शुरुआत से ही रीसर्च एंड डेवलपमेंट के साथ विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग सोल्यूशन पर काम किया है. इस वक़्त कम्पनी के पास 65 एम्प्लॉई हैं.

वीकंसोल के बारे में सेबैसचियन बताते हैं कि इसको इन्होंने 3 महीने में तय्यार किया है. इनका कहना है कि इसमें ज़ूम के प्रीमीयम प्लान वाले सारे फ़ीचर तो हैं ही मगर इसकी ख़ास बात इसकी सिक्योरिटी है.

इन तीन कंपनियों को भी मौका

वीकंसोल के साथ ही सरकार को तीन और प्लैटफ़ॉर्म भी पसंद आए. इनको मिला 25-25 लाख का डेवेलपमेंट कॉन्ट्रैक्ट. ऐसा इसलिए ताकि ये अपने प्रोडक्ट को अगले तीन महीने में बेहतर कर सकें. ये तीन कम्पनियां और इनके प्रोडक्ट हैं—

*जयपुर की सार्व वेब्स (Sarv Webs Pvt Ltd) और इसका सार्व वेव (Sarv Wave) ऐप.

*हैदराबाद की पीपल लिंक यूनीफ़ाइड कम्यूनिकेशंस (PeopleLink Unified Communications Pvt Ltd) और इसका इंस्टा वीसी (Insta VC) ऐप.

*चेन्नई की इंस्ट्राइव सॉफ़्टलैब्स (Instrive Softlabs Pvt Ltd). इसने बनाया है, हाइड्रा मीट (HydraMeet) ऐप.

 

वीकंसोल और बाक़ी के तीन विडियो कॉन्फ़्रेन्सिंग ऐप्स को पैसे के साथ-साथ सरकार की STQC, CERT-In, CDAC, और NIC जैसी एजेंसियों का भी सपोर्ट मिलेगा. उम्मीद है कि ये चारों के चारों प्लैटफ़ॉर्म NIC क्लाउड पर होस्ट किए जाएंगे. सरकारी काम में इनका इस्तेमाल बढ़वाने के लिए सरकार इनको अपने ई-मार्केटप्लेस GeM पर ऑनबोर्ड करेगी.


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