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कठुआ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों का दिमाग ठिकाने लगा दिया है

कठुआ गैंगरेप और मर्डर केस के आरोपियों के समर्थन में जिन वकीलों ने गुंडागर्दी की थी, वो शायद अब नपेंगे. सुप्रीम कोर्ट उनके साथ नरमी बरतने के मूड में नहीं दिख रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है. BCI को जम्मू-कश्मीर के उन सभी वकीलों पर रिपोर्ट भेजनी है, जिन्होंने पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने से रोका था. सुप्रीम कोर्ट की एक तीन-सदस्यों की बेंच ने कहा कि अदालत इस केस की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करना चाहती है. इस बेंच में भारत के चीफ जस्टिस (CJI) दीपक मिश्रा भी शामिल थे.

CJI ने कहा-

बार काउंसिल के सदस्यों में अनुशासन तो होना ही चाहिए. चार्जशीट फाइल करने में बाधा पहुंचाई गई है. पुलिस को उसका काम करने से रोका गया है. बार असोसिएशन (जम्मू-कश्मीर) को चार्जशीट पेश किए जाने से क्या लेना-देना? वकीलों से उम्मीद की जाती है कि वो अपने केस में दलील देंगे, न कि इस तरह विरोध करेंगे. वकीलों को पूरे सम्मान और आजादी के साथ वकालत की प्रैक्टिस करने का अधिकार है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आप हड़ताल पर चले जाएं. या कि लोगों को अदालत में आने से रोकें.

कठुआ केस का एक आरोपी सांजी राम.
कठुआ केस का मुख्य आरोपी सांजी राम. कई स्थानीय हिंदुओं की सहानुभूति इसके साथ है. इस आदमी का कहना है कि ये पूरा मामला कोई बड़ी साजिश है, जिसमें इसे फंसाया जा रहा है. आरोपी मांग कर रहे हैं कि इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी जाए.

कठुआ के वकीलों ने इस केस को कम्युनल बना दिया था
जम्मू-कश्मीर के वकीलों, खासतौर पर कठुआ बार काउंसिल के वकीलों ने इस केस को सांप्रदायिक बना दिया था. वो खुलकर आरोपियों का समर्थन कर रहे थे. पुलिस जब चार्जशीट दाखिल करने जाती, तो ये हंगामा करने लगते. पीड़ित परिवार की वकील दीपिका सिंह राजावत को भी ये कोर्ट नहीं आने दे रहे थे. यहां तक कि इन लोगों ने आरोपियों के समर्थन में एक बंद भी बुलाया था. बाद में वो बंद वापस ले लिया गया. चीजें तब पटरी पर आईं, जब 13 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों ने अदालत का ध्यान इन घटनाओं की ओर दिलाया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सख्ती दिखाई. तब जाकर चीजें नॉर्मल हुईं.

इतने संवेदनशील मामले को अपने राजनैतिक विरोध के लिए भुनाना टुच्चई है.
पीड़ित परिवार ने इस केस को चंडीगढ़ शिफ्ट करने की मांग की है. उनका कहना है कि जम्मू के बिगड़े माहौल और ध्रुवीकरण को देखकर लगता नहीं कि इस केस की निष्पक्ष सुनवाई की जा सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कड़ाई दिखाई, तो इन वकीलों का अंदाज बदल गया
उधर कठुआ बार असोसिएशन के वकीलों का कहना है कि उन्होंने पुलिस के काम में किसी तरह का अड़ंगा नहीं लगाया. उनका दावा है कि मीडिया ने चीजों को गलत तरीके से पेश किया. वैसे आपको एक बात बताएं. मीडिया को कोस देना सबसे आसान काम है. इसमें कोई पैसा नहीं लगता. ये वकील जरा बताएं कि केस की जांच कर रही पुलिस ने उनके खिलाफ क्यों FIR दर्ज की है? पुलिस भी चीजों को गलत तरीके से पेश कर रही है क्या? जम्मू हाई कोर्ट बार असोसिएशन (JHCBA)भी सुप्रीम कोर्ट के सामने खुद को मासूम बता रहा है. उसका कहना है कि कठुआ के वकीलों द्वारा किए जा रहे विरोध का समर्थन नहीं कर रहे थे वो. बल्कि उन्होंने किसी और वजह से कठुआ के वकीलों का साथ दिया था. इन वकीलों का ये भी दावा है कि पीड़ित परिवार की वकील दीपिका सिंह राजावत को किसी और केस में पेश होने से रोका गया था. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने JHCBA और BCI, दोनों को 24 अप्रैल तक हलफनामा जमा करने को कहा है. अब इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई होगी.

केस चंडीगढ़ शिफ्ट हो जाएगा? 
पीड़ित परिवार ने कोर्ट से कहा है कि इस मामले की सुनवाई चंडीगढ़ शिफ्ट कर दी जाए. उनका कहना है कि जम्मू के हालात देखकर नहीं लगता कि वहां निष्पक्ष सुनवाई हो पाएगी. कोर्ट ने पीड़ित परिवार को पुलिस सुरक्षा दिलवाई है. साथ में राज्य सरकार से पूछा है कि केस शिफ्ट किए जाने वाली बात पर उनका क्या कहना है.


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