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गोरखपुर हादसा : यूपी सरकार ने जांच में कफ़ील खान को क्लीन चिट दे दी

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यूपी सरकार द्वारा जांच कमेटी ने दो साल पहले गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में कफेल अहमद खान को आरोपों से बरी कर दिया है.

जांच कमिटी की 15 पेज की रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र किया गया है कि कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन के रख-रखाव, भुगतान, आर्डर, सप्लाई और प्रबंध में कफील अहमद खान की कोई भूमिका नहीं थी.

साल 2017. अगस्त महीने में गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में कईनवजात बच्चों की एक साथ मौत हुई थी. मौत का कारण पता चला था कि अस्पताल में ऑक्सीजन ख़त्म हो गया था. और समय पर ऑक्सीजन न मिलने से इन बच्चों की मौत हो गयी. यूपी सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऑक्सीजन का बकाया बिल नहीं चुकाया गया था. इस वजह से ऑक्सीजन का बिल नहीं चुकाया जा सका था.

इस मामले में शुरुआत से ही मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर कफील अहमद खान की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं. डॉक्टर खान ने कहा था कि उन्होंने बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलिंडरों का इंतजाम किया था. कई जगहों पर संपर्क किया था ऑक्सीजन का इंतजाम करने के लिए. लेकिन मामले की जांच की शुरुआत में ही यूपी सरकार द्वारा गठित जांच एजेंसी ने आरोप लगाए थे कि कफील अहमद खान की भूमिका संदिग्ध हैं. उन पर वित्तीय अनियमितता, अनदेखी और भ्रष्टाचार के तहत जांच बिठाई गयी. 22 अगस्त 2017 को सस्पेंड हो गए.

अब जांच रिपोर्ट सामने है. इसमें रिपोर्ट में ये लिखा गया है कि कफील खान इस घटना के समय छुट्टी पर थे. लेकिन छुट्टी पर होने के बावजूद कफील खान ने इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को सम्हालने के लिए सभी संभव प्रयास किये.

रिपोर्ट में डॉक्टर कफील के दावों का समर्थन है कि उन्होंने अपने स्तर पर वार्ड का प्रबंधन किया और जम्बो ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की, जो लिक्विड ऑक्सीजन की अचानक आपूर्ति न होने के कारण उत्पन्न हुई थी.

कफील खान पर चिकित्सा लापरवाही के भी आरोप लगे थे. इस बारे में जांच कमेटी की रिपोर्ट ने कहा है कि इस बाबत कोई सबूत नहीं पाया गया. कफील खान पर लगे ये आरोप कि ऑक्सीजन की खरीददारी का जिम्मा उनका था, इस पर भी ये सफाई आई है कि वो ऑक्सीजन टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थे.

इस रिपोर्ट पर जांच अधिकारी स्टाम्प एवं निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार के हस्ताक्षर हैं.

इस बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए कफील खान ने कहा,

“इस पूरे मामले की कायदे से जांच होनी चाहिए. इस मामले के असली अपराधी वो लोग हैं, जिन्होंने समय पर ऑक्सीजन का पेमेंट नहीं किया. जिन परिवारों के बच्चे मारे गए, उनके घर वाले अभी भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं.”

इसी मामले में कफील खान 9 महीने जेल में रह चुके हैं. और मेडिकल कॉलेज से सस्पेंड कर दिए गए थे. जब ये मामला सामने आया था तो यूपी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बयान दिया था कि अगस्त में बच्चे मरते ही हैं.


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