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नारेबाज़ी करते छात्रों को पीटने, अस्पताल भेजने के बाद पुलिस ने उनपर ये धाराएं लगाईं

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केंद्र सरकार का एक मंत्रालय है मानव संसाधन विकास मंत्रालय. वो हर साल एक लिस्ट जारी करता है. देश के सबसे बेहतरीन शिक्षण संस्थानों की. JNU यानी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी,  इस लिस्ट में लगातार दो साल से दूसरे नंबर पर बनी हुई है.  लेकिन, उसी केंद्र सरकार के पास एक पुलिस फ़ोर्स भी है, जो यहां के छात्रों पर लाठी-डंडे का पूरा ज़ोर लगा रही है. क्यों? क्योंकि ये छात्र कई गुना बढ़ा दी गई फीस का विरोध कर रहे हैं. अपने लिए सस्ती शिक्षा मांग रहे हैं.

यानी पुलिस और जेएनयू के छात्र आमने-सामने हैं. दूसरी तरफ, जेएनयू प्रशासन दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है. छात्रों और पुलिस दोनों के खिलाफ. अपनी शिकायत में JNU ने 9 अगस्त, 2017 के एक आदेश का ज़िक्र किया है. आदेश के मुताबिक, प्रशासनिक भवन के 100 मीटर के दायरे में किसी तरह का प्रोटेस्ट नहीं किया जा सकता है. जेएनयू ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वो प्रशासनिक भवन के पास जमी भीड़ को हटाने में नाकाम रही.

लाठी चलाने के बाद क्या कह रही है पुलिस?

इस मामले में पुलिस ने दो FIR दर्ज की है. छात्रों के खिलाफ. पहली FIR नई दिल्ली के किशनगढ़ थाने में दर्ज हुई है. इस FIR में अयोध्या भूमि विवाद के फैसले को आधार बनाया गया है. 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के इस मामले पर फैसला दिया था. इसके मद्देनजर पुलिस ने धारा 144 लगाई थी. जेएनयू के तीन गेट पर बैरिकेडिंग की गई थी.

Jnu Barricade
जेएनयू मामले में पुलिस ने छात्रों के खिलाफ 2 एफआईआर दर्ज की हैं.

FIR के मुताबिक, 144 के वाबजूद जेएनयू के साबरमती ढाबे पर छात्र इकट्ठा होने लगे. 11 बजे तक करीब दो हजार छात्र वहां जुट गए. यहां से नारेबाजी करते हुए स्टूडेंट्स नॉर्थ गेट की तरफ बढ़े. छात्रों को बार-बार ताकीद की गई कि धारा 144 लगी है, इसलिए आप यूनिवर्सिटी के बाहर प्रदर्शन नहीं कर सकते. चेतावनी के बावजूद उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ी और पुलिसवालों से मारपीट भी की. इस दौरान लगभग 50 छात्रों को गिरफ्तार किया गया.

दूसरी FIR लोधी कॉलोनी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है. इसके अनुसार, 18 नवंबर को छात्र दोपहर 2 बजे अरबिन्दो मार्ग पहुंचे. यहां से संसद की तरफ मार्च शुरू किया. उन्होंने पुलिस के साथ मारपीट की, पुलिस की गाड़ियों के शीशे तोड़े. कुछ छात्रों ने महिला अधिकारियों के साथ भी बुरा सुलूक किया. रोड ब्लॉक करने की वजह से कई इमरजेंसी गाड़ियां भी घंटों जाम में फंसी रहीं.

किन धाराओं में दर्ज है केस-

धारा 186 – सरकारी कार्य में लगे सरकारी कर्मचारी को काम करने से रोकना.
धारा 353 – सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी करने से रोकने के लिए बल का प्रयोग करना.
धारा 188 – सरकारी कर्मचारी के आदेश का पालन न करना.

इसके अलावा छात्रों पर दंगा करने, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने और पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है.

इस मसले पर स्टूडेंट्स का क्या पक्ष है?

प्रोटेस्ट और लाठीचार्ज के बाद 19 नवंबर को जेएनयू छात्रसंघ ने मीडिया से बात की. जेएनयू के प्रशासनिक भवन में. छात्रसंघ की अध्यक्ष आईषी घोष ने कहा कि पुलिस ने पहले स्ट्रीट लाईट बंद की और उसके बाद छात्रों को पीटा.

Jnu Students Press Conference
19 नवंबर को जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन ने प्रशासनिक भवन पर मीडिया से बात की.

कई और छात्रों ने पुलिसिया दमन का अनुभव बताया. शशिभूषण समद दृष्टिहीन छात्र हैं. वो बार-बार पुलिस को बताते रहे कि वो देख नहीं सकते. इसके बावजूद पुलिस उनके सीने पर बूट से मारती रही. शशिभूषण को AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराना पड़ा. कई छात्राओं ने पुलिस के दुर्व्यवहार के बारे में भी बताया.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी पुलिस के लाठीचार्ज का विरोध किया है. हालांकि,  ABVP ने प्रोटेस्ट के तरीके पर आपत्ति जताई है.

हालांकि, ये बेहद विकट स्थिति है. किसानों, मध्यमवर्गों का देश कहा जाने वाले भारत में छात्रों को सस्ती शिक्षा मांगनी पड़ रही है. राइट टू एजुकेशन का झंडा बुलंद करने वाले देश में छात्रों को लाठी-डंडों से पीटा जा रहा है. क्योंकि वो सस्ती एजुकेशन के अपने अधिकार के लिए सड़क पर उतरे हैं.


वीडियो : फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे JNU के छात्रों का दिल्ली पुलिस पर जबरन पिटाई करने का आरोप

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