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5 जनवरी की रात तीन बजे तक JNU कैम्पस में क्या-क्या हुआ?

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5 जनवरी, 2020. शाम होते-होते सोशल मीडिया पर JNU ट्रेंड करने लगा था. वजह थी कैंपस में हुई हिंसा. जेएनयू कैंपस से कई सारे वीडियो और फोटो बाहर आ रहे थे. इनमें लाठी डंडे से लैस कुछ नकाबपोश लोग पूरे कैंपस में घूम-घूमकर तोड़-फोड़ और मारपीट कर रहे थे. जैसे ही ये विजुअल बाहर आए लोग JNU कैंपस के बाहर जुटने लगे. जेएनयू के नॉर्थ गेट पर भारी संख्या में पुलिस मौजूद थी. भारी संख्या में स्टूडेंट्स, एल्युमनाई और मीडिया मौजूद थी. जेएनयू का गेट बंद कर दिया गया था और किसी को अंदर या बाहर नहीं आने-जाने दिया जा रहा था. मेन गेट के सामने की रोड पर सारी लाइट्स बंद थी.

जेएनयू का बंद गेट और बाहर तैनात पुलिस
जेएनयू का बंद गेट और बाहर तैनात पुलिस

गेट के बाहर मौजूद स्टूडेंट्स की भीड़ दिल्ली पुलिस जिंदाबाद, भारत माता की जय के नारे लगा रही थी. दी लल्लनटॉप की से बात करते हुए इन स्टूडेंट्स ने खुद के एबीवीपी से जुड़े होने की बात कही. तभी गेट से थोड़ी दूर अचानक से तेज शोर हुआ. ‘देश द्रोही गो बैक’, ‘नक्सलवादी गो बैक’ की आवाज़ आने लगी. हम उस तरफ बढ़े तो वहां भीड़ के बीच फंसे स्वराज इंडिया पार्टी के नेता योगेंद्र यादव दिखाई दिए. गेट के सामने नारेबाजी कर रही भीड़ उनकी तरफ पलटी और उन्हें पीछे की ओर धकेलने लगी. थोड़ी देर पहले तक माता..माता भारत माता के नारे लगा रहे लोगों के मुंह पर अब मां-बहन की गालियां आ चुकी थीं. ‘देश के गद्दारों को जूता मारों सा** को’ और ‘मार सा** को’ की आवाजें गूंज रही थीं. भीड़ योगेंद्र यादव और उनके साथियों पर झपट पड़ी. और उनके साथ मारपीट करते हुए लगभग 100 मीटर तक घसीट ले गई. योगेंद्र और उनके साथी बचने के लिए राष्ट्रगान गाने लगे. लेकिन हमलावरों की गाली-गलौज के आगे जन गण मन की आवाज़ दब गई. हमलावरों ने वहां मौजूद मीडिया वालों को भी नहीं बख्शा और उन पर भी लात घूंसों से हमला कर दिया.

योगेंद्र ने फेसबुक पोस्ट कर अपने ऊपर हुए हमले के बारे में बताया
योगेंद्र ने फेसबुक पोस्ट कर अपने ऊपर हुए हमले के बारे में बताया

इतना सब होने तक मूक बनी रही पुलिस अचानक हरकत में आई. सारे स्ट्रीट लाइट जल गए. और हमलावरों की पूरी भीड़ अचानक से गायब हो गई. योगेंद्र और उनके साथियों ने हमलावरों की ओर इशारा करके उन्हें पकड़ने की बात कही हैं लेकिन दिल्ली की पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया. और हमलावर बच निकले.

जेएनयू के छात्र रहे योगेंद्र यादव पर हुआ ये हमला न तो पहला था और न ही आखिरी. योगेंद्र यादव ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि 5 जनवरी को उन पर तीन बार हमला हुआ. उन्होंने लिखा,

पहली बार रात 9.30 बजे के लगभग.
मैं कैंपस में टीचर्स से बात कर रहा था. एक पुलिस इंस्पेक्टर ने मुझे घसीटा. उसने नेमप्लेट नहीं लगाया था. इसके बाद एबीवीपी और आरएसएस के लोगों ने मुझे धक्का दिया और मेरा मफलर खींच लिया. इन लोगों के साथ संस्कृत डिपार्टमेंट के प्रोफेसर मिश्रा भी मौजूद थे. मैं नीचे गिर गया, मुझे हल्की चोट भी आई. मैं किसी तरह उठा लेकिन पुलिस ने धकेलना जारी रखा.

दूसरी बार 10.50 पर
मैं डी राजा के साथ था. जब 20-30 गुंडों ने मुझ पर हमला किया. गाली-गलौज और मारपीट की. इसके बावजूद कि हम राष्ट्रगान गा रहे थे. मैं डिवाइडर पर पीठ के बल गिर गया. हल्की चोट आई. मेरे चेहरे पर मुक्का मारा गया. पुलिस खड़ी होकर देख रही थी. थोड़ी देर बाद डीसीपी आए.

तीसरी बार 12.30 बजे
हम मेडिकल कराने एम्स के ट्रामा सेंटर आए थे. इमरजेंसी वार्ड के बाहर इंस्पेक्टर शिव राज ने मेरे साथी राजा और मेरे ड्राइवर को पीटा. और मुझे धक्का दिया. ये जानते हुए भी कि मैं मरीज हूं. और ये सब एडिशनल डीसीपी परविंदर सिंह की मौजूदगी में हुआ.

गेट के सामने भारत माता की जय के नारे लगाता शख्स जो योगेंद्र यादव पर हमला करने वालों में भी शामिल था.
गेट के सामने भारत माता की जय के नारे लगाता शख्स जो योगेंद्र यादव पर हमला करने वालों में भी शामिल था.

दिल्ली पुलिस ने बनाई जांच टीम

रात के करीब तीन बजे तक कैंपस का माहौल थोड़ा शांत हुआ. जेएनयूएसयू और लेफ्ट के छात्र संगठनों ने नॉर्थ गेट से लेकर साबरमती हॉस्टल तक मार्च निकाला. जेएनयूएसयू ने हिंसा के लिए एबीवीपी को जिम्मेदार बताया तो एबीवीपी ने जेएनयूएसयू और लेफ्ट को. हिंसा के बाद से छात्र सहमे हुए हैं. कैंपस में तनाव का माहौल है. गेट के बाहर भारी संख्या में पुलिस को तैनात किया गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेएनयू में हिंसा की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा,

जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. आज एचआरडी सचिव ने जेएनयू के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है. हम शैक्षिक संस्थान को राजनीति का अड्डा नहीं बनने देंगे. दोषियों को दंडित किया जाएगा. 

हमलावर भीड़ से योगेंद्र यादव को अलग करती पुलिस
हमलावर भीड़ से योगेंद्र यादव को अलग करती पुलिस

उधर गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है. दिल्ली पुलिस ने ज्वाइंट सीपी शालिनी सिंह की अगुवाई में 2 ACP, और 4 इंस्पेक्टर की जांच टीम गठित कर दी है. डीसीपी साउथ वेस्ट, दिल्ली पुलिस देवेंद्र आर्या ने बताया कि जेएनयू में 5 जनवरी को हुई हिंसा को लेकर एक एफआईआर दर्ज कर लिया गया है. सोशल मीडिया और सीसीटीवी फुटेज भी जांच का हिस्सा हैं. लेकिन ये सवाल अब तक बना हुआ है कि जब गेट के बाहर लोगों से मारपीट की जा रही थी तो पुलिस मूकदर्शक क्यों बनी हुई थी? योगेंद्र यादव और उनके साथियों के बताने के बावजूद हमलावरों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?


वीडियो: JNU हिंसा: गेट पर दिल्ली पुलिस के सामने योगेंद्र यादव को पीटे जाने की पूरी कहानी

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