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JNU : जिस समय आइशी घोष को पीटा जा रहा था, उसी वक़्त उन पर FIR हो रही थी

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जेएनयू की हिंसा. कहा जा रहा है कि बाहरी गुंडों ने हिंसा की. हमलावर अपनी पहचान छिपाकर हमला करने आए थे. चेहरा ढंककर छात्रों की, प्रोफेसरों की पिटाई की. मीडियाकर्मी और नेता भी मारे गए. और पुलिस पर कुछ न करने का आरोप है. अब इस घटना के बाद जेएनयू प्रशासन ने एक ही रट लगा रखी है. उन्होंने कहा है कि अक्टूबर के महीने में कुछ छात्र फीस वृद्धि का विरोध कर रहे थे. वही छात्र जेएनयू में हिंसा के लिए ज़िम्मेदार थे.

इस घटना में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्षा आइशी घोष भी पिटाई का शिकार हुईं. घायल हुईं. उनकी खून बहाती फोटो वायरल हुई. फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण जेएनयू पहुंची तो आइशी घोष से भी मिलीं. और 5 जनवरी रविवार की रात जब जेएनयू में हिंसा हो रही थी, उसी दौरान 4 मिनट के अंतर पर दो FIR दर्ज हुई. दोनों ही FIR में आइशी घोष को नामज़द किया गया.

Aishe Ghosh
बाएं से दाएं: JNUSU प्रेसिडेंट आइशी घोष. हमला करते नकाबधारी लोग.

पहली FIR दायर की गयी रात 8:39 मिनट पर. इस FIR में आइशी घोष और सात अन्य लोगों को नामज़द किया गया. इस FIR में कहा गया है कि 1 जवनरी को कुछ नक़ाबपोश लोग एडमिन ब्लॉक के पास मौजूद Center for Information system (CIS) में घुस गए. उन्होंने सभी टेक्नीकल स्टाफ को बाहर निकाल दिया, बिजली की सप्लाई बंद कर दी, और सर्वरों को ऐसा कर दिया कि उनसे काम नहीं लिया जा सके. उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी निभाने से रोका. ये भी आरोप है कि नक़ाबपोश छात्रों ने सर्वर रूम में मौजूद कर्मचारियों को डराया, गालियां दी और धमकी देकर बाहर निकाल दिया. उन्होंने कमरा बंद कर दिया और कर्मचारियों को दोबारा कमरे में घुसने नहीं दिया. इसके बाद जेएनयू के चीफ सिक्योरिटी अफसर ने कम्प्लेन की, जिसके बाद FIR दर्ज की गयी.

दूसरी FIR 4 मिनट बाद यानी रात 8:43 मिनट पर दर्ज की गयी. इसमें आइशी घोष के अलावा 19 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. इसमें कहा गया 3 और 4 जनवरी की रात CIS को बंद कर दिया गया, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बाधा पहुंची. जेएनयू के सुरक्षाकर्मियों की मदद से 4 जवनरी की सुबह 6 बजे CIS को खोलने की कोशिश की गयी. इस FIR में आइशी घोष और अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को धमकाया, महिला गार्डों को धक्का दिया, गाली दी, शारीरिक रूप से हिंसा की, और धमकी दी कि अगर गेट खोला तो बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. कुछ गार्डों को पीटा भी गया.

आगे कहा गया है कि कुछ मशक्क़त के बाद CIS के कर्मचारी बिल्डिंग में दाखिल तो हो गए, लेकिन दोपहर एक बजे छात्रों का एक बड़ा समूह पिछले रास्ते से बिल्डिंग में दाखिल हो गया. शीशे का बना दरवाजा तोड़ दिया. ऑप्टिकल फाइबर तोड़ दिए. पॉवर सप्लाई और बायोमेट्रिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाया.

जेएनयू में छात्रों के बीच दीपिका पादुकोण

ध्यान दें कि FIR दाखिल होने का ये वही समय था, जिस समय JNU के भीतर और गेट पर हिंसा हो रही थी. आइशी घोष के अलावा छात्रसंघ के सदस्य साकेत मून और सतीश यादव का भी नाम शामिल है. इन लोगों पर जानबूझकर चोट पहुंचाने, धमकी देने और गलत तरीके से बंधक बनाने की धाराएं लगाईं गयी हैं. इन आरोपों पर छात्रसंघ अध्यक्षा आइशी घोष ने Indian Express से कहा,

“मैंने कोई तार नहीं काटे. न ही गार्डों पर कोई हमला ही किया. मैं 4 तारीख की रात को वहां पहुंची, जब मुझे एक स्टूडेंट ने जानकारी दी. मुझे FIR के बारे में ज़्यादा नहीं पता.”

पुलिस का कहना है कि विश्वविद्यालय ने 3 और 4 जनवरी को दो शिकायतें दिल्ली पुलिस के पास दर्ज की थीं. साउथ वेस्ट दिल्ली के डीसीपी देवेन्द्र आर्य ने कहा,

“FIR दर्ज करने में कोई देर नहीं की गयी. 3 और 4 जनवरी को शिकायत मिलने के बाद हमने सभी तथ्यों की पड़ताल की. इसके बाद वसंत कुंज नार्थ पुलिस स्टेशन में हमने FIR दर्ज की.”

लेकिन ये भी तथ्य है कि 5 जनवरी की रात जेएनयू में छात्रों पर हमले हुए. इसको लेकर भी FIR दर्ज की गयी है. आइशी घोष समेत 36 लोग घायल हुए. लेकिन पुलिस ने इस मामले में किसी संदिग्ध की शिनाख्त नहीं की है, न ही किसी की गिरफ्तारी ही हुई है. ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई कर रही है.

जेएनयू में हमले के बाद अगले दिन यानी 6 जनवरी को बड़ा आन्दोलन हुआ. ये तस्वीर वहीं से.

इस मामले में JNU प्रशासन का भी रुख बेहद सवालों से भरा हुआ है. प्रशासन ने आरोप लगाया कि उन छात्रों ने विंटर सेशन की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का विरोध किया. इसके लिए छात्रों ने JNU के CIS में घुसकर बिजली और सर्वर बंद कर दिया. कहते हैं इस वजह से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बाधा पहुंची. मानव संसाधन और विकास मंत्रालय को अपनी ओर से जांच रिपोर्ट भी भेजी. इस रिपोर्ट में ये तो कहा कि जेएनयू प्रशासन ने पेरियार हॉस्टल में लोगों ने घुसकर मारपीट की. लेकिन साबरमती हॉस्टल का ज़िक्र नहीं किया, जहां से सबसे अधिक हिंसा की खबरें आई थीं.

कई लोगों ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया है कि वे CIS में मौजूद थे, लेकिन उन्होंने किसी भी तरीके की हिंसा में शामिल होने से इंकार किया. और कुछ लोगों ने इस बात से भी इंकार कर दिया वे CIS पर मौजूद थे. JNU स्टूडेंट यूनियन की पूर्व अध्यक्षा गीता कुमारी ने भी कहा था कि 4 जनवरी की सुबह वे CIS के गेट पर बैठी हुई थीं, जिस समय जेएनयू के सुरक्षाकर्मियों ने उन पर अटैक किया.


लल्लनटॉप वीडियो : JNU छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कैंपस में हुई हिंसा पर ताल ठोककर कही ये बात

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