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सरकार ने अलगाववादी नेता रहे गिलानी के पोते को सरकारी नौकरी से क्यों निकाल दिया?

जम्मू कश्मीर में सरकार ने 17 अक्टूबर को एक आदेश जारी कर अनीस-उल-इस्लाम को  सरकारी नौकरी से हटा दिया. अनीस कश्मीर के अलगाववादी नेता रहे सैयद अली शाह गिलानी के पोते हैं. अनीस शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में रिसर्च ऑफ़िसर के तौर पर काम कर रहे थे. उनको संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (C) का इस्तेमाल कर उनकी सेवाओं से मुक्त किया गया है. ये अनुच्छेद सरकार को शक्ति देता है कि राष्ट्रपति या राज्यपाल की अनुमति से वो किसी सरकारी कर्मचारी को बिना कोई जांच कराए उसके पद से मुक्त कर सकती है.

अनीस को हटाने के लिए जारी हुए सरकारी आदेश में लिखा है कि –

“भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (C) का इस्तेमाल करते हुए राज्यपाल इस बात पर संतुष्ट हुए हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मामले में जांच कराने की आवश्यकता नहीं है. इसलिए राज्यपाल ने निर्णय लिया है कि अनीस-उल-इस्लाम की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बर्ख़ास्त किया जाए.”

अनीस के अलावा कश्मीर के एक सरकारी शिक्षक फारुक अहमद भट्ट को भी नौकरी से बर्ख़ास्त कर दिया गया है. उनको भी अनुच्छेद 311 (2) (C) के तहत ही हटाया गया है. फारुक का भाई लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकवादी है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ समय में 26 सरकारी कर्मचारियों को संविधान के इस अनुच्छेद का इस्तेमाल करके नौकरी से हटाया जा चुका है.

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में 11 सरकारी कर्मचारियों को उनके कथित आतंकी संबंधों और आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त करने की खबर आई थी. जिन कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया था उनमें हिजबुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों और दो पुलिस कॉन्स्टेबल शामिल थे. 4 अनंतनाग, 3 बडगाम, एक-एक बारामूला, श्रीनगर, पुलवामा और कुपवाड़ा के थे. 11 कर्मचारियों में 4 शिक्षा विभाग में, 2 जम्मू-कश्मीर पुलिस में और 1-1 कृषि, कौशल विकास, बिजली शेरे कश्मीर अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग में तैनात थे.

बता दें कि अनीस के दादा और कश्मीर के अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का हाल ही में 2 सितंबर को निधन हो गया था. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (जी) के पूर्व अध्यक्ष गिलानी 92 साल के थे. गिलानी की मौत पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दुख जताया था और वहां एक दिन के राष्ट्रीय शोक की भी घोषणा की थी. गिलानी के निधन के बाद अंदेशा था कि कश्मीर में भी हिंसा हो सकती है, लेकिन सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रण में रखा. अनीस इस्लाम के पिता अल्ताफ अहमद शाह भी हुर्रियत नेता हैं. उन्हें भी हाल ही में टेरर फंडिंग के आरोपों में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी NIA ने गिरफ्तार किया था. फिलहाल वो तिहाड़ जेल में हैं.


गिलानी की मौत के बाद कश्मीर में माहौल बिगाड़ने की साजिश कौन कर रहा है?

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