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शादी और त्योहार से जुड़ी झारखंड की 5000 साल पुरानी इस चित्रकला को बड़ी पहचान मिली है

हजारीबाग. झारखंड का एक जिला. यहां की पहचान है सोहराय-खोवर (कोहवर) पेंटिंग. मिट्टी से होने वाली इस पेंटिंग को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग मिल गया है. चेन्नई में मौजूद ज्योग्राफिकल इंडिकेशन रजिस्ट्री ने 12 मई को यह टैग दिया. यह झारखंड राज्य का पहला और देश का 370वां जीआई टैग है. सोहराय-खोवर पेंटिंग हजारीबाग इलाके में मिलने वाली मिट्टी से ही बनाई जाती है. यह पेंटिंग कच्चे घरों को सजाने-संवारने के लिए की जाती थी. लेकिन अब यह पेंटिंग कपड़ों और कागज पर भी की जाती है.

नौ महीने में मिल गया जीआई टैग

इस पेंटिंग को जीआई टैग दिलाने में हजारीबाग के पूर्व डिप्टी कमिश्नर रविशंकर शुक्ल और झारखंड सरकार के सीनियर लीगल कंसल्टेंट डॉ. सत्यदीप सिंह का अहम काम रहा. जीआई टैग के लिए आवेदन सोहराय कला महिला विकास सहयोगी समिति हजारीबाग ने दिया था. डॉ. सिंह ने बताया कि रविशंकर शुक्ल ने जीआई टैग के लिए अभियान शुरू कराया. इसके बाद अगस्त 2019 में जीआई टैग के लिए काम शुरू हुआ. आमतौर पर किसी प्रॉडक्ट को जीआई टैग मिलने में दो-तीन साल लगते हैं. लेकिन सोहराय-खोवर को यह मात्र नौ महीने में ही मिल गया.

सोहराय खोवर कला. दीवार पर जो चित्रकारी नज़र आ रही है, वही सोहराय-खोवर कला है. (Photo: The Lallantop)
सोहराय खोवर कला. दीवार पर जो चित्रकारी नज़र आ रही है, वही सोहराय-खोवर कला है. (Photo: The Lallantop)

क्या है जीआई टैग

यह टैग किसी क्षेत्र या इलाके के ऐसे उत्पादों को दिया जाता है, जिन पर उस इलाके की भौगोलिक स्थिति के चलते विशेष असर पड़ता है. और यह असर उसे बाकी उत्पादों या चीजों से अलग बनाता है. जैसे दार्जिलिंग की चाय. दार्जिलिंग की भौगोलिक स्थिति और वातावरण इसे बाकी चाय से अलग बनाता है. इसी तरह से बीकानेरी भुजिया, बनारसी साड़ी है. इसी कड़ी में अब सोहराय खोवर पेंटिंग का भी नाम जुड़ गया है.

सोहराय-खोवर पेंटिंग क्या खास है

डॉ. सत्यदीप सिंह ने बताया कि सोहराय एक स्थानीय त्योहार होता है, जबकि खोवर नई-नई शादी करने वाले जोड़े के कमरे को कहते हैं. इसमें वह शादी के बाद कुछ समय के लिए रहता है. शादी और नई फसलों के आने के समय घरों पर यह पेंटिंग की जाती थी. एक एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक यह कला ट्रांसफर होती रही. इस कला के सभी कलाकार महिलाएं ही हैं. सोहराय-खोवर पेंटिंग हजारीबाग के इलाके में पाई जाने वाली मिट्टियों से बनाई जाती है. स्थानीय मिटटी के रंगों के हिसाब से सोहराय-खोवर पेंटिंग में सिर्फ चार से पांच रंगों का ही इस्तेमाल होता है. पेंटिंग में पेड़-पौधे, जानवर और धार्मिक निशान ही मुख्य रूप से बनाए जाते हैं.

कोहवर या खोवर?

खोवर के उच्चारण को लेकर भी दिलचस्प कहानी है. बाकी जगहों पर इसे कोहबर कहा जाता है. लेकिन हजारीबाग, जहां से यह कला निकली वहां इसे खोवर कहते हैं. इस बारे में डॉ. सिंह ने कहा कि दरअसल ‘क’ अक्षर इस कला से जुड़े आदिवासी लोगों की भाषा में नहीं है. उनका उच्चारण ‘ख’ से ही होता है. इसलिए इसका नाम खोवर है.

नीचे वीडियो में देख सकते हैं कि ये पेंटिंग कैसे बनाते हैं

कितनी पुरानी है यह पेंटिंग कला

इस आदिवासी कला का 5000 साल पुराना इतिहास है. झारखंड के हजारीबाग जिले के पहाड़ी इलाकों में रॉक गुफा कला के रूप में सोहराय-खोवर कला के प्रमाण मिलते हैं. पहले गुफाओं में इस तरह के चित्र बनाए जाते थे. भारत के मशहूर एंथ्रोपोलोजिस्ट शरत चन्द्र रॉय और ब्रिटिश जमाने मे आसपास के इलाके में काम करने वाले प्रशिद्ध ऑफिसर डब्ल्यूजी आर्चर ने अपने किताबों और लेखों में इस कला का जिक्र किया.

सोहराय खोवर चित्रकारी पहले गुफाओं और फिर दीवारों पर होती थी. लेकिन अब कपड़ों और कागज पर इसके रंग उकेरे जाते हैं. (Photo: The Lallantop)
सोहराय खोवर चित्रकारी पहले गुफाओं और फिर दीवारों पर होती थी. लेकिन अब कपड़ों और कागज पर इसके रंग उकेरे जाते हैं. (Photo: The Lallantop)

यह पेंटिंग हजारीबाग रेलवे स्टेशन पर भी बनाई गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में ‘मन की बात’ में इस पेंटिंग की तारीफ की थी. डॉ. सिंह ने बताया कि सोहराय-खोवर कला का एक लोगो भी प्रस्तावित किया गया है. लोगो में पशुपति का चित्र है. इसमें पांच रंगों का ही इस्तेमाल किया गया है.

जीआई टैग से क्या फायदा होता

इस सवाल पर डॉ. सत्यदीप सिंह ने कहा कि जीआई टैग मिलने पर प्रॉडक्ट को एक पहचान मिल जाती है. पूरी दुनिया में वह एक तरीके से ब्रांड होता है. कहीं दूसरी जगह पर बिना अनुमति के उस प्रॉडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. साथ ही जीआई टैग से आर्थिक मोर्चे पर भी संबल मिलता है. उन्होंने कहा कि सोहराय-खोवर कला से जुड़े लोगों ने बताया कि पहले एक पेंटिंग पर 100-150 रुपये मिलते थे. अब 300 रुपये मिल जाते हैं.

 

इस वीडियों में सोहराय खोवर कला को डिटेल से जान सकते हैं-

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