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जम्मू-कश्मीर में स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स के हथियार ज़ब्त किए जाने वाली खबर पर सरकार ने जवाब दिया है

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आर्टिकल 370 को बेअसर करने के ऐलान के बाद से ही जम्मू-कश्मीर, सुरक्षा एजेंसियों के सख़्त पहरे में जी रहा है. जम्मू हिस्से में आम जनजीवन काफी हद तक ढर्रे पर लौट आया है लेकिन कश्मीर घाटी में अब तक पाबंदियां जारी हैं. 17 अगस्त को एक और ख़बर आई कि जम्मू-कश्मीर पुलिस में काम कर रहे स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPO) के हथियार ज़ब्त कर लिए गए हैं. लेकिन जब मामले पर कयास उठने लगे तो सरकार ने मामले में सफाई पेश की है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने हथियार वापस लिए हैं. इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में कुछ SPO और पुलिस अधिकारियों के बयान छापे हैं.

18 अगस्त को घाटी से आई तस्वीर. दिख रहे लाल निशान पत्थरबाज़ी के हैं.
18 अगस्त को घाटी से आई तस्वीर. दिख रहे लाल निशान पत्थरबाज़ी के हैं.

इंडिया टुडे की ख़बर के मुताबिक सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुलिस में काम कर रहे 250 स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स (SPO) के हथियार वापस लिए गए हैं. पुलिस को शक था कि कहीं ये SPO आतंकवादी संगठनों में शामिल न हो जाएं.

इस तस्वीर में जम्मू-कश्मीर पुलिस और राष्ट्रीय रायफल्स के जवान खड़े हैं. घाटी में दहश्तगर्दों का सफाया करने की बड़ी ज़िम्मेदारी इन्हीं पर है.
इस तस्वीर में जम्मू-कश्मीर पुलिस और राष्ट्रीय रायफल्स के जवान खड़े हैं. घाटी में दहश्तगर्दों का सफाया करने की बड़ी ज़िम्मेदारी इन्हीं  कंधों पर है.

#SPO कौन होते हैं?

SPO वो लोकल कश्मीरी होते हैं जिन्हें कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर पुलिस बल में शामिल किया जाता है. कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए SPO जम्मू-कश्मीर के रेगुलर पुलिसबल की मदद करते हैं. कश्मीरी समाज में बैठे अलगाववादी नेता इन SPO को गद्दार बताने में लगे रहते हैं. हथियाबंद दहश्तगर्द अक्सर इन्हें निशाना बनाते रहे हैं.

SPO को रेगुलर पुलिस बल की तरह अच्छी सैलरी नहीं मिलती. इतनी ख़तरनाक नौकरी करने की एवज में उन्हें सिर्फ 12,000 हजार रुपये की तनख़्वाह पर राज्य सरकार रखती है. हालांकि खर्च केंद्र सरकार उठाती है (जो भी खर्च आता है, वो केंद्र सरकार री-इम्बर्स कर देती है). इस समय क़रीब 30,000 महिला और पुरुष SPO कश्मीर में काम कर रहे हैं.

इंडिया टुडे से नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने कहा था

सरकार के इस फैसले से विद्रोह तो नहीं होगा. लेकिन गुस्सा ज़रूर है. इसी के चलते कश्मीरी पुलिसकर्मियों के मुकाबले केंद्रीय सुरक्षा बलों की संख्या पुलिस थानों में बहुत ज्यादा है. हालात पर कड़ी नज़र बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है.

एक और पुलिसकर्मी ने कहा कि वो (सरकार) हमपर भरोसा नहीं करते. इसलिए हमपर कड़ी नज़र रखी जा रही है.

कश्मीर में 19 अगस्त को दोबारा स्कूल, कॉलेज और चुनिंदा सरकारी दफ्तर खुलने थे. कोई भी नहीं चाहता कि सड़क, बाज़ार इतनी सूने हों और वहां हेल्मेट पहनकर देश के जवान को खड़ा होना पड़े.
कश्मीर में 19 अगस्त को दोबारा स्कूल, कॉलेज और चुनिंदा सरकारी दफ्तर खुलने थे. कोई भी नहीं चाहता कि सड़क, बाज़ार इतनी सूने हों और वहां हेल्मेट पहनकर देश के जवान को खड़ा होना पड़े.

# सरकार का पक्ष 

SPO के हथियार ज़ब्त करने पर जम्मू-कश्मीर के जनसंपर्क विभाग ने सफाई दी है. गृह सचिव की ओर से जारी बयान में ऐसी कोई भी घटना होने से इनकार किया है. विभाग ने इसे अफवाह करार दिया है. जम्मू-कश्मीर के गृह सचिव शालीन काबरा की ओर से जारी बयान में लिखा है.

जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल पुलिस ऑफिसर्स के हथियार ज़ब्त करने की एक झूठी ख़बर फैल रही है. ये पूरी तरह से अफावाह जिसके पीछे कुछ लोगों के निजी हित हैं. इसे स्पष्ट रूप से नकारा जाता है: शालीन काबरा, गृह सचिव, जम्मू-कश्मीर

साथ ही कहा है कि लोग ऐसी अफवाह पर ध्यान न दें और बिना वेरिफाई किए कोई भी ऐसी ख़बर न फैलाएं.

# SPO का हालिया इतिहास-

अपनी मातृभूमि को मूल निवासी ही सबसे क़रीब से जानता है. देश के दूसरे हिस्सों से जाने वाले जवान जब जम्मू-कश्मीर पहुंचता है तो SPO उसकी सबसे बड़ी मदद साबित होते हैं. फिर चाहे बात किसी मुठभेड़ की हो या फिर कानून व्यवस्था बनाने की. 2019 में ही दो ऐसे बड़े कांड हुए थे कि SPO को शक की नज़र से देखा जाने लगा. पहला था- पुलवामा सिविल लाइंस के दो SPO शब्बीर अहमद और सुलेमान अहमद की मिलिटेंसी जॉइन करना और दूसरा था दहश्तगर्दों का पीडीपी विधायक के घर से SPO की मदद से हथियार लूटना. इसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर में SPO को रोल पर मंथन चल रहा था.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों से हाथ मिलाते हुए.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों से हाथ मिलाते हुए.

वहीं कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जहां SPO देश की रक्षा के लिए सबसे पहले खड़े रहे. उन्हें दहशतगर्दी का शिकार होना पड़ा. आर्टिकल 370 को बेअसर करने पर आम कश्मीरी की तरह ही SPO का क्या रिएक्शन होता, ये तो कहना मुश्किल है. लेकिन सरकार ने अपनी ओर से साफ किया है कि SPO से हथियार नहीं लिए गए हैं.


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