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कुछ पत्थरों से इस शहर का नाम खराब हुआ, अब 'पत्थरों' ने ही कोरोना वॉरियर्स को थैंक्यू कहा है

मध्य प्रदेश का इंदौर शहर. राज्य में यहां कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं. अप्रैल के महीने में यहां कोरोना वॉरियर्स पर हमले हुए.एक बार नहीं कई बार. लेकिन ‘सब दिन होत न एक समान’. अब कोरोना के ख़िलाफ लड़ रहे इन्हीं फ्रंटवॉरियर्स के लिए इंदौर शहर में ही एक बड़ा ख़ूबसूरत काम हुआ है. ये काम किया है वहां के एक कलाकार वाजिद खान ने. उन्होंने डॉक्टर्स और पुलिसकर्मियों को ट्रिब्यूट के तौर पर एक भव्य आर्ट बनाई है. ऊपर वाली फोटो देखिए.

बास्केटबॉल कोर्ट में काले पत्थरों से बना आर्टवर्क

वाजिद खान ने शहर के एक बास्केटबॉल कोर्ट की जगह ली. चूंकि अभी कोई स्पोर्ट्स इवेंट नहीं रहा है तो कुछ दिन के लिए जगह मिल भी गई.यहां काले पत्थरों से ज़मीन पर एक आर्टवर्क तैयार किया. इसमें इंदौर के पूर्व टीआई (थाना इंचार्ज) देवेंद्र चंद्रवंशी की बड़ी सी इमेज है. देवेंद्र ड्यूटी निभाते हुए कोरोना वायरस से इंफेक्टेड हो गए थे. अप्रैल में उनकी मौत हो गई थी.

वाजिद के आर्ट में देवेंद्र को पंख भी दिए गए हैं. ये दिखाने के लिए कि वे सच्चे मायनों में वॉरियर थे. इसके नीचे तीन अलग-अलग भाषाओं में कोविड फ्रंट वारियर्स का शुक्रिया अदा किया गया है. इंग्लिश, हिंदी और उर्दू में. फिर बना है डॉक्टर बिरादरी का सिंबॉलिक लोगो.

वाजिद ने दी लल्लनटॉप को बताया,

“मैंने ये पोर्ट्रेट बनाना तो पहले ही शुरू कर दिया था. तब इंदौर वाली घटना हुई भी नहीं थी. पहले एक अलग प्लान था. मैंने दुनिया के तमाम देशों से पुलिस और डॉक्टर्स के लिए मैसेज मंगवाए थे. तमाम मैसेज आए भी थे. उन्हीं को किसी तरह आर्ट के ज़रिये उकेरने की कोशिश कर रहा था. ये काम शुरू भी हो गया था.”

फिर इंदौर में टाटपट्टी बाखल वाली घटना हो गई. वाजिद बताते हैं कि यहीं से उनको इस नई आर्ट का ख़्याल आया. उन्होंने कहा,

“लेकिन तभी इंदौर में टाटपट्टी बाखल वाली घटना हो गई. जब कुछ लोगों ने कोविड फ्रंटवॉरियर्स पर पत्थरों से हमला कर दिया. इसके बाद शहर के ही लोगों ने मुझसे कहा कि कुछ पत्थरों की वजह से पूरे शहर का नाम ख़राब हुआ है. इसलिए अब आपको पत्थरों से ही उन कोरोना वारियर्स का शुक्रिया अदा करना चाहिए. ताकि अब ये पत्थर इंदौर का असली मैसेज लोगों तक पहुंचा सकें.”

बनाने में 150 बोरी पत्थर लगा

ये पूरा पोर्ट्रेट 50×50 फिट का है. एक बास्केटबॉल कोर्ट में बना है. बनाने में कुल तीन हफ्ते का समय लगा. 150 बोरी से ज़्यादा पत्थर लगे. सारे पत्थरों को करीने से संजोकर पूरी आर्ट बनाई गई. लेकिन ये पत्थर किसी चीज़ से चिपके नहीं हैं. यूं ही संजोकर रखे गए हैं. धोखे से किसी का पैर भी लग गया तो सारा मामला बिगड़ सकता है. वाजिद कहते हैं कि इसे बरकरार रखने में कोर्ट के गार्ड साब बड़ी मदद कर रहे हैं. वो हमेशा इस आर्ट पर नज़र रखते हैं कि कोई बिगाड़ न दे. जब वो जाते हैं तो कोर्ट का गेट बंद कर जाते हैं.

जितनी ज़्यादा ऊंचाई, उतनी ज़्यादा ख़ूबसूरती

वाजिद बताते हैं कि शहर के आईजी विवेक शर्मा भी ये पोर्ट्रेट देखने आए थे. पोर्ट्रेट की ख़ास बात ये है कि जब वहीं खड़े होकर देखिए तो कोई ख़ास आकृति समझ नहीं आती. जैसे-जैसे ऊंचाई पर जाते जाएं, वैसे-वैसे ये और बेहतर दिखने लगता है. आईजी शर्मा को भी वहीं से देखकर कुछ अलग लगा नहीं, फिर उन्होंने पास की एक बिल्डिंग में ही कुछ ऊंचाई पर जाकर देखा, तब जाकर उन्हें साथी देवेंद्र की तस्वीर अच्छे से समझ आई.

ऑटो पार्ट्स और नाखूनों से भी आर्ट बना चुके हैं

2 अक्टूबर 2019 को भोपाल में भी वाजिद ने पूरे मैदान में छह हज़ार से ज़्यादा बच्चों की मदद से महात्मा गांधी का चेहरा उकेरा था.

वाजिद अलग-अलग चीजों से आर्ट्स बनाने का हुनर रखते हैं. नाखूनों से, गाड़ियों के अंजर-पंजर से, पत्थरों से, मेडिकल इक्विपमेंट से. कुछ समय पहले उन्होंने बुलेट्स से महात्मा गांधी का आर्ट बनाया था. उनके बाकी आर्ट कलेक्शन उनकी वेबसाइट https://wajidart.com/ पर देख सकते हैं.

2018 में जब लल्लनटॉप चुनावी यात्रा पर मध्यप्रदेश गया था, तो वाजिद से मुलाकात हुई थी. क्या बातें हुई थीं, वो यहां देखिए..

 


इंदौर में डॉक्टर्स ने पत्थर फेंकने वालों से गज़ब का बदला लिया है

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