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वुहान में रह रहे भारतीयों ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए ज़रूरी टिप्स दिए

कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत चीन के वुहान से हुई थी. जनवरी-फरवरी में भारत सरकार वहां फंसे करीब 700 भारतीयों को वापस ले आई थी, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने वहीं रहना ठीक समझा. वुहान 76 दिनों तक लॉकडाउन में रहा, 8 अप्रैल को खुला. अब इतने दिनों तक वहां घरों में बंद रहने वाले भारतीयों ने कोरोना से निपटने के कुछ टिप्स दिए हैं. सबसे ज़रूरी टिप लॉकडाउन को कड़ाई से फॉलो करना और आइसोलेटेड रहना है.

इन भारतीयों ने समाचार एजेंसी PTI से बात की. कहा कि वो खुश हैं कि 76 दिन का लॉकडाउन आखिरकार खुल गया. अरुणजीत सतरजीत हाइड्रोबायोलॉजिस्ट हैं. वुहान में एक रिसर्च प्रोजेक्ट में काम कर रहे हैं. परिवार केरल में रहता है. लॉकडाउन में इंडिया नहीं आए. क्योंकि उन्हें लगा कि मुसीबत से भागना किसी भारतीय के लिए आदर्श बात नहीं है. दूसरा उन्हें लगा कि उनके लौटने से उनके परिवार की हेल्थ पर कहीं खतरा न मंडराने लगे.

अरुणजीत ने लॉकडाउन का अपना एक्सपीरियंस बताया. कहा,

’73 दिन तक घर पर रहा. परमिशन से केवल अपने लैब जाता था. आज ठीक से बोलने में दिक्कत हो रही है, क्योंकि इतने दिनों में किसी से ज्यादा बात नहीं हुई. हर कोई घर पर था.’

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लॉकडाउन खत्म होने पर वुहान की ट्रेन में बैठे लोग. फोटो क्रेडिट- PTI.

भारत को क्या सलाह दी?

अरुणजीत ने कहा कि देशभर में लॉकडाउन लगाने का फैसला बिल्कुल सही है, लेकिन बड़ी दिक्कत मानसून के आने पर होगी. क्योंकि उस दौरान लोगों की इम्यूनिटी का लेवल कम हो जाता है और ये वायरस और खतरनाक हो सकता है. आगे कहा कि ऐसे में अगर वुहान भारत को कुछ सिखा सकता है, तो वो है लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करना और सेल्फ-आइसोलेशन के कैंपेन में ज्यादा से ज्यादा लोगों का हिस्सा लेना.

इसके अलावा उन्होंने बताया कि दिसंबर के दूसरे हफ्ते से ही किसी वायरस के फैलने की बात सुनाई देने लगी थी. वुहान में. लोगों ने डर के मारे मास्क पहनना भी शुरू कर दिया था.

दूसरे भारतीय की सलाह

वुहान में काम करने वाले एक भारतीय साइंटिस्ट ने नाम न बताने की शर्त पर अपना अनुभव शेयर किया. कहा,

’72 दिनों तक मैंने खुद को घर में बंद कर रखा था. मेरे पड़ोसियों के तीन बच्चे हैं, लेकिन वो भी एक दिन भी बाहर नहीं निकले. आज खुश हूं कि मैं सर्वाइव कर गया, लेकिन अभी भी बाहर निकलने में खतरा लगता है क्योंकि मैं किसी वायरस कैरियर के कॉन्टैक्ट में आ सकता हूं.’

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लाल कपड़ों में वुहान में काम कर रही एक मेडिकल वर्कर. लॉकडाउन खत्म होने पर अपने घर जाते हुए. खुशी में अपने कलीग को गले लगाया हुआ है. लॉकडाउन 8 अप्रैल को खत्म हुआ. फोटो क्रेडिट- PTI.

इन साइंटिस्ट ने भी भारतीयों को कड़ाई से लॉकडाउन फॉलो करने की सलाह दी है. साथ ही ये भी कहा है कि अगर वुहान में थोड़ा और पहले से लॉकडाउन हो जाता, तो ये वायरस इस तरह से नहीं फैल पाता. ये साइंटिस्ट भी अपने परिवार के लिए भारत वापस नहीं आए. वायरस के बारे में उन्होंने कहा,

‘वायरस को समझना आसान नहीं है. ये तब तक आसान नहीं होने वाला, जब तक ज़ीरो केस न हो जाएं और ऐसा होना बहुत मुश्किल है. चीन ने एक्ट करने में वक्त लिया, क्योंकि उन्हें शुरुआत में कुछ आइडिया ही नहीं था, लेकिन जब उन्हें पता चला उन्होंने तेज़ी से काम किया.’

भले ही वुहान में लॉकडाउन खत्म हो गया है, लेकिन फिर भी लोग घर से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं, बिना लक्षण वाले कैरियर्स की वजह से. दोनों ने ये भी कहा कि दिसंबर और जनवरी में, तब तक वायरस को डिटेक्ट नहीं किया जा सका था, जब तक ज्यादा लोग इसके कॉन्टैक्ट में नहीं आए थे.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.


वीडियो देखें: आज WHO पर सवाल उठ रहे हैं, क्या इंडिया पहले ही उसकी कई ‘सलाहों’ को नहीं मान रहा था?

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