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अश्विन ने जो बताया, उसे जानकर आप सहवाग से नाराज हो सकते हैं

आर अश्विन. इंडिया का नम्बर एक स्पिन बॉलर. इंडियन पिच पर तो इसकी बॉल ऐसे घूमती हैं जैसे गली में कोई साइकिल चला रहा हो. अहन मर्जी आये घूम जाती हैं. बैट्समैन उतना ही कन्फ्यूज्ड रहता है जितना एक नवजात एक टॉपलेस बार में होता है. उसी आर अश्विन ने वीरेंद्र सहवाग के बारे में बढ़िया खुलासा किया है. सहवाग इस वक़्त ख़बरों में भी हैं क्यूंकि उन्होंने इंडियन टीम के कोच के लिए अप्लीकेशन भेजी है. अप्लीकेशन भी एक नम्बर थी. उन्होंने मात्र 2 लाइन में अपना आवेदन भेजा था. जिसे बीसीसीआई ने वापस कर दिया और कहा कि इसे इम्प्रूव करके लाइए. जैसे कोच की अप्लीकेशन नहीं कॉलेज का असाइनमेंट हो.

खैर, अश्विन ने बताया कि कैसे वीरेन्द्र सहवाग ने उन्हें ऐसा अहसास दिला दिया था कि वो घटिया बॉलर हैं. हुआ ये था कि कुछ साल पहले वो नेट्स में सहवाग को गेंद फेंक रहे थे, “दाम्बुला में मैं उन्हें गेंद फेंक रहा था. मेरी पहली गेंद आउटसाइड ऑफ़ स्टम्प थी, सहवाग ने उसे कट किया. अगली बॉल मैंने ऑफ़ स्टम्प पर डाली. उन्होंने मुझे फिर कट किया. अगली बॉल मिडल स्टम्प पर थी. उसे भी उन्होंने कट किया. अगली बॉल मैंने लेग स्टम्प पर फेंकी उन्होंने फिर से मुझे कट किया. मैंने पूछा, ‘ये हो क्या रहा है?’ मैंने फिर फुल लेंथ गेंद फेंकी. सहवाग बाहर निकले और मुझे छक्का मार दिया.”

ये वो वक़्त था जब अश्विन टीम में अपनी जगह बनाने के लिए जूझ रहे थे. उनके पास कोई आईडिया नहीं बचा था जिससे वो सहवाग को छका सकते थे.


“फिर मैंने सोचा कि या तो मैं अच्छा बॉलर नहीं हूं या फिर ये आदमी बहुत बढ़िया प्लेयर है. यहां तक कि मुझे सचिन तेंदुलकर को गेंद फेंकने में इतनी परेशानी नहीं हुई थी. मैंने कुछ दिन ऐसा देखा. लेकिन फिर एक दिन मुझसे रहा नहीं गया. मैंने सहवाग से पूछा कि मुझे इम्प्रूव करने के लिए क्या करना चाहिए. अगर मैंने सचिन से या धोबनी से ये पूछा होता तो वो मुझे टिप्स देते. लेकिन वीरू ने मुझसे कहा ‘तुम्हें पता है, मैं ऑफ़ स्पिनर्स को बॉलर ही नहीं मानता हूं. उनसे मुझे कोई तकलीफ़ ही नहीं होती.’ मैंने बोला ‘सर आप मुझे कट मार रहे हो.’ उन्होंने कहा, ‘ हां मैं ऑफ़ स्पिनर्स को अगेंस्ट द स्पिन ऑफ़ साइड पर मारता हूं और लेफ़्ट आर्म स्पिनर्स को अगेंस्ट द स्पिन लेग साइड पर.'”


 

अगले दिन अश्विन ने सहवाग को और भी तरीकों की गेंदें फेंकने की कोशिश की लेकिन सहवाग ने मुझे बहुत मारा. “वो मुझे ऐसे मार रहे थे जैसे मैं सड़कछाप बॉलर था. जैसे मैं एक 10 साल के लड़के को ट्रीट करूंगा.”

लेकिन इसके बाद अश्विन ने एक तरकीब ढूंढ निकाली. “इस सब के बाद सहवाग के खिलाफ़ बेस्ट स्ट्रेटेजी थी, उन्हें गन्दी गेंदें फेंको. महागन्दी. और फिर ऐसे ही मैंने उन्हें आईपीएल में कई बार आउट किया. क्यूंकि वो ये एक्स्पेक्ट करता है कि आप उन्हें अच्छी गेंदें फेंकोगे. इसलिए ज़रूरी है कि वो जो चाह रहा है, उसे वो न दो. इसलिए सहवाग के खिलाफ़ गेंद फेंकना आसान था. वो अच्छी गेंदों को बाउंड्री पार भेज देता था. इसलिए मेरी स्ट्रेटेजी थी कि मैं उन्हें घटिया गेंदें फेंकू.”

अश्विन ने ये सभी बातें विक्रम सठाये के शो ‘व्हाट द डक’ में बताईं.


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