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जिस पुल पर चीन मुंह बिचका रहा था, उसे सेना ने 72 घंटे में बना डाला

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी में हिंसक झड़प तो 15 जून को हुई. लेकिन दोनों देशों के बीच एलएसी पर विवाद काफी समय से चल रहा था. इसकी शुरुआती वजहों में से एक था भारत का एलएसी के पास कुछ कंस्ट्रक्शन वर्क. जैसे कि सड़क और ब्रिज बनाना. भारत ये काम अपने क्षेत्र में ही कर रहा था, फिर भी चीन को आपत्ति थी.

इसी पर बात बढ़ी और बढ़ते-बढ़ते गलवान की लड़ाई तक पहुंच गई. लेकिन भारतीय सेना ने गलवान के चार दिन के भीतर ही अपना ब्रिज बनाने का अधूरा काम पूरा कर लिया है.

इंडिया टुडे डिफेंस जर्नलिस्ट शिव अरूर के मुताबिक, 15 जून की घटना के बाद ही इंडियन आर्मी कॉम्बैट इंजीनियर्स को ये निर्देश दे दिए गए थे कि गलवान नदी के ऊपर बन रहे इस ब्रिज का काम रुकना नहीं चाहिए. इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए. 16 तारीख से काम ने वापस रफ्तार पकड़ी और 72 घंटे में सेना ने ये पुल बनाने का काम पूरा कर लिया.

Army Bridge Galwana
ये गलवान घाटी और भारत-चीन एलएसी की सैटेलाइट मैपिंग है. नदी और उस पर बना भारतीय सेना का ब्रिज साफ दिख रहा है. (फोटो- The Lallantop)

60 मीटर लंबा है ब्रिज

ये ब्रिज 60 मीटर लंबा है. इसके खुलने से सेना को एलएसी के पास तक जाने का आसान रास्ता मिलेगा. 16 जून को जब 15 तारीख को घटी सारी स्थितियां धीरे-धीरे साफ हो ही रही थीं, तभी आर्मी की कारू माउंटेन डिवीजन ने आर्मी इंजीनियर्स को काम तेज करने का मैसेज भेज दिया था.

इसमें कुछ निर्देश काफी साफ थे –

# जहां ब्रिज बन रहा, उससे कुछ ही दूरी पर 15 जून को हालात बिगड़े थे. इसलिए काम सावधानी से और जल्दी हो.

# ब्रिज को जल्द से जल्द पूरा करने में जो भी रिसोर्स लगें, वो लीजिए. पर काम जल्द पूरा हो.

# टुकड़ियां लगातार ब्रिज का काम कर रहे लोगों को कवर देती रहें.

16 जून की रात को ही आर्मी के डिविजन कमांडर मेजर जनरल अभिजीत बापट भी एलएसी के पास पहुंचे थे और ब्रिज की प्रोग्रेस पर जानकारी ली थी. इसके बाद मंगलवार और बुधवार की रात भी काम जारी रहा. नतीजा- जिस पुल पर चीन मुंह बिचका रहा था, वो 72 घंटे में तैयार.


भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प पर वायुसेना प्रमुख ने क्या कहा?

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