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लॉकडाउन से इंसान ही परेशान नहीं है, इन जानवरों की कहानी भी सुनिए

कोरोना वायरस का असर इंसानों के साथ जानवरों पर भी पड़ा है. ऐसा ही एक केस है तमिलनाडु के महाबलीपुरम का. यहां पर है मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट. नाम से किसी बैंक को लेकर कंफ्यूज मत होइएगा. दरअसल यह रेंगने वाले जानवरों यानी रैप्टाइल्स का पार्क है. देश का सबसे पुराना रेप्टाइल पार्क. इसमें घड़ियाल, सांप, कछुए जैसे जानवर रखे गए हैं.

इंडिया टुडे के शिव अरुर की रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के चलते पार्क बंद है. 16 मार्च से इस पार्क में कोई दर्शक नहीं आया है. और आने वाले समय में भी दर्शक कब आएंगे, किसी को नहीं पता. ऐसे में पार्क के जानवरों के लिए खाने की कमी हो गई है. पार्क का मैनेजमेंट कोशिश कर रहा है लेकिन फंड जुटाना बहुत मुश्किल हो रहा है.

नील जीभ वाला स्किंक. (Photo: India Today)
नील जीभ वाला स्किंक. (Photo: India Today)

अभी कैसी है पार्क की माली हालत

रिपोर्ट के अनुसार, पार्क के मैनेजमेंट का अनुमान है कि 16 मार्च से जून के अंत तक इस पार्क में करीब एक लाख विज़िटर्स का अनुमान था. इससे टिकट के जरिए करीब 80 लाख रुपये की कमाई होती. यह कमाई जानवरों के रखरखाव और पार्क के स्टाफ की सैलरी पर खर्च होती. लेकिन पार्क बंद है तो कमाई भी नहीं है. पर जानवरों का पेट तो भरना है. ऐसे में अप्रैल में मैनेजमेंट ने फंड जुटाने का प्रयास किया. इससे करीब 3.5 लाख रुपये आए. लेकिन हकीकत में होने वाली कमाई के सामने यह रकम कुछ भी नहीं है.

ग्रीन एनाकोंडा. (Photo: India Today)
ग्रीन एनाकोंडा. (Photo: India Today)

पार्क में कितने जानवर हैं

अभी मद्रास क्रोकोडाइल बैंक में करीब 2000 व्यस्क घड़ियाल हैं. इनके अलावा 100 छोटे घड़ियाल हैं. साथ ही कम से कम 100 सांप, कछुए, छिपकली और गोह हैं. इन सभी को अलग-अलग तरह का खाना, साफ-सफाई चाहिए होती है. मद्रास क्रोकोडाइल बैंक एक गैर लाभकारी पब्लिक ट्रस्ट है. इस वजह से ये सरकार से फंड नहीं मांग सकता है. ऐसे में ये पूरी तरह से टिकटों की बिक्री के भरोसे ही चलता है. लॉकडाउन की वजह से अब उसके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है.

अबिनो कोबरा. (Photo: India Today)
अबिनो कोबरा. (Photo: India Today)

जानवरों के खाने के लिए स्टाफ ने काटी सैलरी

पैसों की कमी के चलते मैनेजमेंट के सीनियर अधिकारियों ने खुद से ही सैलरी में कटौती कर ली. यह कटौती 10 से 50 प्रतिशत तक है. लेकिन जानवरों के खाने में किसी तरह की कमी नहीं की जा रही है.

ग्रीन इगुआना. (Photo: India Today)
ग्रीन इगुआना. (Photo: India Today)

पार्क के जॉइंट डायरेक्टर एल्विन जेसुदसन ने इंडिया टुडे से बात की. उन्होंने बताया,

हम लोगों से एक घड़ियाल अडॉप्ट करने को कह रहे हैं. इसके जरिए वे खाने और उनके रखरखाव को लेकर मदद कर सकते हैं. इसके तहत लोग एक साल के लिए 1000 से 50 हजार रुपये दे सकते हैं.

अब बात थोड़े इतिहास की

मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट की स्थापना एक अमेरिकी रैप्टाइल एक्सपर्ट ने की थी. उनका नाम रॉमलस व्हाइटकर है. वे 70 के दशक में अमेरिका से आकर भारत में रहने लगे थे. उन्हें भारतीय स्नेक लवर्स का मुखिया भी कहा जाता है. अभी वे पत्नी जानकी लेनिन के साथ चेन्नई के पास एक फार्म में रहते हैं. जानकी पर्यावरण मामलों की लेखक और फिल्ममेकर हैं.

त्रावणकोर कछुआ. (Photo: India Today)
त्रावणकोर कछुआ. (Photo: India Today)

साल 2015 में चेन्नई में भयंकर बाढ़ आई थी. उस समय अफवाह फैली कि कुछ घड़ियाल पार्क से निकलकर बाहर आ गए हैं. इससे लोगों में दहशत फैल गई. प्रशासन को घड़ियालों की गिनती करनी पड़ी. इसमें सामने आया कि सभा घड़ियाल वहीं पर हैं. इसके बाद अफवाहों पर रोक लगी.

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