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अलवर के एसपी ने नौ मुस्लिम पुलिसवालों से कहा, 'आगे से दाढ़ी मत रखना'

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राजस्थान का एक जिला है अलवर. यहां नौ पुलिसवालों को दाढ़ी रखने की अनुमति वापस ले ली गई है. यानी वे अब दाढ़ी नहीं रख सकते. पुलिस अधीक्षक अनिल पारिस देशमुख ने एक आदेश जारी किया है. इस आदेश के मुताबिक अलवर जिले में तैनात नौ मुस्लिम पुलिसकर्मियों को दाढ़ी रखने की छूट को राज्य सरकार के नियमानुसार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है. अलवर पुलिस प्रशासन ने 32 पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान दाढ़ी रखने की अनुमति दी थी. इनमें से अब नौ पुलिसकर्मी दाढ़ी नहीं रख पाएंगे क्योंकि इसकी अनुमति अब नहीं होगी.

21 नवंबर को अनुमति वापस ली गई थी. इनमें एक एएसआई, एक हेड कॉन्स्टेबल सहित सात कॉन्स्टेबल शामिल हैं. एएसआई ईसराइल अहमद, हेड कॉन्स्टेबल छोटे खां, कांस्टेबल अब्बास खां, असरद खान, समरदीन, जैकम खां, मुस्ताक, दीन मोहम्मद और साहिद निसार को दाढी रखने की दी गई अनुमति वापस ले ली गई है. एसपी कार्यालय की ओर से पहले इन्हें दाढ़ी रखने अनुमति दी गई थी. एसपी कार्यालय की ओर से इन पुलिसवालों को जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर में अलग-अलग तारीखों को दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई थी.

Alwar
एसपी की ओर से ये आदेश जारी किया गया है.

विवाद बढ़ने पर एसपी ने कहा है कि अलवर पुलिस ने जिले में 32 पुलिसकर्मियों को दाढ़ी रखने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पिछले दिनों नौ लोगों को दी गई परिमिशन वापस ले ली गई. अगर कोई पुलिसवाला फिर से दाढ़ी रखने की अनुमति मांगता है तो उसे इसकी इजाजत की जाएगी. जिले में कानून व्यवस्था बनाये रखते समय भेदभाव और निष्पक्षता को लेकर यह आदेश दिए गए हैं.

दाढी रखने से कानून व्यवस्था कैसे प्रभावित होगी. इसे लेकर पुलिस की ओर से साफ-साफ कुछ नहीं कहा गया है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि धर्म के नाम पर पुलिसवालों के बारे में राय बना लेते हैं. इस तरह की घटना को रोकने के लिए ऐसा किया गया है. एक और बात है. पिछले कुछ दिनों से दाढ़ी रखनेवाले मुस्लिम पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ रही थी. इसे भी रोकने के लिए ऐसा किया गया है. हालांकि सिर्फ नौ लोगों को ही दाढ़ी रखने से क्यों रोका गया ये भी साफ नहीं है.

मुस्लिम संगठनों ने इस मामले को कोर्ट ले जाने की बात कही है. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में अल्पसंख्यक पुलिसवालों को दाढ़ी रखने की इजाजत दी थी. राजस्थान में गृह मंत्रालय का जिम्मा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास है. मंत्रियों का कहना है कि इस मामले में बड़े नेता ही जवाब देंगे.


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