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स्कूल में बैग-किताबें छोड़ लड़की भागी, स्टेशन पर एक विकलांग ने पकड़ा और महीने भर रेप किया

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मशहूर उपन्यासकार और लेखिका क़ुर्तुल ऐन हैदर की एक रचना है ‘अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो’. इस उपन्यास में दो बहनों की कहानी है, जिसे कई बार, बार-बार छला जाता है. इस रचना में मर्दों के आर्थिक ही नहीं भावनात्मक खोखलेपन की कहानी बुनी गई है. जिसे पढ़ कर दिल छलनी हो जाता है. आज हम जिस खबर के बारे में आपसे ज़िक्र करने जा रहे हैं उसका भी इस रचना से गहरा ताल्लुक है.

मुंबई की एक अदालत ने पॉस्को एक्ट के तहत एक व्यक्ति को 10 साल कैद की सज़ा सुनाई. क्योंकि आरोपी ने पहले  एक अनाथ नाबालिग लड़की को अगवा किया. महीने भर अलग-अलग जगहों पर ले जाकर रेप किया. साथ ही अपने चाचा के घर भी ले जाकर रेप करवाया. महीने भर के बाद जब उसका मन भर गया तो लड़की को शेल्टर होम के पास छोड़कर भाग गया. गौर करने वाली बात है कि वो खुद भी विकलांग था. कोर्ट ने 10 साल की सज़ा सुनाते हुए उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

विकलांग होने के बावजूद आरोपी ने रेप किया, जिसपर कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई. (सांकेतिक तस्वीर)
विकलांग होने के बावजूद आरोपी ने रेप किया, जिसपर कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई. (सांकेतिक तस्वीर)

आरोपी को सज़ा मिलने के बाद दिल को थोड़ी तसल्ली तो मिली होगी, लेकिन नाबालिग लड़की की पूरी कहानी जानकर शायद उतने स्टेबल न रह पाएं.

सेंट्रल मुंबई की एक लड़की. जो कुछ ही महीने पहले अपनी मां को खोई थी. उसे नहीं पता कि उसके पिता कौन थे, कहां थे, उनका नाम क्या था. उसे अपने परिवार के बारे में कुछ भी नहीं पता था. आसान शब्दों में कहें तो मां के मरने के बाद लड़की अनाथ हो चुकी थी. अनाथ होने के बाद लड़की शेल्टर होम में रहती थी. खुद में ही गुम, चुप-चाप शांत रहने वाली लड़की शेल्टर होम से स्कूल और स्कूल से शेल्टर होम आया जाया करती थी. उसकी ज़िंदगी इतनी बंध चुकी थी कि उसे स्कूल से लाने और ले लिए भी आदमी को काम पर लगाया गया था.

वो लड़की 6 महीने से शेल्टर होम में रही थी. रूटीन फॉलो कर रही थी. लेकिन एक दिन वो इसी रूटीन से तंग आकर अपना बैग और किताबों को छोड़कर स्कूल से भाग गई. ये बात नवंबर महीने की थी और साल था 2014. स्कूल से भागकर वो पास के रेलवे स्टेशन पहुंची. जहां वो बेहोश हो गई. रेलवे स्टेशन पर बेहोश पड़ी लड़की पर नज़र उस हैवान की पड़ी. आरोपी धनेश उस बेहोश लड़की को उठाकर भायंदर लेकर गया. लेकिन भायंदर लेकर जाने से पहले उसने लड़की के साथ एक खाली पड़े ट्रेन के डिब्बे में बलात्कार किया.

दूसरी तरफ लड़की स्कूल से गायब होने के बाद शेल्टर होम वाले परेशान थे. वो लड़की को ढूंढ रहे थे. काफी ढूंढने के बाद भी वो नहीं मिली तो उन्होंने मुंबई पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दिया. फिर एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस लड़की को ढूंढने लगी. इधर धनेश लड़की को लगातार एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करता जा रहा था, लगातार एब्यूज़ करता जा रहा था. वो लड़की को अपने चाचा के घर भी लेकर गया. जहां विकलांग के बुजुर्ग चाचा ने भी नाबालिग के साथ रेप किया.

करीब महीने भर लड़की के साथ रेप करने के बाद जब धनेश का मन भर गया. तब उसने लड़की को उसी शेल्टर होम के पास लेकर जाकर छोड़ दिया जहां वो रहती थी. जब लड़की को वो छोड़ रहा था तभी शेल्टर होम की दूसरी लड़कियों की नज़र आरोपी पर पड़ी. उन्होंने हल्ला मचाया. लेकिन आरोपी मौके से भाग गया.

लड़की की बुरी हालत देखकर शेल्टर वालों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टरों ने चेक किया तो सारा मामला साफ हो गया. जिसके बाद लड़की ने खुद के साथ बीती पूरी कहानी बताई. लड़की के बयान के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी हुई. 2014 से लेकर 2019 तक केस चला. जिसके बाद मुंबई की विशेष अदालत ने आरोपी को रेप का दोषी पाया. दोषी पाने पर उसे 10 साल की सज़ा सुनाई गई.


यूपी पुलिस ने पत्रकार को पीटा, चेहरे पर पेशाब करने का आरोप

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In Mumbai A disable man raped a minor girl for a month gets 10 years in jail Imprisonment

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