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सूरत: BJP कार्यकर्ता पर आरोप, घर पहुंचाने के नाम पर मजदूरों से पैसे लिए, टिकट मांगने पर पीटा!

लॉकडाउन में फंसे मजदूर घर जाने के लिए परेशान हैं. कोई हजारों किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रहा है, तो कोई रेलवे ट्रैक के सहारे घर निकल जा रहा है. घर पहुंचने की उम्मीद में कुछ लोग रास्ते में ही दम तोड़ दे रहे हैं. कहने को तो सरकारों ने मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई है. फ्री में मजदूरों को घर पहुंचाने का दावा किया जा रहा है. लेकिन सबको ये सुविधा कहां नसीब हो पा रही है?

ऐसा ही एक मामला सामने आया है गुजरात के सूरत से. यहां का गोड़ादरा इलाका. मजूदरों ने पेट काटकर पैसे जमा किए. इस उम्मीद में कि घर पहुंच जाएंगे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने मजदूरों से टिकट बुक कराने के नाम पर पैसे लिए. लेकिन उसने न तो टिकट बुक कराया, न ही लोगों के पैसे वापस किए. इतना ही नहीं, आरोप है कि जिसने पैसे जमा करने के बाद बीजेपी कार्यकर्ता राजेश वर्मा को दिए थे, उसे मारा पीटा गया.

क्या है मामला?

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े पत्रकार संजय सिंह राठौड़ ने बताया कि झारखंड के मजदूरों ने घर जाने के लिए ट्रेन टिकट के पैसे जमा किए थे. उसे वासुदेव नाम के व्यक्ति को दिया था. उसने बीजेपी कार्यकर्ता राजेश वर्मा को ये पैसे दिए थे. बताया जा रहा है कि कई मजदूरों ने मिलकर एक लाख, 16 हजार रुपए जमा किए थे. जब टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने वासुदेव से इस बारे में बात की. वासुदेव ने राजेश वर्मा से बात की. आरोप है कि राजेश वर्मा ने मारपीट की. घटना के कई वीडियो सामने आए हैं. हालांकि बीजेपी ने राजेश वर्मा के पार्टी कार्यकर्ता होने से इंकार किया है. जबकि राजेश वर्मा ने फेसबुक पर खुद को बीजेपी का कार्यकर्ता बताया है.

एक वीडियो में दिख रहा है कि राजेश वर्मा और उसके आदमी वासुदेव को घर से निकालकर पीट रहे हैं. वहीं दूसरे वीडियो में वह घायल पड़ा है. उसके सिर से खून बह रहा है. वो कह रहा है,

मैं टिकट लाने के लिए गया था. मैंने एक लाख, 16 हजार रुपए दिए हैं. मैंने पैसे वापस करने के लिए कहा, तो उसने इनकार कर दिया. 2000-2000 में टिकट बेच रहा है. राजेश वर्मा ने बहुत मारा. मेरा सिर फाड़ दिया. राजेश वर्मा कहता है, जो करना है कर लो. मेरे पास सबूत है. टोकन है एक लाख, 16 हजार का. लेकिन अब वो पैसा नहीं दे रहा है.

इस वीडियो में एक अन्य व्यक्ति कह रहा है कि ऐसा नहीं होना चाहिए. जिसका टोकन नंबर लग गया, उसको भी टिकट नहीं दे रहा है. जिसका नहीं लगा, वो गाड़ी में बैठ गया. ये कौन-सा तरीका है. सबको टिकट मिलना चाहिए.

वीडियो बनाने वाले को घर से निकाला

इस घटना का वीडियो वायरल हो गया. आरोप है कि जिस व्यक्ति ने मारपीट का ये वीडियो बनाया था, उसे राजेश वर्मा ने किराए के कमरे से निकलवा दिया. जिस व्यक्ति को घर से निकाला गया, उसने बताया,

मैं अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ लक्ष्मीनारायण सोसायटी में रहता था. मेरे मकान मालिक रामेश्वर राणा ने अपने आदमियों से मुझे मरवाया. मैंने पुलिस को 46 बार फोन किया. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसके बाद मैं लिंबायत पुलिस स्टेशन पहुंचा. राजेश वर्मा ने मेरा कॉलर पकड़ लिया. गाली देने लगा. पुलिस के सामने पीटा. अब हम फुटपाथ पर रह रहे हैं. मैं अपने तीन छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाऊं?

पुलिस का क्या कहना है?

इस पूरे मामले में सूरत के डी डिविजन के ACP ए.एम. परमार का कहना है कि लिंबायत थाना क्षेत्र के गोड़ादरा इलाके में राजेश वर्मा नाम के व्यक्ति के ऑफिस के पास एक घटना हुई थी. वासुदेव वर्मा नाम के झारखंड के एक श्रमिक ने टिकट बनाने के लिए पैसे दिए थे. वो टिकट लेने के लिए राजेश वर्मा के यहां गया था. वहां झगड़ा हुआ. इसमें वासुदेव वर्मा को चोट लगी थी. उसने राजेश वर्मा के ख़िलाफ़ शिकायत की थी, उसकी गिरफ़्तारी भी हुई है.

पुलिस का कहना है कि वासुदेव वर्मा और अन्य लोगों को गलतफहमी हुई थी कि राजेश ने टिकट के पैसे के लिए थे, मगर टिकट नहीं दिया. दरअसल, झारखंड जाने के लिए ट्रेन तय नहीं हुई थी, टिकट भी नहीं बना था. बाद में यह बात मजूदरों को समझाई गई.

पार्षद के भाई पर लगा ज्यादा पैसा लेने का आरोप

सूरत का ही एक और वीडियो ट्विटर पर वायरल हो रहा है.  इस वीडियो के आधार पर सूरत के बीजेपी पार्षद के भाई पर मजदूरों से टिकट के अधिक पैसे लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं.

‘इंडिया टुडे’ से जुड़े सूरत के पत्रकार संजय सिंह राठौड़ ने बताया कि ये वीडियो तीन-चार दिन पुराना है. सूरत महानगरपालिका के पार्षद अमित राजपूत के भाई अजित राजपूत का वीडियो है. वीडियो वायरल होने के बाद पार्षद अमित राजपूत सामने आए. उन्होंने बताया कि वीडियो तब का है, जब ट्रेन चलनी शुरू नहीं हुई थी. उन्होंने कहा,

प्रशासन ने लिस्ट बनाने को कहा था. उस समय तक किराया तय नहीं हो पाया था, तो लगभग एक हजार रुपए लेने के लिए कहा गया था. लेकिन टिकट बनने के बाद जितने का टिकट बना था, उतने ही पैसे लिए गए. बाकी पैसे वापस कर दिए गए. मेरे पास पैसे वापस करने की रसीद भी है.

श्रमिक ट्रेनों से यात्रा करने वाले मजदूरों को अभी भी अपनी जेब से टिकट के पैसे देने पड़ रहे हैं. ये दो घटनाएं तो यही बता रही हैं. वहीं केंद्र सरकार का दावा है कि टिकट का पैसा रेलवे और राज्य सरकारें मिलकर दे रहे हैं.


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